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Yamuna Nagar News: सड़क पर बिखर गए शरीर के लोथड़े
Thu, 17 Apr 2025 02:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 17 Apr 2025 02:39 AM IST
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यमुनानगर। अगले माह 13 मई को रोय का जन्मदिन है। इस दिन रोय तीन साल का हो जाता। जन्मदिन के आने से पहले ही परिवार की खुशियां मातम में बदल गई। शहर के बीचोबीच जहां हादसा हुआ उस समेत अन्य सड़कों पर भारी वाहनों की नो एंट्री है।
इसके बावजूद शहर में धड़ल्ले से डंपर, ट्रक व लकड़ी से भरी ट्रैक्टर-ट्रालियां निकल रही हैं। यहां तक की डीसी कैंप आवास, जिला सचिवालय के सामने से ऐसे वाहन बिना किसी डर के दौड़ रहे हैं, परंतु कोई उन्हें रोकने वाला नहीं है।
इसलिए तीन साल से भी कम उम्र के मासूम की इस दर्दनाक हादसे में जान चली गई। बच्चे का संस्कार करने के लिए परिजनों के पास उसका पूरा शरीर तक नहीं था। डंपर से कुचले जाने और लकड़ियां गिरने के बाद रोय के शरीर के लोथड़े सड़क पर दूर तक बिखर गए। पोस्टमार्टम से लेकर उसके अंतिम संस्कार तक केवल खानापूर्ति हुई। मां आखिरी बार ठीक से अपने बच्चे को गोद में भी नहीं उठा सकी।
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इतना सब कुछ होने के बाद सोमवार को पुलिस ने प्रेस नोट जारी कर दिया कि शहर में भारी वाहन, खनन सामग्री, लकड़ी से लदे वाहनों का आज के बाद शहर में प्रवेश पूर्णतया वर्जित रहेगा। जबकि भारी वाहनों का प्रवेश पहले से वर्जित है। परंतु पुलिस शहर में आने वाले किसी भी वाहन को रोकती तक नहीं। शहर के हर चौक-चौराहे पर पुलिस तैनात है। पुलिस के साथ सभी चौक पर चार से पांच होमगार्ड भी रहते हैं।
पुलिस का ध्यान चौक पर केवल वाहनों के चालान काटने पर ज्यादा है। चौक पर कोई यूपी नंबर की बाइक या कार देखी नहीं की पुलिस तेजी से उसकी तरफ लपक पड़ती है। जबकि अपने ही शहर के लोग वहीं बिना हेलमेट व बिना सीट बेल्ट के वाहन पर खड़े रहते हैं। यदि पुलिस इतनी तेजी नो एंट्री में भारी वाहनों के घुसने से रोकने पर दिखाती तो शायद तीन साल का रोय आज अपने माता-पिता के साथ अठखेलियां कर रहा होता।
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इसके बावजूद शहर में धड़ल्ले से डंपर, ट्रक व लकड़ी से भरी ट्रैक्टर-ट्रालियां निकल रही हैं। यहां तक की डीसी कैंप आवास, जिला सचिवालय के सामने से ऐसे वाहन बिना किसी डर के दौड़ रहे हैं, परंतु कोई उन्हें रोकने वाला नहीं है।
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इसलिए तीन साल से भी कम उम्र के मासूम की इस दर्दनाक हादसे में जान चली गई। बच्चे का संस्कार करने के लिए परिजनों के पास उसका पूरा शरीर तक नहीं था। डंपर से कुचले जाने और लकड़ियां गिरने के बाद रोय के शरीर के लोथड़े सड़क पर दूर तक बिखर गए। पोस्टमार्टम से लेकर उसके अंतिम संस्कार तक केवल खानापूर्ति हुई। मां आखिरी बार ठीक से अपने बच्चे को गोद में भी नहीं उठा सकी।
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इतना सब कुछ होने के बाद सोमवार को पुलिस ने प्रेस नोट जारी कर दिया कि शहर में भारी वाहन, खनन सामग्री, लकड़ी से लदे वाहनों का आज के बाद शहर में प्रवेश पूर्णतया वर्जित रहेगा। जबकि भारी वाहनों का प्रवेश पहले से वर्जित है। परंतु पुलिस शहर में आने वाले किसी भी वाहन को रोकती तक नहीं। शहर के हर चौक-चौराहे पर पुलिस तैनात है। पुलिस के साथ सभी चौक पर चार से पांच होमगार्ड भी रहते हैं।
पुलिस का ध्यान चौक पर केवल वाहनों के चालान काटने पर ज्यादा है। चौक पर कोई यूपी नंबर की बाइक या कार देखी नहीं की पुलिस तेजी से उसकी तरफ लपक पड़ती है। जबकि अपने ही शहर के लोग वहीं बिना हेलमेट व बिना सीट बेल्ट के वाहन पर खड़े रहते हैं। यदि पुलिस इतनी तेजी नो एंट्री में भारी वाहनों के घुसने से रोकने पर दिखाती तो शायद तीन साल का रोय आज अपने माता-पिता के साथ अठखेलियां कर रहा होता।