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बारिश से मंडियों में 40 हजार मीट्रिक टन भीगा धान, किसान और आढ़ती परेशान
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tजगाधरी अनाजमंडी में बारिश के पानी में पड़ी धान की बोरियां।
- फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। जिले भर में मंगलवार को सुबह चार से दस बजे तक हुई बारिश ने खेतों से लेकर मंडियों व सड़कों पर मुसीबत बढ़ाईं। एक ओर खेतों में पानी भरने से धान, सब्जी व अन्य फसलें प्रभावित हुईं, वहीं मंडियों में खुले आसमान के नीचे में फड़ों व सड़कों पर पड़ा धान भीग गया। बारिश से जिले भर की अजान मंडियों में करीब 40 हजार एमटी धान भीग गया है।
धान को बारिश में भीगने से बचाने के लिए तिरपालें डाली गईं, पर जगह-जगह पर रखे धान को ढकने के लिए तिरपालें भी कम पड़ गईं। जिसके चलते खुले में पड़ा धान और धान से भरी हजारों बोरियां बारिश की चपेट में आ गई। बारिश से स्टेट हाईवे से लेकर मुख्य मार्गों पर दोपहर तक एक-डेढ़ फीट तक बारिश का पानी भरा रहा, जिसमें राहगीरों को निकालने में परेशानी हुई। ज्यादा दिक्कत क्षतिग्रस्त व गड्ढों में तब्दील सड़कों पर हुई, जहां शाम तक ट्रैफिक जाम के हालात बने रहे।
उठान होने से रह गया था 68729 एमटी धान
जिले की 13 अनाज मंडियों में दो लाख 86 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। इनमें बारिश से एक दिन पहले यानी दस अक्तूबर तक 217272 मीट्रिक टन धान का उठान संबंधित खरीद एजेंसियां कर चुकी थीं। इसके बाद सोमवार को मंडियों में खरीदे गए 68 हजार 729 मीट्रिक टन धान का उठान नहीं हो पाया था। इसके अलावा भी मंडियों में किसानों की बिना खरीद का धान था। इसमें काफी धान मंडियों में शेड से अलग खुले में फड़ और सड़कों पर पड़ा था। मंगलवार सुबह बारिश आने पर भीगने से बचाने को तिरपाल डाली गई, पर जगाधरी, रादौर व अन्य कई मंडियों में खुले में रखी धान को ढकने के लिए तिरपालें कम पड़ गईं। जिससे मंडियों में किसानों की लाया गया धान और एजेंसियों की खरीदी धान की हजारों बोरियां बारिश में भीग गईं। बारिश रुकने पर धान व उससे भरी बोरियां पूरी तरह भीग जाने पर लेबर ने उसका उठान कर मंडियों में ही सूखे स्थान पर रखा। कई भीगी बोरियों को ही लेबर ट्रक में लोड करती दिखी। बारिश में भीगी काफी धान खराब होने की आशंका है। जिससे किसानों व संबंधित खरीद एजेंसियों को नुकसान का अनुमान है।
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किसानों और आढ़तियों का बढ़ा काम, बेचने के लिए सुखाना होगा
डीएफएससी अशोक कुमार ने कहा कि मंडियों में बिना खरीद वाला धान ही बारिश में भीगा है। कितना धान भीगा इसका अनुमान नहीं है। जो धान भीगा है, उसे सुखा कर ही खरीद की जाएगी। ऐसे में मंडियों में जिन किसानों व आढ़तियों की धान भीगी है, उनका काम बढ़ गया है। जिन्हें खरीद एजेंसियों को बचने के लिए पहले भीगी धान को सुखाना होगा। जिसके लिए धूप निकलनी जरूरी है, पर मौसम विभाग की मानें तो अगले दो दिन मौसम ऐसा ही रहेगा। ऐसे में मंडियों में धान लेकर पहुंचे किसानों सहित आढ़तियों की चिंता बढ़ गई हैं।
कई माह बाद लगे मार्ग चौड़ा करने व पाइप लाइन का कार्य रुका
बारिश के चलते कई माह रुका शहर के बीच पंचायत भवन से कन्हैया साहिब चौक तक मार्ग चौड़ा करने का काम हफ्ते पहले लगा। इसके लिए पीडब्ल्यूडी बीएंडआर ने सड़क के बरम खोदे दिए थे, जहां मंगलवार की बारिश में पानी से भर गया। इसी तरह तीन साल से लटके स्टॉर्म ड्रेन का काम पूरा करने को नगर निगम ने कन्हैया साहिब चौक से महाराणा प्रताप चौक के बीच दबाई पाइप लाइन के मेन होल बनाने को गत दिनों गहरे गड्ढे किए थे, उसमें भी बारिश का पानी भर गया। उक्त दोनों काम बारिश ने दिए हैं जबकि मार्ग पर खुदाई होने से संकरे बचे मार्ग पर शहर के बीच त्योहारी सीजन की भीड़ के चलते ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है।
