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किशोरी का अपहरण के बाद सामूहिक दुष्कर्म
यमुनानगर
Updated Fri, 09 May 2014 11:48 PM IST
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यमुनानगर। घर में अकेली नाबालिग का गांव के ही दो लड़कों ने अपहरण कर लिया और फिर उसी के ताऊ के खाली पड़े मकान में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया।
पीड़िता ने जब इसकी शिकायत पुलिस में देनी चाही तो मामला रफा-दफा करने के लिए गांव में पंचायतों का दौर शुरू हुआ और पीड़िता के परिवार को पुलिस में शिकायत न देने के लिए की कोशिश की गई। लेकिन परिजन नहीं माने और इसकी शिकायत छप्पर पुलिस को दी। पुलिस ने नाबालिग का मेडिकल करवाया और आरोपियों को नामजद कर मामला दर्ज कर लिया।
थाना छप्पर पुलिस को दी शिकायत में क्षेत्र के एक गांव निवासी ने बताया कि रविवार देर शाम उन्हें किसी काम से सपरिवार बाहर जाना पड़ा। इस दौरान उसका 20 वर्षीय पोता और 15 वर्षीय पोती घर पर थी। पीड़िता ने बताया कि रविवार रात खाना खाने के बाद उसका बड़ा भाई गांव में ही टहलने की बात कह कर चला गया। इस दौरान वह घर पर अकेली थी और सो गई।
इस बीच गांव के जसबीर और राजकुमार घर में घुस आए और उसे जबरन उठा कर बाहर ले आए। दोनों उसे पास में ही ताऊ के खाली घर में ले गए और उससे बारी-बारी दुष्कर्म किया। उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर पास में ही रहने वाले उसके रिश्तेदार जाग गए और आवाज लगाते हुए वहां पर पहुंचे। उन्हें आता देख दोनों मौके से फरार हो गए। परिजनों के लौटने पर उसने परिजनों को आपबीती बताई। पुलिस ने पीड़िता के दादा की शिकायत पर आरोपियों को नामजद कर लिया है।
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मामला रफा-दफा करने के लिए हुई पंचायतें
किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म की खबर जैसे ही लोगों को लगी। तो गांव में पंचायतों का दौर शुरू हो गया। अगली सुबह से ही पंचायत में पीड़िता पर मामला रफा-दफा करने के लिए दबाव बनना शुरू किया, लेकिन परिजनों ने पंचायती फरमान नहीं माना। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि मामले को देकर गांव में कई बार पंचायतें हुई और उसे पुलिस में शिकायत न देने के लिए कहा गया।
उसने आरोप लगाया कि पंचायत ने उसे मामला यहीं रफा-दफा करने की बता कहीं और दोबारा ऐसा न होने के बारे में आश्वासन दिया। पीड़ित के दादा ने पुलिस को बताया कि पंचायत ने उन्हें लड़की की बदनामी का डर दिखा और अन्य तरीकों से भी मनाने का प्रयास किया। पंचायत ने पीड़ितों को तीन दिन तक इसी में उलझाएं रखा।
कानून में नहीं है ऐसा प्रावधान
जघन्य अपराधों में पंचायती फैसले और पंचायत करना सरासर गलत और कानून के विपरीत है। ऐसे मामले में पंचायत सदस्यों और सरपंच के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है कि वह पुलिस को सूचित करें और जहां तक संभव हो पुलिस की सहायता करें ताकी दोषी को उसके अपराध की सजा मिल सके। ऐसे मामलों में पंचायत करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
- संजय धीमान, क्रिमिनल लॉयर, जिला न्यायालय
गिरफ्तारी के लिए दी जा रही है दबिश
मामले की जांचकर्ता एएसआई मेनका ने बताया कि पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए हर संभावित जगहों पर दबिश दे रही है। पुलिस ने दोनों के फोन नंबरों की लोकेशन की जांच कर रही है। जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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पीड़िता ने जब इसकी शिकायत पुलिस में देनी चाही तो मामला रफा-दफा करने के लिए गांव में पंचायतों का दौर शुरू हुआ और पीड़िता के परिवार को पुलिस में शिकायत न देने के लिए की कोशिश की गई। लेकिन परिजन नहीं माने और इसकी शिकायत छप्पर पुलिस को दी। पुलिस ने नाबालिग का मेडिकल करवाया और आरोपियों को नामजद कर मामला दर्ज कर लिया।
थाना छप्पर पुलिस को दी शिकायत में क्षेत्र के एक गांव निवासी ने बताया कि रविवार देर शाम उन्हें किसी काम से सपरिवार बाहर जाना पड़ा। इस दौरान उसका 20 वर्षीय पोता और 15 वर्षीय पोती घर पर थी। पीड़िता ने बताया कि रविवार रात खाना खाने के बाद उसका बड़ा भाई गांव में ही टहलने की बात कह कर चला गया। इस दौरान वह घर पर अकेली थी और सो गई।
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इस बीच गांव के जसबीर और राजकुमार घर में घुस आए और उसे जबरन उठा कर बाहर ले आए। दोनों उसे पास में ही ताऊ के खाली घर में ले गए और उससे बारी-बारी दुष्कर्म किया। उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर पास में ही रहने वाले उसके रिश्तेदार जाग गए और आवाज लगाते हुए वहां पर पहुंचे। उन्हें आता देख दोनों मौके से फरार हो गए। परिजनों के लौटने पर उसने परिजनों को आपबीती बताई। पुलिस ने पीड़िता के दादा की शिकायत पर आरोपियों को नामजद कर लिया है।
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मामला रफा-दफा करने के लिए हुई पंचायतें
किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म की खबर जैसे ही लोगों को लगी। तो गांव में पंचायतों का दौर शुरू हो गया। अगली सुबह से ही पंचायत में पीड़िता पर मामला रफा-दफा करने के लिए दबाव बनना शुरू किया, लेकिन परिजनों ने पंचायती फरमान नहीं माना। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि मामले को देकर गांव में कई बार पंचायतें हुई और उसे पुलिस में शिकायत न देने के लिए कहा गया।
उसने आरोप लगाया कि पंचायत ने उसे मामला यहीं रफा-दफा करने की बता कहीं और दोबारा ऐसा न होने के बारे में आश्वासन दिया। पीड़ित के दादा ने पुलिस को बताया कि पंचायत ने उन्हें लड़की की बदनामी का डर दिखा और अन्य तरीकों से भी मनाने का प्रयास किया। पंचायत ने पीड़ितों को तीन दिन तक इसी में उलझाएं रखा।
कानून में नहीं है ऐसा प्रावधान
जघन्य अपराधों में पंचायती फैसले और पंचायत करना सरासर गलत और कानून के विपरीत है। ऐसे मामले में पंचायत सदस्यों और सरपंच के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है कि वह पुलिस को सूचित करें और जहां तक संभव हो पुलिस की सहायता करें ताकी दोषी को उसके अपराध की सजा मिल सके। ऐसे मामलों में पंचायत करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
- संजय धीमान, क्रिमिनल लॉयर, जिला न्यायालय
गिरफ्तारी के लिए दी जा रही है दबिश
मामले की जांचकर्ता एएसआई मेनका ने बताया कि पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए हर संभावित जगहों पर दबिश दे रही है। पुलिस ने दोनों के फोन नंबरों की लोकेशन की जांच कर रही है। जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।