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Yamuna Nagar News: कागजों में दावे, धरातल पर काम नहीं
Thu, 06 Mar 2025 02:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 06 Mar 2025 02:53 AM IST
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यमुनानगर। स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। इसके लिए केंद्रीय टीम कभी भी शहर में आ सकती है। हालांकि नगर निगम अफसर इस बार नए प्रयास कर बेहतर रैंकिंग के दावे कर रहे हैं, पर कई बिंदुओं पर उनकी स्थिति अभी भी कमजोर है। इसमें एक कमजोरी सफाई कर्मियों की कमी हैं।
स्वच्छता के मोर्चे पर जंग जीतने के लिए शहर में मांग से आधे भी सफाई कर्मी नहीं हैं। ऐसे में कार्यालयों में बैठक कर भले दावे किए जाएं, पर धरातल पर ये दावे कागजों तक सिमट कर रह गए हैं। इससे करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी गलियों-सड़कों, खुले स्थानों व प्लॉटों में कचरा दिख रहा है। केंद्रीय टीम की नजर पड़ी तो शहर की स्वच्छ सर्वेक्षण में रैंकिंग बिगड़ने की आशंका है।
बता दें कि मौजूदा समय में नगर निगम क्षेत्र में 4.91 लाख की जनसंख्या पर तीन हजार सफाई कर्मियों की मांग हैं पर 700 से काम चलाया जा रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में शहर की स्वच्छ रैंकिंग राष्ट्र स्तर पर 170 रही, पर स्वच्छ सर्वेक्षण-2023 में यह 51 पायदान लुढक कर 221वें रैंक पर आ गई। करोड़ों खर्च व काफी प्रयास के बावजूद भी रैंकिंग बिगड़ने पर नगर निगम व अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। इस पर नगर निगम अफसरों ने दोबारा रैंकिंग सुधार के लिए शहर की स्वच्छता पर करोड़ों रुपये खर्च करने के साथ कई प्रयोग किए हैं पर वे सफाई कर्मचारियों की कमी को दूर नहीं कर पाए हैं।
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नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के अंतर्गत कुल 22 वार्ड हैं। यहां कुल आबादी 491002 है। इस पर नगर निगम में सफाई कर्मियों के करीब 1200 पद स्वीकृत हैं, पर लगभग 700 सफाई कर्मी कार्यरत हैं। नियमानुसार 400 की आबादी पर एक सफाई कर्मी होना चाहिए, पर यहां एक कर्मी पर 700 की आबादी का जिम्मा है।
स्वीपिंग मशीन पर लाखों खर्च, उसके बजाय सफाई कर्मी रखने चाहिए : निवर्तमान पार्षदों में रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह, निर्मल चौहान ने कहा कि नगर निगम का गठन 17 मार्च 2010 में हुआ था। तब से 15 वर्ष होने को है, पर सफाई कर्मियों की कमी दूर नहीं हो पाई। यह मुद्दा सदन बैठकों में कई बार आया, वहीं कर्मचारी संगठनों ने भी लगातार पत्राचार के माध्यम से सफाई कर्मी बढ़ाने की मांग की।
इसके बाद भी सफाई कर्मियों की संख्या कई वर्षों से 650 से 700 पर ही अटकी है। सफाई कर्मचारी बढ़ाने के बजाय नगर निगम ने स्वीपिंग मशीन मंगाई, जिस पर हर माह चार से पांच लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। यह स्वीपिंग मशीन केवल मुख्य मार्गों पर डिवाइडर के किनारे पर सफाई करती है, जबकि मार्ग के अन्य हिस्सों में कचरा व गंदगी रहती है। कुल मिलाकर यह स्वीपिंग मशीन कारगर नहीं है, जिस पर लाखों रुपये खर्च करने के बजाय नगर निगम को सफाई कर्मचारी रखने चाहिए थे।
