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पंजाब-हावड़ा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर
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इर्स्टन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से ट्विनसिटी की स्टील और प्लाइवुड इंडस्ट्री को लगेंगे पंख
-सालाना कई लाख करोड़ रुपये के टर्न ओवर की प्लाइवुड और स्टील इंडस्ट्री को होगा फायदा
-यमुनानगर के कलानौर स्टेशन के पास ट्रांसपोर्ट हब होगा विकसित, देश के तमाम हिस्सों में कम लागत और कम समय में पहुंचेगा सामान।
-इंपोर्ट-एक्सपोर्ट के व्यवसायियों को भी महंगे ट्रांसपोर्टेशन से मिलेगी मुक्ति, उपभोक्ताओं पहुंचेगा फायदा।
यमुनानगर। यमुनानगर-जगाधरी से होकर गुजरने वाले पंजाब-हावड़ा डेडिकेटेड फ्रेट रेल कॉरिडोर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस फ्रेट कॉरिडोर के शुरू होने से शहर की स्टील और प्लाइवुड इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा। देश के अलग-अलग हिस्सों में माल पहुंचाना आसान हो जाएगा। यमुनानगर-जगाधरी में कलानौर स्टेशन के पास लॉजिस्टिक हब बनेगा। जहां से एशिया की सबसे बड़ी प्लाइवुड और स्टील इंडस्ट्री के माल की बुकिंग होगी। इससे न केवल ट्रांसपोर्टेशन लागत घटेगी, बल्कि माल को हाईस्पीड से गंतव्य तक पहुंचाया जा सकेगा। प्रोजेक्ट के जुड़े रेलवे अधिकारियों के मुुताबिक इस साल के अंत तक दूसरे चरण का काम पूरा हो जाएगा। इस चरण में लुधियाना से खुर्जा तक का एरिया है।
बॉक्स
क्या है फ्रेट कॉरिडोर
करीब 10 साल पहले रेलवे ने अपना फ्रेट रेवेन्यू बढ़ाने और पटरियों पर ट्रैफिक कम करने के लिए केवल मालगाडियों के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का गठन किया था। इर्स्टन कॉरिडोर पंजाब हावड़ा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर मालगाड़ियों की अधिकतम रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जो कि अभी 75 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह दूसरा चरण है, जो 2019 में पूरा हो जाएगा, जबकि पूरा प्रोजेक्ट 2020 तक पूरा हो जाएगा। इस कॉरिडोर को पूरी तरह से दुर्घटना मुक्त जोन बनाया जा रहा है।
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टिवनसिटी की इंडस्ट्री को मिलेगा फायदा
डिवीजनल रेलवे यूजर्स कंसलटेटिव कमेटी अंबाला डिजीवन के सदस्यस राजकुमार चावला के मुताबिक देश की इकोनॉमिक ग्रोथ में लॉजिस्टिक सेक्टर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देश में अभी लॉजिस्टिक सेक्टर और सप्लाई चेन मैनेजमेंट परिपक्व नहीं है, जिससे देश की प्रमुख इंडस्ट्री जैसे ऑटोमोबाइल, फार्मा, कंज्यूमर ड्यूरेबल, एफएमसीजी, ई-कॉमर्स आदि की ग्रोथ पर असर पड़ रहा है। लगभग 60 फीसदी माल ढुलाई सड़क से की जाती है, जो महंगी भी होती है और माल पहुंचने में देरी भी होती है, लेकिन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनने के बाद इसमें खासा सुधार होगा। कॉरिडोर शुरू होने के बाद पैसेंजर रूट पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और पैसेंजर ट्रेनों की भी स्पीड बढ़ेगी।
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प्लाइवुड से संबंधित फेस विनियर के इंपोर्टर सुमित गुप्ता का कहना है कि अभी कांडला पोर्ट से एक्सपोर्ट इंपोर्ट का सामान ट्रकों द्वारा लाया ले जाया जाता है। रेलवे की सुविधा होने के बाद ट्रांसपोर्ट सस्ता और समय कम लगेगा।
यमुनानगर और जगाधरी को इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा मिलने वाला है। उन्होंने बताया कि लॉजिस्टिक
लागत में कमी होने का फायदा इंडस्ट्री के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी मिलेगा।
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इन राज्यों से गुजरेगा
पंजाब 88 किमी
हरियाणा 72 किमी
उत्तर प्रदेश 1058 किमी
बिहार 239 किमी
झारखंड 196 किमी
पश्चिम बंगाल 203 किमी
यह मिलेगा लाभ बॉक्स
इन सेक्टर्स को मिलेगा फायदा
पावर हाउस कोयला 61.96 टन प्रतिवर्ष
कोयला 0.95 टन प्रतिवर्ष
स्टील 9.74 टन प्रतिवर्ष
फर्टिलाइजर 0.42 टन प्रतिवर्ष
