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Yamuna Nagar News: बाली का वध होते ही गूंजा जय श्रीराम
Sun, 28 Sep 2025 03:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 28 Sep 2025 03:42 AM IST
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आईटीआई सब्जी मंडी में आयोजित रामलीला में प्रस्तुती देते कलाकार। संवाद।
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। शहर में चल रही विभिन्न रामलीला में श्रीराम सुग्रीव मित्रता, बाली वध व लंका दहन की कथा का मंचन किया गया। सीता की खोज में भगवान श्रीराम माता शबरी के बताए अनुसार दक्षिण में पंपा सरोवर पर पहुंचे। यहां उन्हें कोई दूत समझकर हनुमान जी ब्राह्मण का वेश बनकर राम-लखन से मिले। यहां उनकी पहचान सुनिश्चित करने के बाद वे श्रीराम व लक्ष्मण को लेकर वानर राज सुग्रीव के पास ले गए।
श्रीराम व सुग्रीव की मित्रता हुई। इसके बाद उन्होंने सुग्रीव की आप बीती जानकर बाली को दंड देने का निर्णय लिया। इसके बाद श्रीराम ने बाली का वध किया। बाली के वध के साथ ही पंडाल जय श्रीराम के घोष से गूंज उठा। इस दौरान कैटल कंपाउंट, आईटीआई सब्जी मंडी, जगाधरी पुरानी अनाजमंडी, झंडा चौक की रामलीला में बाली वध का मंचन किया गया। वहीं, रामपुरा के राम पार्क की रामलीला में अक्षय कुमार वध व लंका दहन की कथा का वृतांत दिखाया गया।
मंचन में दिखाया कि श्रीराम व लक्ष्मण सीता को वन में ढूंढते हुए पंपासरोवर पहुंचते हैं। यहां उनकी भेंट हनुमान जी से होती है और हनुमान जी श्रीराम से सारा वृतांत जानकर उन्हें सुग्रीव से मिलाते हैं। सुग्रीव राम को अपने साथ हुए सारी व्यथा बताते हैं कि कैसे उनकी पत्नी को उसके भाई बाली ने हरण कर उनका सारा राज्य अपने पास रखा हुआ है। तब श्रीराम सुग्रीव से कहते है कि वह उनकी पत्नी को बाली से छुड़ाएंगे और उसका राज्य भी उसे वापस दिलाएंगे।
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उसके बाद सुग्रीव श्रीराम से वचन देते हैं कि वे सभी सीता माता को ढूंढने में उनकी सहायता करेंगे। मंचन में दिखाया कि बाली ने मृत्यु के दौरान पुत्र अंगद को श्रीराम की सेवा में रहने की आज्ञा दी। बाली ने श्रीराम व सुग्रीव से क्षमा मांगी और अंगद को अपने साथ पुत्र की तरह प्रेम करने का वचन लिया।
पिता के संस्कार के बाद राजकुमार अंगद पिता की आज्ञा अनुसार श्रीराम की सहायता में जुट जाते हैं। सुग्रीव को किशकिंदा का राजा बनाकर श्रीराम अंगद को राजकुमार बनाते हैं।
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जगाधरी। शहर में चल रही विभिन्न रामलीला में श्रीराम सुग्रीव मित्रता, बाली वध व लंका दहन की कथा का मंचन किया गया। सीता की खोज में भगवान श्रीराम माता शबरी के बताए अनुसार दक्षिण में पंपा सरोवर पर पहुंचे। यहां उन्हें कोई दूत समझकर हनुमान जी ब्राह्मण का वेश बनकर राम-लखन से मिले। यहां उनकी पहचान सुनिश्चित करने के बाद वे श्रीराम व लक्ष्मण को लेकर वानर राज सुग्रीव के पास ले गए।
श्रीराम व सुग्रीव की मित्रता हुई। इसके बाद उन्होंने सुग्रीव की आप बीती जानकर बाली को दंड देने का निर्णय लिया। इसके बाद श्रीराम ने बाली का वध किया। बाली के वध के साथ ही पंडाल जय श्रीराम के घोष से गूंज उठा। इस दौरान कैटल कंपाउंट, आईटीआई सब्जी मंडी, जगाधरी पुरानी अनाजमंडी, झंडा चौक की रामलीला में बाली वध का मंचन किया गया। वहीं, रामपुरा के राम पार्क की रामलीला में अक्षय कुमार वध व लंका दहन की कथा का वृतांत दिखाया गया।
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मंचन में दिखाया कि श्रीराम व लक्ष्मण सीता को वन में ढूंढते हुए पंपासरोवर पहुंचते हैं। यहां उनकी भेंट हनुमान जी से होती है और हनुमान जी श्रीराम से सारा वृतांत जानकर उन्हें सुग्रीव से मिलाते हैं। सुग्रीव राम को अपने साथ हुए सारी व्यथा बताते हैं कि कैसे उनकी पत्नी को उसके भाई बाली ने हरण कर उनका सारा राज्य अपने पास रखा हुआ है। तब श्रीराम सुग्रीव से कहते है कि वह उनकी पत्नी को बाली से छुड़ाएंगे और उसका राज्य भी उसे वापस दिलाएंगे।
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उसके बाद सुग्रीव श्रीराम से वचन देते हैं कि वे सभी सीता माता को ढूंढने में उनकी सहायता करेंगे। मंचन में दिखाया कि बाली ने मृत्यु के दौरान पुत्र अंगद को श्रीराम की सेवा में रहने की आज्ञा दी। बाली ने श्रीराम व सुग्रीव से क्षमा मांगी और अंगद को अपने साथ पुत्र की तरह प्रेम करने का वचन लिया।
पिता के संस्कार के बाद राजकुमार अंगद पिता की आज्ञा अनुसार श्रीराम की सहायता में जुट जाते हैं। सुग्रीव को किशकिंदा का राजा बनाकर श्रीराम अंगद को राजकुमार बनाते हैं।