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नौकरी व सरकारी ग्रांट दिलाने के नाम पर ठगी करने की आरोपी प्रोडक्शन रिमांड पर, मास्टरमाइंड भी गिरफ्तार
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यमुनानगर। आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने नौकरी व सरकारी ग्रांट दिलाने के नाम पर ठगी करने की आरोपी लाहसाबाद निवासी रेणू कादियान को तीन दिन के प्रोडक्शन रिमांड पर लिया है। आरोपी महिला पर धोखाधड़ी के दो मामले और भी दर्ज हुए थे। अब उस पर थाना छप्पर के मामले में पूछताछ व रिकवरी करनी है।
इंचार्ज आर्थिक अपराध शाखा निरीक्षक सोमवती और जांच अधिकारी जनक राज ने बताया कि थाना छप्पर वाले मामले में उसके साथियों का भी पता करना है। नौकरी के फार्म, मोहर, ठगी के रुपये व अन्य कागजात बरामद करने हैं। यह एक बड़ा गिरोह है, इनके माध्यम से पूरे गिरोह के सदस्यों को पकड़ा है ताकि ये सब किसी और अपने जाल में न फंसा सके। गिरोह के मास्टरमाइंड गांव रामगढ का माजरा वासी सुलेंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। इंचार्ज सोमवती ने बताया कि आरोपी रेणू कादियान, गनौली निवासी अमन कुमार, कैंप निवासी वीरेंद्र गुप्ता व आशीष ने अनाज मंडी बिलासपुर में शिवसेना पार्टी का कार्यालय खोला हुआ था।
इन्होंने तलाकौर, कपालमोचन, रादौर रोड में भी शिवसेना के नाम से कार्यालय बनाए हुए थे। इन आरोपियों ने किसी को बुढ़ापा पेंशन दिलाने तो किसी को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की थी। गांव तलाकौर निवासी सलिंद्रो देवी ने बताया कि यह आरोपी खुद की ऊंची पहुंच बताते थे। जिसके नाम पर यह लोगों को ठगते थे। किसी के घर पर जाकर उनसे पेंशन व योजना का लाभ दिलाने के नाम पर फार्म भरवा लेते। इसके बदले में पैसे लेते थे। इन आरोपियो ने 25 से 30 लोगों के साथ ठगी की है। इन्होंने गांव तलाकौर निवासी राखी देवी, संगीता, अनीता, मनजीत, मनीषा, बलविद्र कौर, सुमन लता, बेबी रानी, अमनजीत, निशा देवी, मीनू देवी को आंगनबाड़ी में लगवाने के नाम पर अलग-अलग कर साढ़े पांच लाख रुपये ठगे। इसी तरह से शुभम कुमार, प्रिस कुमार व महेंद्र को बीपीएल की ग्रांट दिलाने के नाम पर दो लाख रुपये ठगे। खेड़ी निवासी सुखविद्र को रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर एक लाख 31 हजार रुपये लिए। वर्ष 2018 से 2019 तक यह थाना छप्पर क्षेत्र में सक्रिय रहे। यह गिरोह महिलाओं को ग्रांट दिलाने, पेंशन का लाभ दिलाने आदि का झांसा देकर फार्म भरवाता था। यहां से ठगी कर आरोपी फरार हो गए। बाद में पैसा वापस मांगा, तो आरोपियो ने देने से इंकार कर दिया और जातिसूचक शब्द भी कहे। वहीं इसी तरह से गांव दयालगढ़ निवासी अमित कुमार को रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर रेणु कादियान ने चार लाख रुपये थे। उसके भी पैसे वापस नहीं दिए और न ही उसकी नौकरी लगी।
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इंचार्ज आर्थिक अपराध शाखा निरीक्षक सोमवती और जांच अधिकारी जनक राज ने बताया कि थाना छप्पर वाले मामले में उसके साथियों का भी पता करना है। नौकरी के फार्म, मोहर, ठगी के रुपये व अन्य कागजात बरामद करने हैं। यह एक बड़ा गिरोह है, इनके माध्यम से पूरे गिरोह के सदस्यों को पकड़ा है ताकि ये सब किसी और अपने जाल में न फंसा सके। गिरोह के मास्टरमाइंड गांव रामगढ का माजरा वासी सुलेंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। इंचार्ज सोमवती ने बताया कि आरोपी रेणू कादियान, गनौली निवासी अमन कुमार, कैंप निवासी वीरेंद्र गुप्ता व आशीष ने अनाज मंडी बिलासपुर में शिवसेना पार्टी का कार्यालय खोला हुआ था।
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इन्होंने तलाकौर, कपालमोचन, रादौर रोड में भी शिवसेना के नाम से कार्यालय बनाए हुए थे। इन आरोपियों ने किसी को बुढ़ापा पेंशन दिलाने तो किसी को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की थी। गांव तलाकौर निवासी सलिंद्रो देवी ने बताया कि यह आरोपी खुद की ऊंची पहुंच बताते थे। जिसके नाम पर यह लोगों को ठगते थे। किसी के घर पर जाकर उनसे पेंशन व योजना का लाभ दिलाने के नाम पर फार्म भरवा लेते। इसके बदले में पैसे लेते थे। इन आरोपियो ने 25 से 30 लोगों के साथ ठगी की है। इन्होंने गांव तलाकौर निवासी राखी देवी, संगीता, अनीता, मनजीत, मनीषा, बलविद्र कौर, सुमन लता, बेबी रानी, अमनजीत, निशा देवी, मीनू देवी को आंगनबाड़ी में लगवाने के नाम पर अलग-अलग कर साढ़े पांच लाख रुपये ठगे। इसी तरह से शुभम कुमार, प्रिस कुमार व महेंद्र को बीपीएल की ग्रांट दिलाने के नाम पर दो लाख रुपये ठगे। खेड़ी निवासी सुखविद्र को रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर एक लाख 31 हजार रुपये लिए। वर्ष 2018 से 2019 तक यह थाना छप्पर क्षेत्र में सक्रिय रहे। यह गिरोह महिलाओं को ग्रांट दिलाने, पेंशन का लाभ दिलाने आदि का झांसा देकर फार्म भरवाता था। यहां से ठगी कर आरोपी फरार हो गए। बाद में पैसा वापस मांगा, तो आरोपियो ने देने से इंकार कर दिया और जातिसूचक शब्द भी कहे। वहीं इसी तरह से गांव दयालगढ़ निवासी अमित कुमार को रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर रेणु कादियान ने चार लाख रुपये थे। उसके भी पैसे वापस नहीं दिए और न ही उसकी नौकरी लगी।
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