{"_id":"675dd5fb397650e9c50fd134","slug":"asan-barrage-becomes-a-haven-for-foreign-birds-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1020-129881-2024-12-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: आसन बैराज बना विदेशी परिंदों का ठिकाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: आसन बैराज बना विदेशी परिंदों का ठिकाना
Sun, 15 Dec 2024 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 15 Dec 2024 12:31 AM IST
विज्ञापन
नवाब खान
प्रतापनगर। हर साल हथिनीकुंड बैराज पर आने वाले विदेशी पक्षी इस बार उत्तराखंड के आसन बैराज पर ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। इससे लग रहा है कि उन्हें अब यहां का वातावरण रास नहीं आ रहा है।
करीब 5000 किलोमीटर का सफर तय करके हथिनीकुंड बैराज पहुंचने वाले विदेशी मेहमानों ने अनुकूल ठिकाना उत्तराखंड के आसन बैराज को चुना। इसका मुख्य कारण सर्दी में देरी और हथिनीकुंड बैराज पर बढ़ता ध्वनि प्रदूषण माना जा रहा हैस जो प्रवासी पक्षियों को नहीं भा रहा है। आधा दिसंबर गुजर गया है, लेकिन हथिनीकुंड बैराज का चबूतरा प्रवासी पक्षियों के शोर को तरस रहा है।
दिसंबर में नहरी क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में दर्जनों प्रजातियों के विदेशी मेहमान यहां दिखाई देते थे, जो सारा दिन यमुना के पानी में अठखेलियां करते थे। अब हथिनीकुंड बैराज का वातावरण भी हर दिन बदलता जा रहा है। कभी बैराज क्षेत्र काफी शांत और स्वच्छ था, लेकिन जब से यहां बोटिंग शुरू करवाई गई है तब से यहां पर शोर ज्यादा बढ़ गया है। यहां आने वाले पर्यटक बोट में बैठकर यमुना के चक्कर लगाते हैं। शोर के कारण प्रवासी पक्षी टिक नहीं पाते और यमुना को छोड़कर अन्य जगहों पर अपना ठिकाना तलाश रहे हैं। हथिनीकुंड बैराज पर सैकड़ों की संख्या में विदेशी मेहमान नजर आते थे, लेकिन शोर की वजह से पक्षियों ने अपना ठिकाना बदल लिया है।
विज्ञापन
कुछ विदेशी मेहमान दादूपुर हेड, ताजेवाला, भूडकलां, कलेसर इत्यादि स्थानों पर नहर के किनारे देखे जा सकते हैं। अब हथिनीकुंड बैराज पर बोटिंग, यहां बना पार्क व अधिक शोर प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल नहीं रहा। ऐसे में अब हथनीकुंड बैराज विदेशी मेहमानों के बगैर सूना नजर आ रहा है। संवाद
देखने को मिलती थीं ये प्रजातियां
सर्दी के सीजन में यहां पहुंचने वाले विदेशी मेहमानों बार-हेडेड गूज, ग्रेलैग गूज, कर्ल्यूज, ग्रेट क्रेस्टेड ग्रेब, व्रीनेक, बैलोन क्रेक, ब्राउन क्रेक, कॉमन क्रेन, डेमोइसेल क्रेन, कुछ बजर्ड और हैरियर शामिल हैं। वर्डिटर, रेड-ब्रेस्टेड और टैगा आदि विदेशी मेहमान यहां पहुंचते थे। इस बार केवल बत्तख और जल पक्षी दिख रहे हैं लेकिन संख्या कम है। रैप्टर भी यहां आते रहे, लेकिन इस बार वह भी दिखाई दे रहे हैं।
विज्ञापन
प्रतापनगर। हर साल हथिनीकुंड बैराज पर आने वाले विदेशी पक्षी इस बार उत्तराखंड के आसन बैराज पर ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। इससे लग रहा है कि उन्हें अब यहां का वातावरण रास नहीं आ रहा है।
करीब 5000 किलोमीटर का सफर तय करके हथिनीकुंड बैराज पहुंचने वाले विदेशी मेहमानों ने अनुकूल ठिकाना उत्तराखंड के आसन बैराज को चुना। इसका मुख्य कारण सर्दी में देरी और हथिनीकुंड बैराज पर बढ़ता ध्वनि प्रदूषण माना जा रहा हैस जो प्रवासी पक्षियों को नहीं भा रहा है। आधा दिसंबर गुजर गया है, लेकिन हथिनीकुंड बैराज का चबूतरा प्रवासी पक्षियों के शोर को तरस रहा है।
विज्ञापन
दिसंबर में नहरी क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में दर्जनों प्रजातियों के विदेशी मेहमान यहां दिखाई देते थे, जो सारा दिन यमुना के पानी में अठखेलियां करते थे। अब हथिनीकुंड बैराज का वातावरण भी हर दिन बदलता जा रहा है। कभी बैराज क्षेत्र काफी शांत और स्वच्छ था, लेकिन जब से यहां बोटिंग शुरू करवाई गई है तब से यहां पर शोर ज्यादा बढ़ गया है। यहां आने वाले पर्यटक बोट में बैठकर यमुना के चक्कर लगाते हैं। शोर के कारण प्रवासी पक्षी टिक नहीं पाते और यमुना को छोड़कर अन्य जगहों पर अपना ठिकाना तलाश रहे हैं। हथिनीकुंड बैराज पर सैकड़ों की संख्या में विदेशी मेहमान नजर आते थे, लेकिन शोर की वजह से पक्षियों ने अपना ठिकाना बदल लिया है।
विज्ञापन
कुछ विदेशी मेहमान दादूपुर हेड, ताजेवाला, भूडकलां, कलेसर इत्यादि स्थानों पर नहर के किनारे देखे जा सकते हैं। अब हथिनीकुंड बैराज पर बोटिंग, यहां बना पार्क व अधिक शोर प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल नहीं रहा। ऐसे में अब हथनीकुंड बैराज विदेशी मेहमानों के बगैर सूना नजर आ रहा है। संवाद
देखने को मिलती थीं ये प्रजातियां
सर्दी के सीजन में यहां पहुंचने वाले विदेशी मेहमानों बार-हेडेड गूज, ग्रेलैग गूज, कर्ल्यूज, ग्रेट क्रेस्टेड ग्रेब, व्रीनेक, बैलोन क्रेक, ब्राउन क्रेक, कॉमन क्रेन, डेमोइसेल क्रेन, कुछ बजर्ड और हैरियर शामिल हैं। वर्डिटर, रेड-ब्रेस्टेड और टैगा आदि विदेशी मेहमान यहां पहुंचते थे। इस बार केवल बत्तख और जल पक्षी दिख रहे हैं लेकिन संख्या कम है। रैप्टर भी यहां आते रहे, लेकिन इस बार वह भी दिखाई दे रहे हैं।