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संचालकों हड़ताल से जिले के सभी पेट्रोल पंप रहे सूने
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पेट्रोल न मिलने पर बाइक पैदल धकेल कर ले जाता व्यक्ति। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मांगों को लेकर जिले भर के पेट्रोल पंप संचालक हड़ताल पर रहे। इस दौरान जिले के किसी पंप पर पेट्रोल डीजल नहीं मिला। जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। पंप पर पेट्रोल भरवाने आए लोगों को खाली लौटना पड़ा। वहीं पंचायत भवन के पास स्थित सरकारी पंप पर तेल भरवाने के लिए लोगों एक एक घंटे तक का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान पंप से लेकर हाईवे तक वाहनों की कतारें लगी रहीं।
पेट्रोल पंप संचालकों की ओर से हड़ताल की 11 नवंबर को ही घोषणा कर दी गई थी। इस पर अधिकांश लोगों ने पहले ही वाहनों में तेल भरवा लिया था। वहीं दूसरी तरफ इस दौरान शहर की विभिन्न सड़कों पर कई लोग पैदल वाहनों को धक्का मारते हुए नजर आए। ऑल कंपनी डीलर एसोसिएशन के प्रधान जरनैल सिंह श्योराण ने बताया कि हर बार केंद्र सरकार पेट्रोलियम पदार्थों पर जो वैट या एक्साइज ड्यूटी घटाती थी। उससे जो नुकसान होता था वह पेट्रोलियम कंपनियां वहन करती थीं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल में 10 से 12 रुपये वैट व एक्साइज ड्यूटी घटाई। यह सारा नुकसान पेट्रोल पंप संचालकों पर डाल दिया गया है। सरकार के इस निर्णय से जिले के पंप संचालकों को करीब 30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं पंप संचालकों को मिलने वाला कमीशन भी 2017 के बाद से नहीं बढ़ा है। इस बारे में एसोसिएशन केंद्रीय मंत्रालय से भी मिल चुकी है। बावजूद इसके अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इन्हीं मुद्दों को लेकर सोमवार को सुबह छह बजे से मंगलवार सुबह छह बजे तक हड़ताल रही।
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चार लाख लीटर है रोज की खपत
जिले में कुल 176 पेट्रोल पंप हैं। इनमें से 175 निजी और एक सरकारी पंप है। सरकारी पंप को छोड़कर सभी संचालक हड़ताल पर रहे। इन पंपों से प्रतिदिन जिले में चार लाख लीटर पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति की जाती है। सरकारी पंप के इंचार्ज उमेश शर्मा ने बताया कि उनके पास कुल चार हजार लीटर पेट्रोल और तीन हजार लीटर डीजल की प्रतिदिन औसतन खपत है। अन्य सभी पंप बंद होने के कारण सुबह छह से रात दस बजे तक पंप पर लंबी लाइन लगी रही। रात दस बजे के बाद भी लोगों का आना लगा रहा।
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यमुनानगर। मांगों को लेकर जिले भर के पेट्रोल पंप संचालक हड़ताल पर रहे। इस दौरान जिले के किसी पंप पर पेट्रोल डीजल नहीं मिला। जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। पंप पर पेट्रोल भरवाने आए लोगों को खाली लौटना पड़ा। वहीं पंचायत भवन के पास स्थित सरकारी पंप पर तेल भरवाने के लिए लोगों एक एक घंटे तक का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान पंप से लेकर हाईवे तक वाहनों की कतारें लगी रहीं।
पेट्रोल पंप संचालकों की ओर से हड़ताल की 11 नवंबर को ही घोषणा कर दी गई थी। इस पर अधिकांश लोगों ने पहले ही वाहनों में तेल भरवा लिया था। वहीं दूसरी तरफ इस दौरान शहर की विभिन्न सड़कों पर कई लोग पैदल वाहनों को धक्का मारते हुए नजर आए। ऑल कंपनी डीलर एसोसिएशन के प्रधान जरनैल सिंह श्योराण ने बताया कि हर बार केंद्र सरकार पेट्रोलियम पदार्थों पर जो वैट या एक्साइज ड्यूटी घटाती थी। उससे जो नुकसान होता था वह पेट्रोलियम कंपनियां वहन करती थीं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
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केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल में 10 से 12 रुपये वैट व एक्साइज ड्यूटी घटाई। यह सारा नुकसान पेट्रोल पंप संचालकों पर डाल दिया गया है। सरकार के इस निर्णय से जिले के पंप संचालकों को करीब 30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं पंप संचालकों को मिलने वाला कमीशन भी 2017 के बाद से नहीं बढ़ा है। इस बारे में एसोसिएशन केंद्रीय मंत्रालय से भी मिल चुकी है। बावजूद इसके अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इन्हीं मुद्दों को लेकर सोमवार को सुबह छह बजे से मंगलवार सुबह छह बजे तक हड़ताल रही।
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चार लाख लीटर है रोज की खपत
जिले में कुल 176 पेट्रोल पंप हैं। इनमें से 175 निजी और एक सरकारी पंप है। सरकारी पंप को छोड़कर सभी संचालक हड़ताल पर रहे। इन पंपों से प्रतिदिन जिले में चार लाख लीटर पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति की जाती है। सरकारी पंप के इंचार्ज उमेश शर्मा ने बताया कि उनके पास कुल चार हजार लीटर पेट्रोल और तीन हजार लीटर डीजल की प्रतिदिन औसतन खपत है। अन्य सभी पंप बंद होने के कारण सुबह छह से रात दस बजे तक पंप पर लंबी लाइन लगी रही। रात दस बजे के बाद भी लोगों का आना लगा रहा।