रादौर में हुई सबसे अधिक 78 एमएम बारिश
रादौर 78
साढौरा 30
सरस्वतीनगर 15
जगाधरी 07
छछरौली 07
प्रतापनगर 04
बिलासपुर 03
- नोट: बारिश का यह आंकड़ा मंगलवार सुबह 8 बजे तक का है।
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धान को बारिश में भीगने से बचाने के लिए तिरपालें डाली गईं, पर जगह-जगह पर रखे धान को ढकने के लिए तिरपालें भी कम पड़ गईं। जिसके चलते खुले में पड़ा धान और धान से भरी हजारों बोरियां बारिश की चपेट में आ गई। बारिश से स्टेट हाईवे से लेकर मुख्य मार्गों पर दोपहर तक एक-डेढ़ फीट तक बारिश का पानी भरा रहा, जिसमें राहगीरों को निकालने में परेशानी हुई। ज्यादा दिक्कत क्षतिग्रस्त व गड्ढों में तब्दील सड़कों पर हुई, जहां शाम तक ट्रैफिक जाम के हालात बने रहे।
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उठान होने से रह गया था 68729 एमटी धान
जिले की 13 अनाज मंडियों में दो लाख 86 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। इनमें बारिश से एक दिन पहले यानी दस अक्तूबर तक 217272 मीट्रिक टन धान का उठान संबंधित खरीद एजेंसियां कर चुकी थीं। इसके बाद सोमवार को मंडियों में खरीदे गए 68 हजार 729 मीट्रिक टन धान का उठान नहीं हो पाया था। इसके अलावा भी मंडियों में किसानों की बिना खरीद का धान था। इसमें काफी धान मंडियों में शेड से अलग खुले में फड़ और सड़कों पर पड़ा था। मंगलवार सुबह बारिश आने पर भीगने से बचाने को तिरपाल डाली गई, पर जगाधरी, रादौर व अन्य कई मंडियों में खुले में रखी धान को ढकने के लिए तिरपालें कम पड़ गईं। जिससे मंडियों में किसानों की लाया गया धान और एजेंसियों की खरीदी धान की हजारों बोरियां बारिश में भीग गईं। बारिश रुकने पर धान व उससे भरी बोरियां पूरी तरह भीग जाने पर लेबर ने उसका उठान कर मंडियों में ही सूखे स्थान पर रखा। कई भीगी बोरियों को ही लेबर ट्रक में लोड करती दिखी। बारिश में भीगी काफी धान खराब होने की आशंका है। जिससे किसानों व संबंधित खरीद एजेंसियों को नुकसान का अनुमान है।
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किसानों और आढ़तियों का बढ़ा काम, बेचने के लिए सुखाना होगा
डीएफएससी अशोक कुमार ने कहा कि मंडियों में बिना खरीद वाला धान ही बारिश में भीगा है। कितना धान भीगा इसका अनुमान नहीं है। जो धान भीगा है, उसे सुखा कर ही खरीद की जाएगी। ऐसे में मंडियों में जिन किसानों व आढ़तियों की धान भीगी है, उनका काम बढ़ गया है। जिन्हें खरीद एजेंसियों को बचने के लिए पहले भीगी धान को सुखाना होगा। जिसके लिए धूप निकलनी जरूरी है, पर मौसम विभाग की मानें तो अगले दो दिन मौसम ऐसा ही रहेगा। ऐसे में मंडियों में धान लेकर पहुंचे किसानों सहित आढ़तियों की चिंता बढ़ गई हैं।
कई माह बाद लगे मार्ग चौड़ा करने व पाइप लाइन का कार्य रुका
बारिश के चलते कई माह रुका शहर के बीच पंचायत भवन से कन्हैया साहिब चौक तक मार्ग चौड़ा करने का काम हफ्ते पहले लगा। इसके लिए पीडब्ल्यूडी बीएंडआर ने सड़क के बरम खोदे दिए थे, जहां मंगलवार की बारिश में पानी से भर गया। इसी तरह तीन साल से लटके स्टॉर्म ड्रेन का काम पूरा करने को नगर निगम ने कन्हैया साहिब चौक से महाराणा प्रताप चौक के बीच दबाई पाइप लाइन के मेन होल बनाने को गत दिनों गहरे गड्ढे किए थे, उसमें भी बारिश का पानी भर गया। उक्त दोनों काम बारिश ने दिए हैं जबकि मार्ग पर खुदाई होने से संकरे बचे मार्ग पर शहर के बीच त्योहारी सीजन की भीड़ के चलते ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है।
रादौर में हुई सबसे अधिक 78 एमएम बारिश
रादौर 78
साढौरा 30
सरस्वतीनगर 15
जगाधरी 07
छछरौली 07
प्रतापनगर 04
बिलासपुर 03
- नोट: बारिश का यह आंकड़ा मंगलवार सुबह 8 बजे तक का है।