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यमुना में आई बाढ़ ने बेलगढ़ व साथ लगते गांवों में मचाई तबाही
Updated Mon, 30 Jul 2018 12:52 AM IST
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जब माइनिंग माफिया चीर रहे थे यमुना का सीना तब कहां थे
बाढ़ देखने पहुंचे अधिकारियों को ग्रामीणों का करारा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/खिजराबाद। यमुना में आई बाढ़ ने जिले में जमकर तबाही मचा दी है। माली माजरा में यमुना का पानी पटरी को तोड़ खेतों में घुस गया। मालीमाजरा, लाक्कड़, नवजापुर, भीलपुरा, बेलगढ़ आदि दर्जनों गांवों में यमुना की बाढ़ का पानी खेतों में खड़ी फसल को तबाह कर गया और साथ-साथ खेतों में गहरे गड्ढे भी बना गया। इसके साथ-साथ यमुना के पानी से खेतों में लगभग एक फीट तक रेत चढ़ गया है। बाढ़ का पानी उतरने से अगले दिन सिंचाई व अन्य विभागों के अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ खेतों और बेलगढ़ पटरी का दौरा किया। सिंचाई विभाग के एसडीओ सुभाष, पटवारी लियाकत अली भी थे। ग्रामीणों ने अधिकारियों का करारा जवाब देते हुए कहा कि जब माइनिंग माफिया यमुना का सीना चीर रहे तब कहां थे, अब यहां क्या करने आए हो। ग्रामीणों के कड़े रुख को देखते हुए अधिकारी सकपका गए और मौके पर ही 20 लाख रुपये की ग्रांट से काम करवाने की बात कही।
ग्रामीण कर रहे थे बाढ़ बचाव कार्य कराने की मांग : ग्रामीण जय सिंह, दलमीरा, मुल्की राम, जोगिद्र सिंह पूर्व सरपंच, पितांबर आदि का कहना है कि बेलगढ़ और मालीमाजरा व यमुना के साथ लगते गांवों के ग्रामीण पिछले लंबे समय से यहां पटरी पर बाढ़ बचाव कार्य करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन ना तो सरकार ने इस ओर कोई कार्रवाई की और ना ही विभाग ने सुनवाई की।
अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा : अमर उजाला ने यमुना किनारे बसे गांवों में बाढ़ राहत कार्य न होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। विस्तृत रिपोर्ट भी प्रकाशित की गई थी, लेकिन माइनिंग माफिया के दबाव में कोई काम नहीं किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि लाक्कड, भीलपुरा और मालीमाजरा में यमुना में अवैध खनन होने से पानी का रुख हरियाणा की ओर हो गया है। इसी वजह से बाढ़ ने यमुना के किनारे बसे गांवों में कोहराम मचाया है।
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बाढ़ राहत कार्य किसी काम के नहीं : शहजादवाला, बनियांवाला और मेघूवाला में सिंचाई विभाग द्वारा करवाए गए बाढ़ राहत कार्य स्थानीय नदियों में आए उफान ने धराशायी कर दिए। बनियांवाला के सरपंच अंकित गुप्ता, नम्बरदार सुलेखचंद, राजिद्र कुमार, दीपक बंसल, अशोक कुमार, बेबी राम आदि का कहना है कि बनियांवाला में सिंचाई विभाग द्वारा करवाए गए बाढ़ राहत कार्य किसी काम के नहीं रहे।
क्षतिग्रस्त पटरी को रिपेयर करवाने के लिए एस्टीमेट बनाया जाएगा और जल्दी ही यहां काम शुरू करवाया जाएगा। यमुना के पानी का बहाव तेज था। इसकी वजह से कटाव हुआ है। इससे ग्रामीण दुखी हैं।
- हरिदेव कांबोज, एक्सईएन, सिंचाई विभाग
पानी उतरने दो, फिर किसान करेंगे आंदोलन
अवैध खनन के खिलाफ एनजीटी में शिकायत व हाईकोर्ट में पीआईएल भी डाली। खनन विभाग और पुलिस अधिकारी भ्रष्टाचार में इतने डूबे हुए हैं कि शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा शिकायत कर्ताओं के खिलाफ ही झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए गए। इसी का नतीजा है कि क्षेत्र के किसानों को अब अपनी फसल ही नहीं बल्कि जमीन भी गंवानी पड़ रही है। पानी उतरने दो, फिर किसान एकजुट होकर खनन विभाग के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे।
