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कोरोना के बाद ब्लैक फंगस की दस्तक, कोरोना पॉजिटिव रह चुका युवक आया चपेट में
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यमुनानगर। कोरोना रोगियों के लिए खतरनाक बन रहे ब्लैक फंगस यानी ‘म्यूकर माइकोसिस’ ने अब जिले में भी दस्तक दी है। शहर के जिंदल अस्पताल में आए एक रोगी को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया। जहां पर उसका एक आंख का ऑपरेशन किया गया। अब मरीज को ऑपरेशन के बाद वापस जिंदल अस्पताल में भेज दिया गया है। आधिकारिक तौर पर यह जिले में ब्लैक फंगस का पहला मामला है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के गांव भिक्खनपुर निवासी 47 वर्षीय युवक को यह बीमारी हुई है।
अप्रैल में उसे कोरोना संक्रमण हुआ था और शहर के एक अस्पताल में कोरोना से जीत हासिल करके घर चला गया था। कोरोना संक्रमण ठीक होने के बाद उसे ब्लैक फंगस के लक्षण हो गए थे, जिस पर परिजनों ने उसे जिंदल अस्पताल में दाखिल कराया गया। यहां से उसे पीजीआई रेफर किया गया था। जिंदल अस्पताल के डॉक्टर योगेश जिंदल ने बताया कि कोविड का ये मरीज 10 अप्रैल को यह एक दूसरे अस्पताल में भर्ती हुआ था। 25 अप्रैल को वह ठीक होकर घर चला गया था। करीब दस दिन बाद उसे ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाई देने लगे। इसके चेहरे की एक साइड में सूजन आ गई और सिर में बहुत ज्यादा दर्द हो गया। मरीज को मेरे पास लाया गया। जहां पता चला कि इसे ब्लैक फंगस है। उन्होंने इसे पीजीआई रेफर कर दिया, वहां पर 17 मई को ऑपरेशन करके मरीज की आंख के पास जो साइनेसिस थे। उन्हें अंदर से साफ कर दिया गया है और एक आंख निकाल दी गई। ऑपरेशन के बाद 19 मई को इसे आगे के इलाज के लिए वापस हमारे पास भेज दिया गया।
सावधानी बरतें
डॉ. योगेश जिंदल के मुताबिक अनियंत्रित डायबिटीज, रक्त कैंसर, थैलेसीमिया और कैंसर पीड़ित रोगियों को स्टेरॉयड का सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए, क्योंकि ऐसे रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। यह ब्लैक फंगस को बढ़ावा देती है। इसमें प्रारंभिक तौर पर बुखार, चेहरे पर दर्द, नाक में भारीपन, सुन्न होना, आंखों में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं। ब्लैक फंगस संक्रमण होने पर एंटी फंगल इंजेक्शन एंफोटेरेसिन-बी लगाया जाता है। ये इंजेक्शन करीब 10 से 15 दिन मरीज को लगाने पड़ते हैं। इंजेक्शन की डिमांड भेजी हुई है।
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कोरोना हुआ था तो इन लक्षणों का ध्यान रखें
-नाक में दिक्कत महसूस हो रहा हो।
-सिरदर्द या चेहरे के एक हिस्से में ज्यादा दर्द और सूजन हो।
-चेहरा सुन्न पड़ रहा हो और रंग बदल रहा हो।
-पलकें सूजने लग जाएं और दांत हिलने लगे।
-बुखार, सांस लेने में दिक्कत, कफ।
-खंखार में खून आना और सीने में दर्द।
-धुंधला दिखाई पड़े।
सिविल सर्जन डॉ. विजय दहिया ने बताया कि जिले में एक मरीज को पीजीआई से ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। पीजीआई में हुई जांच में सामने आया कि युवक को आंख के पास ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइसोसिस) हुआ था। पीजीआई में उसका ऑपरेशन कर आंख निकाली गई। अब उसे वापस जिंदल अस्पताल में ही आगे के इलाज के लिए भेजा गया है।
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अप्रैल में उसे कोरोना संक्रमण हुआ था और शहर के एक अस्पताल में कोरोना से जीत हासिल करके घर चला गया था। कोरोना संक्रमण ठीक होने के बाद उसे ब्लैक फंगस के लक्षण हो गए थे, जिस पर परिजनों ने उसे जिंदल अस्पताल में दाखिल कराया गया। यहां से उसे पीजीआई रेफर किया गया था। जिंदल अस्पताल के डॉक्टर योगेश जिंदल ने बताया कि कोविड का ये मरीज 10 अप्रैल को यह एक दूसरे अस्पताल में भर्ती हुआ था। 25 अप्रैल को वह ठीक होकर घर चला गया था। करीब दस दिन बाद उसे ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाई देने लगे। इसके चेहरे की एक साइड में सूजन आ गई और सिर में बहुत ज्यादा दर्द हो गया। मरीज को मेरे पास लाया गया। जहां पता चला कि इसे ब्लैक फंगस है। उन्होंने इसे पीजीआई रेफर कर दिया, वहां पर 17 मई को ऑपरेशन करके मरीज की आंख के पास जो साइनेसिस थे। उन्हें अंदर से साफ कर दिया गया है और एक आंख निकाल दी गई। ऑपरेशन के बाद 19 मई को इसे आगे के इलाज के लिए वापस हमारे पास भेज दिया गया।
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डॉ. योगेश जिंदल के मुताबिक अनियंत्रित डायबिटीज, रक्त कैंसर, थैलेसीमिया और कैंसर पीड़ित रोगियों को स्टेरॉयड का सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए, क्योंकि ऐसे रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। यह ब्लैक फंगस को बढ़ावा देती है। इसमें प्रारंभिक तौर पर बुखार, चेहरे पर दर्द, नाक में भारीपन, सुन्न होना, आंखों में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं। ब्लैक फंगस संक्रमण होने पर एंटी फंगल इंजेक्शन एंफोटेरेसिन-बी लगाया जाता है। ये इंजेक्शन करीब 10 से 15 दिन मरीज को लगाने पड़ते हैं। इंजेक्शन की डिमांड भेजी हुई है।
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कोरोना हुआ था तो इन लक्षणों का ध्यान रखें
-नाक में दिक्कत महसूस हो रहा हो।
-सिरदर्द या चेहरे के एक हिस्से में ज्यादा दर्द और सूजन हो।
-चेहरा सुन्न पड़ रहा हो और रंग बदल रहा हो।
-पलकें सूजने लग जाएं और दांत हिलने लगे।
-बुखार, सांस लेने में दिक्कत, कफ।
-खंखार में खून आना और सीने में दर्द।
-धुंधला दिखाई पड़े।
सिविल सर्जन डॉ. विजय दहिया ने बताया कि जिले में एक मरीज को पीजीआई से ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। पीजीआई में हुई जांच में सामने आया कि युवक को आंख के पास ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइसोसिस) हुआ था। पीजीआई में उसका ऑपरेशन कर आंख निकाली गई। अब उसे वापस जिंदल अस्पताल में ही आगे के इलाज के लिए भेजा गया है।