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Yamuna Nagar News: शिक्षित बनने के लिए जिले के 3038 प्रौढ़ ने दी उल्लास की परीक्षा
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जगाधरी। चेहरों पर वक्त की झुरियां और थुलथुली मांसपेशियां, शिथिल काया, बिना चश्मे के आंखों से कुछ दिखता नहीं है, लेकिन मन में पढ़ने का उत्साह है। कांपते हाथों में किताब और नाती-पोतों की अंगुली पकड़कर साक्षरता की ओर कदम बढ़ा रहे बुजुर्गों ने अपने जज्बे से साबित कर दिया कि पढ़ने की सिर्फ चाह होती है, कोई उम्र नहीं होती है। रविवार को शिक्षित बनने के लिए परीक्षा देकर जिले के बुजुर्गों ने यह संदेश दिया। यह परीक्षा शिक्षा विभाग की ओर से जिले के 250 केंद्रों पर सुबह नौ से शाम पांच बजे तक करवाई गई।
परीक्षा में भाग लेने के लिए जिलेभर से 7,000 अधेड़ व बुजुर्गों ने आवेदन किया था। रविवार को खराब मौसम के बावजूद 3038 लोगों ने परीक्षा दी। अब यह बुजुर्ग बैंक या किसी कार्यालय में जाएंगे तो किसी कर्मचारी से पूछना नहीं पड़ेगा कि अंगूठा कहां लगाना है। अब फार्म भर कर बुजुर्ग स्वयं ही हस्ताक्षर कर सकेंगे। अब वे फार्म इत्यादि भरने के लिए किसी के मोहताज नहीं रहेंगे। उम्र के अंतिम पड़ाव में नाती-पोतों को कहानियां सुनने वाले बुजुर्गों ने परीक्षा देकर अपनी कहानी लिखी है। परीक्षा उल्लास कार्यक्रम के जिला समन्वयक एवं गणित विशेषज्ञ संजय कांबोज के नेतृत्व में करवाई गई। परीक्षा के लिए सभी खंडों के 250 केंद्रों पर करवाई गई। परीक्षा सुबह नौ से शाम पांच तक हुई और इसमें आने के लिए आवेदकों को किसी प्रकार की समय की पाबंदी नहीं थी। अपनी सहुलियत के अनुसार बुजुर्गों ने केंद्र पहुंचकर परीक्षा दी। संजय कांबोज ने बताया कि यह कार्यक्रम प्रौढ़ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चलाया जा रहा है। इसका लाभ लोगों को मिल रहा है।
बॉक्स
इस केंद्र पर इतनों ने दी परीक्षा
परीक्षा के लिए जिले में कुल 250 केंद्र बनाए गए थे। इस दौरान सबसे ज्यादा केंद्र छछरौली खंड में बनाए गए। यहां पर कुल 60 केंद्र बनाए गए थे, जिसमें कुल 1100 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। वहीं, जगाधरी खंड के 50 केंद्रों पर 625 ने परीक्षा दी। व्यासपुर के 20 केंद्रों पर 297, साढौरा के 40 केंद्रों पर 416 ने परीक्षा दी। इसी तरह रादौर के 40 केंद्रों पर कुल 300 और सरस्वतीन के 40 केंद्रों पर भी 300 ने परीक्षा दी।
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परीक्षा में भाग लेने के लिए जिलेभर से 7,000 अधेड़ व बुजुर्गों ने आवेदन किया था। रविवार को खराब मौसम के बावजूद 3038 लोगों ने परीक्षा दी। अब यह बुजुर्ग बैंक या किसी कार्यालय में जाएंगे तो किसी कर्मचारी से पूछना नहीं पड़ेगा कि अंगूठा कहां लगाना है। अब फार्म भर कर बुजुर्ग स्वयं ही हस्ताक्षर कर सकेंगे। अब वे फार्म इत्यादि भरने के लिए किसी के मोहताज नहीं रहेंगे। उम्र के अंतिम पड़ाव में नाती-पोतों को कहानियां सुनने वाले बुजुर्गों ने परीक्षा देकर अपनी कहानी लिखी है। परीक्षा उल्लास कार्यक्रम के जिला समन्वयक एवं गणित विशेषज्ञ संजय कांबोज के नेतृत्व में करवाई गई। परीक्षा के लिए सभी खंडों के 250 केंद्रों पर करवाई गई। परीक्षा सुबह नौ से शाम पांच तक हुई और इसमें आने के लिए आवेदकों को किसी प्रकार की समय की पाबंदी नहीं थी। अपनी सहुलियत के अनुसार बुजुर्गों ने केंद्र पहुंचकर परीक्षा दी। संजय कांबोज ने बताया कि यह कार्यक्रम प्रौढ़ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चलाया जा रहा है। इसका लाभ लोगों को मिल रहा है।
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इस केंद्र पर इतनों ने दी परीक्षा
परीक्षा के लिए जिले में कुल 250 केंद्र बनाए गए थे। इस दौरान सबसे ज्यादा केंद्र छछरौली खंड में बनाए गए। यहां पर कुल 60 केंद्र बनाए गए थे, जिसमें कुल 1100 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। वहीं, जगाधरी खंड के 50 केंद्रों पर 625 ने परीक्षा दी। व्यासपुर के 20 केंद्रों पर 297, साढौरा के 40 केंद्रों पर 416 ने परीक्षा दी। इसी तरह रादौर के 40 केंद्रों पर कुल 300 और सरस्वतीन के 40 केंद्रों पर भी 300 ने परीक्षा दी।
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