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Yamuna Nagar News: बारिश व बाढ़ से 24 हजार हेक्टेयर फसल खराब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 18 Jul 2023 12:19 AM IST
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24 thousand hectare crop damaged due to rain and flood
पिछले दिनों पांच दिनों तक लगातार हुई बारिश से खराब हुई फसलों की रिपोर्ट कृषि एवं कल्याण विभाग ने तैयार करके सरकार को भेज दी है। कृषि विभाग के मुताबिक जिले में बारिश व बाढ़ से कुल 24,030 हेक्टेयर जमीन खराब हुई है। इसमें से 2,625 हेक्टेयर रकबा ही ऐसा है जिसमें 76 से 100 प्रतिशत नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा 19,578 हेक्टेयर धान की फसल खराब हुई है। इसमें से 1858 हेक्टेयर जमीन ही ऐसी है जिसमें धान का 76 से 100 प्रतिशत नुकसान हुआ है। जबकि 51 से 75 प्रतिशत में 5,105 हेक्टेयर, 26 से 50 प्रतिशत में 6,233 हेक्टेयर व 0 से 25 प्रतिशत में 6,380 हेक्टेयर धान की फसल है।
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विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 1,676 हेक्टेयर में खड़ा पशु चारा खराब हुआ है। इसमें से 490 हेक्टेयर में 76 से 100 प्रतिशत नुकसान हुआ है। जबकि 77 हेक्टेयर में खड़ी मक्की की फसल खराब हुई है। इसी तरह 2,585 हेक्टेयर में खड़ी गन्ने की फसल बारिश से खराब हुई है। 156 हेक्टेयर गन्ने की फसल ऐसी है जिसे 76 से 100 प्रतिशत नुकसान हुआ है। 138 हेक्टेयर में 51 से 75 प्रतिशत नुकसान है।
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वहीं बारिश को खत्म हुए पांच दिन बीतने के बाद भी खेतों में बारिश का पानी जमा है। इस वक्त सबसे ज्यादा पानी सरस्वती नगर व साढौरा क्षेत्र में खेतों में जमा है। दरअसल पहाड़ों, रणजीतपुर, बिलासपुर की तरफ से बारिश व बाढ़ का जो पानी आता है वह सरस्वतीनगर से होते हुए रादौर क्षेत्र से होकर आगे बहता है। इसलिए इन क्षेत्रों में बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान होता है। वहीं यमुना के साथ लगते खेतों में फसलों को तो नुकसान है ही साथ में जमीन का भी कटाव हुआ है। फसलाें के साथ जमीन भी यमुना में समा गई। किसानों की मांग है कि उन्हें 60 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाए। उन्होंने बताया कि जिन खेतों में धान लग चुकी थी उनमें खेत तैयार करने से लेकर पानी देने, पनीरी व मजदूरों की लेबर समेत 20 से 25 हजार रुपये खर्च आ चुका था। कृषि विभाग के एसडीओ राकेश पोरिया ने बताया कि विभाग ने खराब फसलों की रिपोर्ट तैयार कर ली है। 24 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसलों को नुकसान पहुंचा है। इसमें धान, गन्ना, मक्का, दलहन समेत अन्य फसलें शामिल हैं। किसान भी अपने नुकसान की सूचना कार्यालय में दे सकते हैं। उसकी जांच करवा कर सरकार को भेज देंगे।
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भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री रामबीर चौहान का कहना है कि कृषि विभाग ने खराब फसलों की जो रिपोर्ट तैयार की है वह पूरी तरह से गलत है। किसानों की जमीन का जो कटाव हुआ है वह भी इसमें शामिल करना चाहिए। सर्वे कब हुआ, किसने किया इसके बारे में किसान को ही पता नहीं है। सर्वे के लिए कृषि विभाग, राजस्व विभाग और किसान को मौके पर मौजूद होने चाहिए। इसलिए यह आंकड़ा अभी और बढ़ेगा।


भारतीय किसान यूनियन के निदेशक मनदीप सिंह रोड़ छप्पर का कहना है कि गांव में न पटवारी आया और न ही तहसीलदार। किसान से भी पूछा नहीं गया कि उसे कितना नुकसान हुआ है। वहीं खेतों में अभी तक पानी जमा है। फसलें तो दिख ही नहीं रही। फिर विभाग ने कैसे रिपोर्ट तैयार कर ली कि कितना नुकसान हुआ है। यह सर्वे किसान के सामने होना चाहिए।
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