फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   Air pollution at danger mark, not taking responsible steps

Yamuna Nagar News: खतरे के निशान पर वायु प्रदूषण, जिम्मेदार नहीं उठा रहे कदम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Nov 2023 12:39 AM IST
विज्ञापन
Air pollution at danger mark, not taking responsible steps
दिवाली का त्योहार आने वाला है, लेकिन उससे पहले ही वायु प्रदूषण का स्तर खतरे के निशान पर है। अभी जहां एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 150 से 200 के बीच आ रहा है, जिसका असर सेहत पर पड़ने लगा है। आंखों में जलन से लेकर लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है, पर जिम्मेदार विभागों के अफसर वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के कदम उठाते नहीं दिख रहे। गत वर्षोें में दिवाली से पहले व बाद में कुछ राहत के लिए दमकल विभाग से सड़कों व आसपास पेड़ों पर पानी का छिड़काव कराया जाता रहा है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा। निर्माणाधीन विकास कार्यों पर भी पानी का छिड़काव न होने से आसपास धूल के गुबार बन रहे हैं। इन हालात में अगले कुछ दिन पटाखों व आतिशबाजी जलाए जाने से दिवाली पर वायु प्रदूषण दोगुना होने की आशंका है, जिसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ेगा।
विज्ञापन

बता दें कि बढ़ते वायु प्रदूषण से ज्यादा दिक्कत सांस व आंखों के मरीजों को हो रही है। इसके अलावा सरकारी व निजी अस्पतालों में खांसी, जुकाम के मरीज की ओपीडी भी बढ़ी है। अकेले नागरिक अस्पताल में रोज 150 से 200 मरीज आ रहे हैं। इसके अलावा ऐसे हजारों मरीज अन्य अस्पतालों व क्लीनिकों के हैं। चिकित्सकों की मानें तो वायु में पीएम 2.5 व पीएम 10 के कण सांस से शरीर में चले जाते हैं, जो लंग्स को प्रभावित करते हैं। ऐसे में खासकर सांस के मरीज को मास्क का प्रयोग करना चाहिए। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विपुल गोयल ने कहा कि आंखों में जलन के मरीज आ रहे हैं। इसकी वजह वायु प्रदूषण हो सकती है। इससे आंखों के बचाव में घर से निकलते समय चश्मा पहनना चाहिए। साथ ही साफ पानी से आंखों को धोना चाहिए।
विज्ञापन


पर्यावरणविद डॉ. अजय कुमार ने कहा कि निर्माणाधीन कार्यों सहित जहां वाहनों की आवाजाही अधिक है, वहां सड़कों व पेड़ों पर छिड़काव किया जा सकता है। इससे वायु में धूल व मिट्टी के छोटे छोटे कण वायु में नहीं मिलेंगे। इससे वायु प्रदूषण में कुछ हद तक राहत पाई जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


वायु की शुद्धता को वायु गुणवत्ता सूचकांक यानि एयर क्वालिटी इंडेक्स के जरिए मापा जाता है। यह मात्रा 0 से 50 के बीच है, तो उसे अच्छा माना जाता है। 51 से 100 के बीच है, तो संतोषजनक, 101 से 200 के बीच को मध्यम, 201 से 300 के बीच को खराब, 301 से 400 के बीच बेहद खराब तथा 401 से 500 के बीच की स्थिति गंभीर श्रेणी में मानी जाती है।


अगर कहीं निर्माणाधीन कार्यों पर धूल के गुबार हो रहे हैं तो वहां संबंधित अफसरों को निर्देश देकर संबंधित एजेंसी या ठेकेदार से पानी का छिड़काव कराया जाएगा। इसके अलावा अन्य जगह भी जरूरत है तो ऐसा किया जाएगा।
- आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed