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अत्याधुनिक प्रणाली से संचालित किया जाएगा हथिनीकुंड बैराज
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सिंचाई विभाग की ओर से पानी वितरण के लिए अब हथिनीकुंड बैराज को हाईटेक किया गया है। नई प्रणाली के तहत अब बैराज के सभी 18 गेटों को एक साथ खोला और बंद किया जा सकता है। यही नहीं अधिकारी किसी भी स्थान से पूरे सिस्टम पर न केवल नजर रख सकेंगे, बल्कि ऑपरेट भी कर सकते हैं।
हथिनीकुंड बैराज के गेट खोलने और बंद करने में आठ से 10 कर्मचारियों की ड्यूटी लगानी पड़ती थी, लेकिन अब सिस्टम नियंत्रण के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से एक कर्मचारी इसे नियंत्रित कर सकेगा। साथ ही अधिकारी भी आसानी से मानीटरिंग कर सकेंगे। विदित हो कि हथिनीकुंड बैराज से हरियाणा, दिल्ली, यूपी और राजस्थान के लिए पानी का वितरण होता है।
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता विनोद कुमार के मुताबिक अत्याधुनिक ऑपरेटिंग प्रणाली विकसित की गई है, जिसमें समय और श्रम की बर्बादी नहीं होगी और काम आसान हो जाएगा। उन्होंने बताया कि अब किस गेट से कितना पानी भेजा जा रहा है, इसके रिकॉर्ड को दर्ज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह ऑटोमेटिक तरीके से रिकार्ड में दर्ज हो जाएगा, जिसे किसी भी समय देखा जा सकता है।
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वर्जन
हथिनीकुंड बैराज से चार राज्यों में पानी का वितरण होता है। यहां पूरी संचालक प्रणाली को अत्याधुनिक कर दिया गया है। नई प्रणाली से काम करना आसान हो जाएगा। - गिरीश अरोड़ा, डीसी
फोटो नंबर 09, 10
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हथिनीकुंड बैराज के गेट खोलने और बंद करने में आठ से 10 कर्मचारियों की ड्यूटी लगानी पड़ती थी, लेकिन अब सिस्टम नियंत्रण के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से एक कर्मचारी इसे नियंत्रित कर सकेगा। साथ ही अधिकारी भी आसानी से मानीटरिंग कर सकेंगे। विदित हो कि हथिनीकुंड बैराज से हरियाणा, दिल्ली, यूपी और राजस्थान के लिए पानी का वितरण होता है।
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सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता विनोद कुमार के मुताबिक अत्याधुनिक ऑपरेटिंग प्रणाली विकसित की गई है, जिसमें समय और श्रम की बर्बादी नहीं होगी और काम आसान हो जाएगा। उन्होंने बताया कि अब किस गेट से कितना पानी भेजा जा रहा है, इसके रिकॉर्ड को दर्ज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह ऑटोमेटिक तरीके से रिकार्ड में दर्ज हो जाएगा, जिसे किसी भी समय देखा जा सकता है।
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हथिनीकुंड बैराज से चार राज्यों में पानी का वितरण होता है। यहां पूरी संचालक प्रणाली को अत्याधुनिक कर दिया गया है। नई प्रणाली से काम करना आसान हो जाएगा। - गिरीश अरोड़ा, डीसी
फोटो नंबर 09, 10