9500 अंकों का होगा स्वच्छ सर्वेक्षण : स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में ट्रिपल आर (रीयूज, रिड्यूस, रीसाइकिल) के आधार पर कुल 9500 अंक का है। यह तीन हिस्सों में बंटा है, जिसमें 60 फीसदी यानी 5705 अंक सेवाओं के स्तर में प्रगति, 26 फीसदी यानी 2500 अंक सर्टिफिकेशन व 14 फीसदी यानी 1295 अंक लोगों के फीडबैक के निर्धारित किए गए हैं।
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स्वच्छता के मोर्चे पर जंग जीतने के लिए शहर में मांग से आधे भी सफाई कर्मी नहीं हैं। ऐसे में कार्यालयों में बैठक कर भले दावे किए जाएं, पर धरातल पर ये दावे कागजों तक सिमट कर रह गए हैं। इससे करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी गलियों-सड़कों, खुले स्थानों व प्लॉटों में कचरा दिख रहा है। केंद्रीय टीम की नजर पड़ी तो शहर की स्वच्छ सर्वेक्षण में रैंकिंग बिगड़ने की आशंका है।
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बता दें कि मौजूदा समय में नगर निगम क्षेत्र में 4.91 लाख की जनसंख्या पर तीन हजार सफाई कर्मियों की मांग हैं पर 700 से काम चलाया जा रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में शहर की स्वच्छ रैंकिंग राष्ट्र स्तर पर 170 रही, पर स्वच्छ सर्वेक्षण-2023 में यह 51 पायदान लुढक कर 221वें रैंक पर आ गई। करोड़ों खर्च व काफी प्रयास के बावजूद भी रैंकिंग बिगड़ने पर नगर निगम व अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। इस पर नगर निगम अफसरों ने दोबारा रैंकिंग सुधार के लिए शहर की स्वच्छता पर करोड़ों रुपये खर्च करने के साथ कई प्रयोग किए हैं पर वे सफाई कर्मचारियों की कमी को दूर नहीं कर पाए हैं।
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नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के अंतर्गत कुल 22 वार्ड हैं। यहां कुल आबादी 491002 है। इस पर नगर निगम में सफाई कर्मियों के करीब 1200 पद स्वीकृत हैं, पर लगभग 700 सफाई कर्मी कार्यरत हैं। नियमानुसार 400 की आबादी पर एक सफाई कर्मी होना चाहिए, पर यहां एक कर्मी पर 700 की आबादी का जिम्मा है।
स्वीपिंग मशीन पर लाखों खर्च, उसके बजाय सफाई कर्मी रखने चाहिए : निवर्तमान पार्षदों में रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह, निर्मल चौहान ने कहा कि नगर निगम का गठन 17 मार्च 2010 में हुआ था। तब से 15 वर्ष होने को है, पर सफाई कर्मियों की कमी दूर नहीं हो पाई। यह मुद्दा सदन बैठकों में कई बार आया, वहीं कर्मचारी संगठनों ने भी लगातार पत्राचार के माध्यम से सफाई कर्मी बढ़ाने की मांग की।
इसके बाद भी सफाई कर्मियों की संख्या कई वर्षों से 650 से 700 पर ही अटकी है। सफाई कर्मचारी बढ़ाने के बजाय नगर निगम ने स्वीपिंग मशीन मंगाई, जिस पर हर माह चार से पांच लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। यह स्वीपिंग मशीन केवल मुख्य मार्गों पर डिवाइडर के किनारे पर सफाई करती है, जबकि मार्ग के अन्य हिस्सों में कचरा व गंदगी रहती है। कुल मिलाकर यह स्वीपिंग मशीन कारगर नहीं है, जिस पर लाखों रुपये खर्च करने के बजाय नगर निगम को सफाई कर्मचारी रखने चाहिए थे।
9500 अंकों का होगा स्वच्छ सर्वेक्षण : स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में ट्रिपल आर (रीयूज, रिड्यूस, रीसाइकिल) के आधार पर कुल 9500 अंक का है। यह तीन हिस्सों में बंटा है, जिसमें 60 फीसदी यानी 5705 अंक सेवाओं के स्तर में प्रगति, 26 फीसदी यानी 2500 अंक सर्टिफिकेशन व 14 फीसदी यानी 1295 अंक लोगों के फीडबैक के निर्धारित किए गए हैं।