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आखिर कब होगा हमारा दाखिला...
kaithal
Updated Thu, 28 Apr 2016 12:49 AM IST
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निजी स्कूलों में दाखिले की आस लिए बच्चों व अभिभावकों के सब्र का बांध टूटता जा रहा है। बुधवार को अभिभावकों व बच्चों ने 134 ए के मुददे के जनआंदोलन के प्रभारी रामदिया चावरिया की अगुवाई में कड़ी धूप में पिहोवा चौक पर जाम लगाकर सरकार से पूछा कि आखिर उन्हें दाखिला कब मिलेगा। एसडीएम के आश्वासन पर जाम खोलने के बाद प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय तक प्रदर्शन किया।
बाद में एडीसी को ज्ञापन दिया। जहां से एक बार फिर से उन्हें केवल आश्वासन मिला।
सुबह अभिभावक रामदिया चावरिया के नेतृत्व में पिहोवा चौक पर पहुंचे। जहां चौक को दोनों ओर से जाम लगाकर बंद कर दिया। जिस कारण चारों ओर आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। करीब डेढ़ घंटे तक नन्हें बच्चे, उनके अभिभावक चौक के चारों ओर बैठकर प्रदर्शन करते रहे। विभाग व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कड़ी धूप में नन्हें बच्चे चौक के दोनों ओर सड़क पर बैठे रहे।
बच्चे अपने दाखिले की मांग कर रहे थे। जाम की सूचना मिलने पर करीब डेेढ़ घंटे बाद एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक मौके पर पहुंचे। लोगों ने एसडीएम को अपनी पीड़ा सुनाई। इसके बाद रामदिया चावरिया के नेतृत्व में लोग प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। जहां एडीसी को ज्ञापन दिया। एडीसी को ज्ञापन देते हुए रामदिया चावरिया ने कहा कि इन गरीब बच्चों के हकों से उन्हें क्यों वंचित किया जा रहा है। बार-बार की जा रही मांग के बावजूद बच्चों को उनका हक नहीं दिया जा रहा। जो निंदनीय है। हर साल सरकार नए-नए नियम बनाकर बच्चों के साथ ज्यादती करती है। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र ही अभिभावकों की नहीं सुनी गई तो वे सचिवालय में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर देंगे। जिसकी जिम्मेवारी सरकार व प्रशासन की होगी।
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एडीसी ने उन्हें शीघ्र ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों से विचार-विमर्श कर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस अवसर पर जिला प्रभारी भाई रामदिया चावरिया, बीना रानी, सुनीता, सोनिया, सुशीला, गुलशन, संतोष, शीला पठेल नगर, कमलेश अमरगढ़ गामडी, राजपाल, जसविंद्र, सुरेश कुमार, अशोक प्यौदा रोड़, घनश्याम, सुनील, सत्यवान, बाला देवी, ममता, प्रेम, सुभाष, सुनील व पूनम सहित भारी संख्या में अभिभावक मौजूद थे।
कहां अटका है मामला:-
134ए के तहत बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिले के लिए करीब 4000 से अधिक बच्चों ने आवेदन किया हुआ है। सरकार द्वारा दो बार ड्रा की तिथि आगे सरकाई जा चुकी है। अब मेधावी बच्चों को छांटने की बातें हो रही हैं। जबकि शिक्षा सत्र का एक माह बीतने को है। जिस कारण ये बच्चे एवं अभिभावक इस बात से परेशान हैं कि कहीं बाद में उनका दाखिला ही ना हो। अभी तक उन्हें करीब महीने भर की पढ़ाई का नुकसान हो चुका है।
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बाद में एडीसी को ज्ञापन दिया। जहां से एक बार फिर से उन्हें केवल आश्वासन मिला।
सुबह अभिभावक रामदिया चावरिया के नेतृत्व में पिहोवा चौक पर पहुंचे। जहां चौक को दोनों ओर से जाम लगाकर बंद कर दिया। जिस कारण चारों ओर आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। करीब डेढ़ घंटे तक नन्हें बच्चे, उनके अभिभावक चौक के चारों ओर बैठकर प्रदर्शन करते रहे। विभाग व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कड़ी धूप में नन्हें बच्चे चौक के दोनों ओर सड़क पर बैठे रहे।
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बच्चे अपने दाखिले की मांग कर रहे थे। जाम की सूचना मिलने पर करीब डेेढ़ घंटे बाद एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक मौके पर पहुंचे। लोगों ने एसडीएम को अपनी पीड़ा सुनाई। इसके बाद रामदिया चावरिया के नेतृत्व में लोग प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। जहां एडीसी को ज्ञापन दिया। एडीसी को ज्ञापन देते हुए रामदिया चावरिया ने कहा कि इन गरीब बच्चों के हकों से उन्हें क्यों वंचित किया जा रहा है। बार-बार की जा रही मांग के बावजूद बच्चों को उनका हक नहीं दिया जा रहा। जो निंदनीय है। हर साल सरकार नए-नए नियम बनाकर बच्चों के साथ ज्यादती करती है। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र ही अभिभावकों की नहीं सुनी गई तो वे सचिवालय में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर देंगे। जिसकी जिम्मेवारी सरकार व प्रशासन की होगी।
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एडीसी ने उन्हें शीघ्र ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों से विचार-विमर्श कर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस अवसर पर जिला प्रभारी भाई रामदिया चावरिया, बीना रानी, सुनीता, सोनिया, सुशीला, गुलशन, संतोष, शीला पठेल नगर, कमलेश अमरगढ़ गामडी, राजपाल, जसविंद्र, सुरेश कुमार, अशोक प्यौदा रोड़, घनश्याम, सुनील, सत्यवान, बाला देवी, ममता, प्रेम, सुभाष, सुनील व पूनम सहित भारी संख्या में अभिभावक मौजूद थे।
कहां अटका है मामला:-
134ए के तहत बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिले के लिए करीब 4000 से अधिक बच्चों ने आवेदन किया हुआ है। सरकार द्वारा दो बार ड्रा की तिथि आगे सरकाई जा चुकी है। अब मेधावी बच्चों को छांटने की बातें हो रही हैं। जबकि शिक्षा सत्र का एक माह बीतने को है। जिस कारण ये बच्चे एवं अभिभावक इस बात से परेशान हैं कि कहीं बाद में उनका दाखिला ही ना हो। अभी तक उन्हें करीब महीने भर की पढ़ाई का नुकसान हो चुका है।