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Yamuna Nagar News: अभियान बेअसर, सरकारी स्कूलों में कम हुए पांच हजार विद्यार्थी
Sun, 26 Jul 2026 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 26 Jul 2026 01:12 AM IST
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जिला शिक्षा सदन। आर्काइव
अभय सिंह
जगाधरी। राजकीय विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग के अभियान बेअसर साबित हो रहे हैं। एमआईएस पोर्टल पर अभी तक दर्ज आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष जिले के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या पांच हजार कम हो गई है।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले के तमाम राजकीय विद्यालयों में करीब 82,000 विद्यार्थी हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में पांच हजार कम है। यही नहीं यदि छह वर्ष के आंकड़ों पर नजर डाले तो राजकीय विद्यालयों से 25,000 विद्यार्थी दूसरे विद्यालयों व संस्थानों में चले गए हैं।
राजकीय विद्यालयों में लगातार घटती छात्र संख्या शिक्षा विभाग के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। बावजूद इसके अधिकारी इस मुद्दे पर जिम्मेदारी तय करने या कारणों की पड़ताल करने के बजाय जवाबदेही से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के दावे केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे।
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विभाग को इन बच्चों के चले जाने का कारण नहीं पता है। इनमें स्लम बस्तियों, ईंट भट्ठों, सड़क निर्माण मजदूरों, भिक्षावृत्ति में संलिप्त बच्चों तक पकड़ बनाना मुश्किल है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में जिले के राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की कुल संख्या 1,07,386 थी।
वर्ष 2023 में विद्यार्थियों की संख्या घटकर 1,07,212 हो गई। वहीं, वर्ष 2024 में यह संख्या और घटी और राजकीय विद्यालयों में करीब 97,200 विद्यार्थी रह गए। वर्ष 2025 में राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या 86,517 थी। वहीं, इस बार जिले के राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या घटकर 82,000 से नीचे चली गई है। संवाद
स्कूल छोड़ चुके विद्यार्थियों की जानकारी जुटाई जा रही है। शिक्षक बच्चों के अभिभावकों से जानकारी ले रहे हैं। अभी दाखिले चल रहे हैं, पोर्टल पर सभी विद्यार्थियों की जानकारी अपडेट नहीं हुई हैं। - प्रेम लता बक्शी, जिला शिक्षा अधिकारी।
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जगाधरी। राजकीय विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग के अभियान बेअसर साबित हो रहे हैं। एमआईएस पोर्टल पर अभी तक दर्ज आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष जिले के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या पांच हजार कम हो गई है।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले के तमाम राजकीय विद्यालयों में करीब 82,000 विद्यार्थी हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में पांच हजार कम है। यही नहीं यदि छह वर्ष के आंकड़ों पर नजर डाले तो राजकीय विद्यालयों से 25,000 विद्यार्थी दूसरे विद्यालयों व संस्थानों में चले गए हैं।
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राजकीय विद्यालयों में लगातार घटती छात्र संख्या शिक्षा विभाग के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। बावजूद इसके अधिकारी इस मुद्दे पर जिम्मेदारी तय करने या कारणों की पड़ताल करने के बजाय जवाबदेही से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के दावे केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे।
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विभाग को इन बच्चों के चले जाने का कारण नहीं पता है। इनमें स्लम बस्तियों, ईंट भट्ठों, सड़क निर्माण मजदूरों, भिक्षावृत्ति में संलिप्त बच्चों तक पकड़ बनाना मुश्किल है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में जिले के राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की कुल संख्या 1,07,386 थी।
वर्ष 2023 में विद्यार्थियों की संख्या घटकर 1,07,212 हो गई। वहीं, वर्ष 2024 में यह संख्या और घटी और राजकीय विद्यालयों में करीब 97,200 विद्यार्थी रह गए। वर्ष 2025 में राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या 86,517 थी। वहीं, इस बार जिले के राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या घटकर 82,000 से नीचे चली गई है। संवाद
स्कूल छोड़ चुके विद्यार्थियों की जानकारी जुटाई जा रही है। शिक्षक बच्चों के अभिभावकों से जानकारी ले रहे हैं। अभी दाखिले चल रहे हैं, पोर्टल पर सभी विद्यार्थियों की जानकारी अपडेट नहीं हुई हैं। - प्रेम लता बक्शी, जिला शिक्षा अधिकारी।