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घरों से सामान जुटाकर पहला मंचन कराया तो ट्रालियों में पहुंचे थे लोग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Sep 2022 02:09 AM IST
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Collecting goods from homes and getting them staged first, people arrived in trolleys
वर्ष-1980 में कैकेयी के किरदार का मंचन करते प्रेम बावरा। फाइल फोटो। - फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। घरों से चुनियां, चादरें और अन्य सामान जुटाया गया। स्टेज से लेकर कलाकारों के पोशाक और हथियार तैयार हुए, तब जगाधरी के गोशाला ग्राउंड में डॉ. जुगल किशोर और प्रेम बावरा ने साथियों के साथ मिलकर पहली बार रामलीला का मंचन किया। उस दौरान रामलीला देखने के लिए दर्शक ट्रालियों में बैठकर पहुंचे थे। यह बात 1972 की रामलीला की है। इनमें डॉ. जुगल किशोर के देहांत के बाद प्रेम बावरा अब भी लगातार 50 वर्षों से रामलीला का मंचन करवा रहे हैं।
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प्रेम बावरा उन स्मृतियों को याद करते हुए कहते हैं कि उस दौरान रामलीला को लेकर लोगों के भावनात्मक जुड़ाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहला मंचन देखने के लिए दर्शक ट्रॉलियों में पहुंचे थे। मंचन की शुरुआत से हर वर्ष साथ जुड़े सहयोगियों के साथ श्री शारदा रामलीला ड्रामेटिक कमेटी का गठन किया गया। इसमें कुल 213 सदस्य हैं। कमेटी आठ वर्षों से पुरानी अनाज मंडी जगाधरी में रामलीला का मंचन करवा रही है। इस बार 20 सितंबर से नारद मोह संवाद से रामलीला का मंचन शुरू हो रहा है। कमेटी में जनरल डायरेक्टर प्रेम बावरा प्रसिद्ध पेंटर हैं। वे अपने यहां रामलीला के मंचन के साथ ही शहर की अन्य रामलीला के मंचन के लिए भी स्टेज तैयार करवाते हैं। रामलीला का वर्तमान स्वरूप जहां सुविधाओं से युक्त है, वहीं अतीत में रामलीला का मंचन संसाधनों के अभाव में परंपरागत साधनों पर निर्भर था।
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पहले ढाई हजार दर्शक आते थे अब हुए हजार
प्रेम बावरा ने बताया कि 40-50 साल पहले मंचन के लिए संसाधन कम थे। उस दौरान जब टीवी-मोबाइल नहीं थे, तब मंचन देखने लोग ट्रालियों में भरकर पहुंचते थे। अब मंचन के संसाधन बढ़े हैं, पर दर्शक पहले की तुलना में घटे हैं। शुरुआत में दो से ढाई हजार तक लोग पहुंचते थे, वहीं अब आबादी बढ़ने के बावजूद संख्या एक हजार से 1500 तक रहती है। पहले दर्शक जमीन पर बैठकर मंचन देखते थे, पर अब उनके लिए सोफे-कुर्सियां लगायी जाती हैं। कुर्सियां शुरुआत में 500 और कुछ दिन में दर्शक बढ़ने पर एक हजार तक हो जाती हैं। पहले देर रात दो से तीन बजे तक मंचन चलता था, वहीं अब रात 11-साढ़े बजे तक चलता है। बावरा ने बताया कि मंचन का उद्देश्य रामलीला के संदेश को पीढ़ी दर पीढ़ी पहुंचाने का है, इसलिए इसकी शुरुआत की थी। अब भी स्टेज पर अभिनय और उसे देखने वाली लगातार दूसरी-तीसरी पीढ़ी है। जिसे मंचन से जोड़ रखने को हर वर्ष कुछ नया कर रहे हैं। इस बार खाटू श्याम जी का जागरण, राजतिलक व भरत मिलाप पर शोभायात्रा और जरूरतमंद कन्याओं का विवाह कराया जाएगा।
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दो पीढ़ियों से पांच लोग कर रहे अभिनय
डायरेक्टर वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि परिवार से दो पीढ़ियों के पांच लोग मंचन से जुड़े हैं। वह खुद 12 वर्ष श्रीराम, पांच वर्ष रावण, पांच वर्ष हनुमान सहित परशुराम, केवट, कैकेयी जैसे किरदार निभा चुके हैं। जब वह श्रीराम बनते थे, तब छोटे भाई शैलेंद्र ने 12 वर्ष लक्ष्मण और जब वह रावण बनते थे तब शैलेंद्र ने भी पांच वर्ष मेघनाद का किरदार निभाया। वीरेंद्र ने बताया कि उनके दोनों बेटे चेतन, गोविंद और भतीजा नीतिश भी कई वर्षों से अलग-अलग किरदार का मंचन कर रहे हैं।
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