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Yamuna Nagar News: जिले की सड़कों पर शाम छह से रात नौ बजे की बीच 29 फीसदी हादसे
Tue, 10 Feb 2026 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 10 Feb 2026 01:08 AM IST
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सड़क पर चलते समय मोबाइल पर बात करते बाइक सवार। संवाद
राजेश कुमार
यमुनानगर। जिले में सड़क हादसे लगातार बढ़ते जा रहे हैं इंटीग्रेटिड रोड एक्सीडेंट डाटा (आईरेड) एजेंसी के आंकड़े बताते हैं कि जिले में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं शाम छह से रात नौ बजे के बीच हो रही हैं। आईरेड के डाटा के अनुसार वर्ष 2025 में शाम छह से रात नौ बजे के बीच जिले में कुल 150 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 80 लोगों की मौत हो गई और 138 लोग घायल हुए।
विशेषज्ञों के अनुसार इस समय सड़कों पर वाहनों का दबाव सबसे अधिक रहता है। नौकरीपेशा लोग कार्यालयों से घर लौटते हैं, बाजारों में भीड़ रहती है और जल्दी घर पहुंचने की होड़ में यातायात नियमों की अनदेखी की जाती है। वर्ष 2025 के कुल आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में 511 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं।
इनमें 237 लोगों की जान गई, 491 लोग घायल हुए और 536 लोग ऐसे रहे जो दुर्घटना में चोट लगने से बच गए। वहीं वर्ष 2024 में जिले में 445 दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें 226 लोगों की मौत, 391 घायल और 479 लोग सुरक्षित बचे थे। इन आंकड़ों से साफ है कि सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान शाम के समय होने वाले हादसों का है।
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आईरेड के रिकार्ड में यह भी सामने आया है कि सुबह नौ से दोपहर 12 बजे तक का समय भी पीक आवर की श्रेणी में आता है। इस दौरान 66 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 23 लोगों की मौत और 71 लोग घायल हुए। हालांकि, शाम के मुकाबले इस समय हादसों की संख्या कम रही, लेकिन खतरा बरकरार है। पुलिस की एफआईआर में अधिकतर दुर्घटनाओं का कारण वाहन की ओवर स्पीड और चालक की लापरवाही बताया गया है। संवाद
सड़कों पर बढ़ जाता है ट्रैफिक : सुशील आर्य
राज्य सड़क सुरक्षा परिषद के सदस्य एडवोकेट सुशील आर्य का कहना है कि हादसों के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। शाम के समय बाजारों में भीड़ और सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है। कोई वाहन चालक गलत दिशा से वाहन लेकर निकलता है तो कोई ओवर स्पीड में चलता है। कई बार शराब के नशे में वाहन चलाने के मामले भी सामने आते हैं। वहीं रात के समय नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर वाहनों की गति और अधिक बढ़ जाती है, जिससे दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सड़कों में खामियां भी हादसों की बड़ी वजह बनती है। यदि सड़कों की खामियों को दूर किया जाए, ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, तो हादसों में कमी लाई जा सकती है।
सड़क दुर्घटनों के आंकड़ों को हर माह होने वाली सड़क सुरक्षा की बैठक में उच्चाधिकारियों के सामने रखा जाता है। जिसमें हादसों को कम करने के लिए चर्चा होती है। सड़कों की खामियां दूर करने के लिए कहा जाता है। ट्रैफिक पुलिस यातायात नियमों के प्रति जागरूक कर रही है। - कुशलपाल राणा, एसएचओ, ट्रैफिक थाना।
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यमुनानगर। जिले में सड़क हादसे लगातार बढ़ते जा रहे हैं इंटीग्रेटिड रोड एक्सीडेंट डाटा (आईरेड) एजेंसी के आंकड़े बताते हैं कि जिले में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं शाम छह से रात नौ बजे के बीच हो रही हैं। आईरेड के डाटा के अनुसार वर्ष 2025 में शाम छह से रात नौ बजे के बीच जिले में कुल 150 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 80 लोगों की मौत हो गई और 138 लोग घायल हुए।
विशेषज्ञों के अनुसार इस समय सड़कों पर वाहनों का दबाव सबसे अधिक रहता है। नौकरीपेशा लोग कार्यालयों से घर लौटते हैं, बाजारों में भीड़ रहती है और जल्दी घर पहुंचने की होड़ में यातायात नियमों की अनदेखी की जाती है। वर्ष 2025 के कुल आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में 511 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं।
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इनमें 237 लोगों की जान गई, 491 लोग घायल हुए और 536 लोग ऐसे रहे जो दुर्घटना में चोट लगने से बच गए। वहीं वर्ष 2024 में जिले में 445 दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें 226 लोगों की मौत, 391 घायल और 479 लोग सुरक्षित बचे थे। इन आंकड़ों से साफ है कि सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान शाम के समय होने वाले हादसों का है।
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आईरेड के रिकार्ड में यह भी सामने आया है कि सुबह नौ से दोपहर 12 बजे तक का समय भी पीक आवर की श्रेणी में आता है। इस दौरान 66 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 23 लोगों की मौत और 71 लोग घायल हुए। हालांकि, शाम के मुकाबले इस समय हादसों की संख्या कम रही, लेकिन खतरा बरकरार है। पुलिस की एफआईआर में अधिकतर दुर्घटनाओं का कारण वाहन की ओवर स्पीड और चालक की लापरवाही बताया गया है। संवाद
सड़कों पर बढ़ जाता है ट्रैफिक : सुशील आर्य
राज्य सड़क सुरक्षा परिषद के सदस्य एडवोकेट सुशील आर्य का कहना है कि हादसों के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। शाम के समय बाजारों में भीड़ और सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है। कोई वाहन चालक गलत दिशा से वाहन लेकर निकलता है तो कोई ओवर स्पीड में चलता है। कई बार शराब के नशे में वाहन चलाने के मामले भी सामने आते हैं। वहीं रात के समय नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर वाहनों की गति और अधिक बढ़ जाती है, जिससे दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सड़कों में खामियां भी हादसों की बड़ी वजह बनती है। यदि सड़कों की खामियों को दूर किया जाए, ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, तो हादसों में कमी लाई जा सकती है।
सड़क दुर्घटनों के आंकड़ों को हर माह होने वाली सड़क सुरक्षा की बैठक में उच्चाधिकारियों के सामने रखा जाता है। जिसमें हादसों को कम करने के लिए चर्चा होती है। सड़कों की खामियां दूर करने के लिए कहा जाता है। ट्रैफिक पुलिस यातायात नियमों के प्रति जागरूक कर रही है। - कुशलपाल राणा, एसएचओ, ट्रैफिक थाना।

सड़क पर चलते समय मोबाइल पर बात करते बाइक सवार। संवाद