सीमेंट 1.52 टन प्रतिवर्ष
नमक 1.03 टन प्रतिवर्ष
अन्य सामान 5.92 प्रतिवर्ष
फोटो 13, 14
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-सालाना कई लाख करोड़ रुपये के टर्न ओवर की प्लाइवुड और स्टील इंडस्ट्री को होगा फायदा
-यमुनानगर के कलानौर स्टेशन के पास ट्रांसपोर्ट हब होगा विकसित, देश के तमाम हिस्सों में कम लागत और कम समय में पहुंचेगा सामान।
-इंपोर्ट-एक्सपोर्ट के व्यवसायियों को भी महंगे ट्रांसपोर्टेशन से मिलेगी मुक्ति, उपभोक्ताओं पहुंचेगा फायदा।
यमुनानगर। यमुनानगर-जगाधरी से होकर गुजरने वाले पंजाब-हावड़ा डेडिकेटेड फ्रेट रेल कॉरिडोर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस फ्रेट कॉरिडोर के शुरू होने से शहर की स्टील और प्लाइवुड इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा। देश के अलग-अलग हिस्सों में माल पहुंचाना आसान हो जाएगा। यमुनानगर-जगाधरी में कलानौर स्टेशन के पास लॉजिस्टिक हब बनेगा। जहां से एशिया की सबसे बड़ी प्लाइवुड और स्टील इंडस्ट्री के माल की बुकिंग होगी। इससे न केवल ट्रांसपोर्टेशन लागत घटेगी, बल्कि माल को हाईस्पीड से गंतव्य तक पहुंचाया जा सकेगा। प्रोजेक्ट के जुड़े रेलवे अधिकारियों के मुुताबिक इस साल के अंत तक दूसरे चरण का काम पूरा हो जाएगा। इस चरण में लुधियाना से खुर्जा तक का एरिया है।
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क्या है फ्रेट कॉरिडोर
करीब 10 साल पहले रेलवे ने अपना फ्रेट रेवेन्यू बढ़ाने और पटरियों पर ट्रैफिक कम करने के लिए केवल मालगाडियों के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का गठन किया था। इर्स्टन कॉरिडोर पंजाब हावड़ा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर मालगाड़ियों की अधिकतम रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जो कि अभी 75 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह दूसरा चरण है, जो 2019 में पूरा हो जाएगा, जबकि पूरा प्रोजेक्ट 2020 तक पूरा हो जाएगा। इस कॉरिडोर को पूरी तरह से दुर्घटना मुक्त जोन बनाया जा रहा है।
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टिवनसिटी की इंडस्ट्री को मिलेगा फायदा
डिवीजनल रेलवे यूजर्स कंसलटेटिव कमेटी अंबाला डिजीवन के सदस्यस राजकुमार चावला के मुताबिक देश की इकोनॉमिक ग्रोथ में लॉजिस्टिक सेक्टर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देश में अभी लॉजिस्टिक सेक्टर और सप्लाई चेन मैनेजमेंट परिपक्व नहीं है, जिससे देश की प्रमुख इंडस्ट्री जैसे ऑटोमोबाइल, फार्मा, कंज्यूमर ड्यूरेबल, एफएमसीजी, ई-कॉमर्स आदि की ग्रोथ पर असर पड़ रहा है। लगभग 60 फीसदी माल ढुलाई सड़क से की जाती है, जो महंगी भी होती है और माल पहुंचने में देरी भी होती है, लेकिन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनने के बाद इसमें खासा सुधार होगा। कॉरिडोर शुरू होने के बाद पैसेंजर रूट पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और पैसेंजर ट्रेनों की भी स्पीड बढ़ेगी।
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प्लाइवुड से संबंधित फेस विनियर के इंपोर्टर सुमित गुप्ता का कहना है कि अभी कांडला पोर्ट से एक्सपोर्ट इंपोर्ट का सामान ट्रकों द्वारा लाया ले जाया जाता है। रेलवे की सुविधा होने के बाद ट्रांसपोर्ट सस्ता और समय कम लगेगा।
यमुनानगर और जगाधरी को इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा मिलने वाला है। उन्होंने बताया कि लॉजिस्टिक
लागत में कमी होने का फायदा इंडस्ट्री के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी मिलेगा।
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इन राज्यों से गुजरेगा
पंजाब 88 किमी
हरियाणा 72 किमी
उत्तर प्रदेश 1058 किमी
बिहार 239 किमी
झारखंड 196 किमी
पश्चिम बंगाल 203 किमी
यह मिलेगा लाभ बॉक्स
इन सेक्टर्स को मिलेगा फायदा
पावर हाउस कोयला 61.96 टन प्रतिवर्ष
कोयला 0.95 टन प्रतिवर्ष
स्टील 9.74 टन प्रतिवर्ष
फर्टिलाइजर 0.42 टन प्रतिवर्ष
सीमेंट 1.52 टन प्रतिवर्ष
नमक 1.03 टन प्रतिवर्ष
अन्य सामान 5.92 प्रतिवर्ष
फोटो 13, 14