-वरयाम सिंह, आरटीआई एक्टीविस्ट
फोटो नंबर 29, 30, 31
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बाढ़ देखने पहुंचे अधिकारियों को ग्रामीणों का करारा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/खिजराबाद। यमुना में आई बाढ़ ने जिले में जमकर तबाही मचा दी है। माली माजरा में यमुना का पानी पटरी को तोड़ खेतों में घुस गया। मालीमाजरा, लाक्कड़, नवजापुर, भीलपुरा, बेलगढ़ आदि दर्जनों गांवों में यमुना की बाढ़ का पानी खेतों में खड़ी फसल को तबाह कर गया और साथ-साथ खेतों में गहरे गड्ढे भी बना गया। इसके साथ-साथ यमुना के पानी से खेतों में लगभग एक फीट तक रेत चढ़ गया है। बाढ़ का पानी उतरने से अगले दिन सिंचाई व अन्य विभागों के अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ खेतों और बेलगढ़ पटरी का दौरा किया। सिंचाई विभाग के एसडीओ सुभाष, पटवारी लियाकत अली भी थे। ग्रामीणों ने अधिकारियों का करारा जवाब देते हुए कहा कि जब माइनिंग माफिया यमुना का सीना चीर रहे तब कहां थे, अब यहां क्या करने आए हो। ग्रामीणों के कड़े रुख को देखते हुए अधिकारी सकपका गए और मौके पर ही 20 लाख रुपये की ग्रांट से काम करवाने की बात कही।
ग्रामीण कर रहे थे बाढ़ बचाव कार्य कराने की मांग : ग्रामीण जय सिंह, दलमीरा, मुल्की राम, जोगिद्र सिंह पूर्व सरपंच, पितांबर आदि का कहना है कि बेलगढ़ और मालीमाजरा व यमुना के साथ लगते गांवों के ग्रामीण पिछले लंबे समय से यहां पटरी पर बाढ़ बचाव कार्य करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन ना तो सरकार ने इस ओर कोई कार्रवाई की और ना ही विभाग ने सुनवाई की।
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अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा : अमर उजाला ने यमुना किनारे बसे गांवों में बाढ़ राहत कार्य न होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। विस्तृत रिपोर्ट भी प्रकाशित की गई थी, लेकिन माइनिंग माफिया के दबाव में कोई काम नहीं किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि लाक्कड, भीलपुरा और मालीमाजरा में यमुना में अवैध खनन होने से पानी का रुख हरियाणा की ओर हो गया है। इसी वजह से बाढ़ ने यमुना के किनारे बसे गांवों में कोहराम मचाया है।
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बाढ़ राहत कार्य किसी काम के नहीं : शहजादवाला, बनियांवाला और मेघूवाला में सिंचाई विभाग द्वारा करवाए गए बाढ़ राहत कार्य स्थानीय नदियों में आए उफान ने धराशायी कर दिए। बनियांवाला के सरपंच अंकित गुप्ता, नम्बरदार सुलेखचंद, राजिद्र कुमार, दीपक बंसल, अशोक कुमार, बेबी राम आदि का कहना है कि बनियांवाला में सिंचाई विभाग द्वारा करवाए गए बाढ़ राहत कार्य किसी काम के नहीं रहे।
क्षतिग्रस्त पटरी को रिपेयर करवाने के लिए एस्टीमेट बनाया जाएगा और जल्दी ही यहां काम शुरू करवाया जाएगा। यमुना के पानी का बहाव तेज था। इसकी वजह से कटाव हुआ है। इससे ग्रामीण दुखी हैं।
- हरिदेव कांबोज, एक्सईएन, सिंचाई विभाग
पानी उतरने दो, फिर किसान करेंगे आंदोलन
अवैध खनन के खिलाफ एनजीटी में शिकायत व हाईकोर्ट में पीआईएल भी डाली। खनन विभाग और पुलिस अधिकारी भ्रष्टाचार में इतने डूबे हुए हैं कि शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा शिकायत कर्ताओं के खिलाफ ही झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए गए। इसी का नतीजा है कि क्षेत्र के किसानों को अब अपनी फसल ही नहीं बल्कि जमीन भी गंवानी पड़ रही है। पानी उतरने दो, फिर किसान एकजुट होकर खनन विभाग के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे।
-वरयाम सिंह, आरटीआई एक्टीविस्ट
फोटो नंबर 29, 30, 31