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चार महीने तक नहीं होंगे मांगलिक कार्य,
Updated Tue, 24 Jul 2018 12:42 AM IST
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आज से चौमासा शुरू, चार महीने तक नहीं होंगे मांगलिक कार्य
-चौमासा के बाद भी 14 जनवरी तक शादी का कोई मुहूर्त नहीं
यमुनानगर। मंगलवार से चौमासा शुरू हो गया है। ज्योतिषों के मुताबिक अगले चार महीने तक मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकेंगे। चौमासा 18 नवंबर को खत्म होगा, लेकिन शादियों का मुहूर्त तो इसके बाद भी नहीं खुल रहा। क्योंकि चौमासा खत्म होने से पहले ही 12 नवंबर से गुरु का तारा अस्त हो जाएगा, जिसका उदय 7 दिसंबर को होगा। पंडित उदयवीर शास्त्री ने बताया कि 23 जुलाई को देवशयनी एकादशी हुई है। इसे हरि शयनी एकादशी भी कहते हैं और इस दिन से भगवान विष्णु का शयन काल शुरू हो जाता है। इसी दिन के साथ ही चातुर्मास या चौमासा की शुरुआत भी शुरू हो रहा है। अब देवउठनी एकादशी 18 नवंबर तक कोई मुहूर्त नहीं है। लेकिन उसमें भी दिक्कत है। इस बार 12 नवंबर से गुरु का तारा अस्त हो जाएगा, जिसका उदय 7 दिसंबर को होगा। इसलिए देवउठनी एकादशी के बावजूद विवाह नहीं हो सकेंगे। इसके बाद धनु का मलमास 16 दिसंबर से शुरू होगा, जो 14 जनवरी 2019 तक जारी रहेगा।
तीन दिन बाद पूर्व चंद्र ग्रहण : उन्होंने बताया कि गुरु पूर्णिमा 27 जुलाई के दिन सदी का सबसे लंबा और पूर्ण चंद्र ग्रहण है। इस चंद्र ग्रहण को वैज्ञानिक ने ब्लड मून का नाम दिया है। इस दौरान चंद्रमा लाल या भूरे रंग का दिखाई देगा। इस चंद्र ग्रहण का नजारा देश के कुछ हिस्सों में देखा जा सकता है। ग्रहण स्पर्श रात 11.54 बजे शुरू होगा। मध्य रात 1.52 बजे चंद्रग्रहण स्पष्ट व पूरा दिखाई देगा। इसका मोक्ष सुबह 3.49 बजे होगा।
मांगलिक कार्य में प्रभु का साक्ष्य जरूरी : ज्योतिष शास्त्री पंडित प्रवीण भारद्वाज का कहना है कि भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं। वे अनुराधा नक्षत्र के प्रथम चरण में विश्राम करेंगे। श्रवण नक्षत्र के मध्य यानि आगामी 20 सितंबर को करवट लेंगे। रेवती नक्षत्र अंतिम चरण में जागेंगे। शास्त्रों में किसी भी मांगलिक कार्य में प्रभु का साक्ष्य होना अनिवार्य माना गया है। इन चार महीनों में चातुर्मास के कारण आसुरी शक्तियां प्रबल और दैवीय शक्तियां निर्बल रहती हैं। इसलिए प्राय: शुभ कार्य नहीं होते हालांकि यह समय अशुभ नहीं माना जाता। इस दौरान लोग भक्ति में रमे रहते हैं।
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-चौमासा के बाद भी 14 जनवरी तक शादी का कोई मुहूर्त नहीं
यमुनानगर। मंगलवार से चौमासा शुरू हो गया है। ज्योतिषों के मुताबिक अगले चार महीने तक मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकेंगे। चौमासा 18 नवंबर को खत्म होगा, लेकिन शादियों का मुहूर्त तो इसके बाद भी नहीं खुल रहा। क्योंकि चौमासा खत्म होने से पहले ही 12 नवंबर से गुरु का तारा अस्त हो जाएगा, जिसका उदय 7 दिसंबर को होगा। पंडित उदयवीर शास्त्री ने बताया कि 23 जुलाई को देवशयनी एकादशी हुई है। इसे हरि शयनी एकादशी भी कहते हैं और इस दिन से भगवान विष्णु का शयन काल शुरू हो जाता है। इसी दिन के साथ ही चातुर्मास या चौमासा की शुरुआत भी शुरू हो रहा है। अब देवउठनी एकादशी 18 नवंबर तक कोई मुहूर्त नहीं है। लेकिन उसमें भी दिक्कत है। इस बार 12 नवंबर से गुरु का तारा अस्त हो जाएगा, जिसका उदय 7 दिसंबर को होगा। इसलिए देवउठनी एकादशी के बावजूद विवाह नहीं हो सकेंगे। इसके बाद धनु का मलमास 16 दिसंबर से शुरू होगा, जो 14 जनवरी 2019 तक जारी रहेगा।
तीन दिन बाद पूर्व चंद्र ग्रहण : उन्होंने बताया कि गुरु पूर्णिमा 27 जुलाई के दिन सदी का सबसे लंबा और पूर्ण चंद्र ग्रहण है। इस चंद्र ग्रहण को वैज्ञानिक ने ब्लड मून का नाम दिया है। इस दौरान चंद्रमा लाल या भूरे रंग का दिखाई देगा। इस चंद्र ग्रहण का नजारा देश के कुछ हिस्सों में देखा जा सकता है। ग्रहण स्पर्श रात 11.54 बजे शुरू होगा। मध्य रात 1.52 बजे चंद्रग्रहण स्पष्ट व पूरा दिखाई देगा। इसका मोक्ष सुबह 3.49 बजे होगा।
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मांगलिक कार्य में प्रभु का साक्ष्य जरूरी : ज्योतिष शास्त्री पंडित प्रवीण भारद्वाज का कहना है कि भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं। वे अनुराधा नक्षत्र के प्रथम चरण में विश्राम करेंगे। श्रवण नक्षत्र के मध्य यानि आगामी 20 सितंबर को करवट लेंगे। रेवती नक्षत्र अंतिम चरण में जागेंगे। शास्त्रों में किसी भी मांगलिक कार्य में प्रभु का साक्ष्य होना अनिवार्य माना गया है। इन चार महीनों में चातुर्मास के कारण आसुरी शक्तियां प्रबल और दैवीय शक्तियां निर्बल रहती हैं। इसलिए प्राय: शुभ कार्य नहीं होते हालांकि यह समय अशुभ नहीं माना जाता। इस दौरान लोग भक्ति में रमे रहते हैं।
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