{"_id":"5aad68054f1c1b68248b5d6a","slug":"15213140441315-yamuna-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांच टन की क्षमता वाले हथनीकुंड बैराज पर रोज पड़ रहा 15 टन भार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांच टन की क्षमता वाले हथनीकुंड बैराज पर रोज पड़ रहा 15 टन भार
Updated Sun, 18 Mar 2018 12:39 AM IST
विज्ञापन
पांच टन क्षमता वाले हथनीकुंड बैराज पर रोज पड़ रहा 15 टन भार, कमजोर हो रहा पुल
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/खिजराबाद।
दो राज्यों की सीमाओं पर बना हथनीकुंड बैराज दिन-प्रतिदिन कमजोर हो रहा है। बैराज पर उसकी क्षमता से काफी अधिक भार पड़ रहा है। यहां से रोज खनन सामग्री से लदीं ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां गुजर रही हैं, जबकि बैराज से वाहनों की आवाजाही नहीं हो सकती। भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए यहां बैरिकेड लगाए गए हैं। इसके बावजूद ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लगातार निकल रही हैं। बैराज की सुरक्षा को लेकर यहां पुलिस चौकी बनाई गई है, लेकिन चौकी से अकसर पुलिस कर्मचारी नदारद रहते हैं।
हथनीकुंड बैराज के एक तरफ हरियाणा और दूसरी तरफ यूपी है। यह बैराज दोनों राज्यों को आपस में जोड़ता है। पहाड़ों से उतरकर मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करने वाली यमुना नदी सबसे पहले इस बैराज से होकर गुजरती है। बैराज की सुरक्षा और यूपी से हरियाणा मेें अवांछित तत्वों की आवाजाही रोकने के लिए बैराज पर पुलिस चौकी भी बनाई गई है। लेकिन यह पुलिस चौकी सिर्फ दिखावा साबित हो रही है। चौकी पर कभी-कभार ही कोई पुलिस कर्मचारी नजर आता है। बैराज खनन जोन में ही बना हुआ है। हरियाणा के खनन सामग्री से लदे भारी वाहन पहले बैराज से होकर गुजरते थे। इससे बैराज कमजोर होने लगा। बैराज से खनन सामग्री से भरे भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए करीब चार महीने पहले बैराज के दोनों ओर बैरिकेड लगा दिए गए। इसके बाद बैराज से ट्रकों व डंपरों का निकलना बंद हो गया। लेकिन खनन सामग्री से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बैरिकेड के नीचे से आसानी निकल रही हैं। ये ट्रैक्टर-ट्रॉलियों डबल टायर की होती हैं, जिनमें काफी अधिक मात्रा में रेत-बजरी लादा जा सकता है।
-खतरे में है बैराज का अस्तित्व-
अधिकारियों के अनुसार हथनीकुंड बैराज की क्षमता पांच से सात टन की है। हल्के वाहनों की आवाजाही से बैराज पर कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन रेत से लदी ओवरलोड ट्रॉलियां निकलने से बैराज को खतरा है। ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली में करीब तीन टन खनन सामग्री लादी जाती है। कई बार बैराज से एक बार में चार से पांच ट्रैक्टर-ट्रॉलियां भी गुजरती हैं। इस दौरान बैराज पर 12 से 15 टन का भार पड़ता है। यदि रोज पुल पर क्षमता से अधिक भार पड़ता रहा तो बैराज काफी कमजोर हो जाएगा।
विज्ञापन
पुल कितना कमजोर हुआ, इसकी करवाएंगे जांच : एक्सईएन
सिंचाई विभाग के एक्सईएन विनोद कुमार ने बताया कि हथनीकुंड बैराज वाहनों की आवाजाही के लिए नहीं है। दरअसल यह हेड रेगुलेटर है, जिसे बैराज के गेट खोलने और बंद करने और मशीनरी लाने-ले जाने के लिए बनाया गया है। इसकी क्षमता पंाच से सात टन की है। बैराज से ओवरलोड वाहन निकलने पर यहां बैरिकेड लगा दिए गए। पुलिस चौकी पर कर्मचारी न होने के कारण ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बैरिकेड के नीचे से गुजर रही हैं, जिससे बैराज कमजोर हो रहा है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियां निकलने से बैराज कितना कमजोर हुआ है, इसकी जांच की जाएगी। इसके लिए केस फाइल कर उच्चाधिकारियों को भेजा गया है।
फोटो--1,2
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/खिजराबाद।
दो राज्यों की सीमाओं पर बना हथनीकुंड बैराज दिन-प्रतिदिन कमजोर हो रहा है। बैराज पर उसकी क्षमता से काफी अधिक भार पड़ रहा है। यहां से रोज खनन सामग्री से लदीं ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां गुजर रही हैं, जबकि बैराज से वाहनों की आवाजाही नहीं हो सकती। भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए यहां बैरिकेड लगाए गए हैं। इसके बावजूद ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लगातार निकल रही हैं। बैराज की सुरक्षा को लेकर यहां पुलिस चौकी बनाई गई है, लेकिन चौकी से अकसर पुलिस कर्मचारी नदारद रहते हैं।
हथनीकुंड बैराज के एक तरफ हरियाणा और दूसरी तरफ यूपी है। यह बैराज दोनों राज्यों को आपस में जोड़ता है। पहाड़ों से उतरकर मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करने वाली यमुना नदी सबसे पहले इस बैराज से होकर गुजरती है। बैराज की सुरक्षा और यूपी से हरियाणा मेें अवांछित तत्वों की आवाजाही रोकने के लिए बैराज पर पुलिस चौकी भी बनाई गई है। लेकिन यह पुलिस चौकी सिर्फ दिखावा साबित हो रही है। चौकी पर कभी-कभार ही कोई पुलिस कर्मचारी नजर आता है। बैराज खनन जोन में ही बना हुआ है। हरियाणा के खनन सामग्री से लदे भारी वाहन पहले बैराज से होकर गुजरते थे। इससे बैराज कमजोर होने लगा। बैराज से खनन सामग्री से भरे भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए करीब चार महीने पहले बैराज के दोनों ओर बैरिकेड लगा दिए गए। इसके बाद बैराज से ट्रकों व डंपरों का निकलना बंद हो गया। लेकिन खनन सामग्री से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बैरिकेड के नीचे से आसानी निकल रही हैं। ये ट्रैक्टर-ट्रॉलियों डबल टायर की होती हैं, जिनमें काफी अधिक मात्रा में रेत-बजरी लादा जा सकता है।
विज्ञापन
-खतरे में है बैराज का अस्तित्व-
अधिकारियों के अनुसार हथनीकुंड बैराज की क्षमता पांच से सात टन की है। हल्के वाहनों की आवाजाही से बैराज पर कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन रेत से लदी ओवरलोड ट्रॉलियां निकलने से बैराज को खतरा है। ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली में करीब तीन टन खनन सामग्री लादी जाती है। कई बार बैराज से एक बार में चार से पांच ट्रैक्टर-ट्रॉलियां भी गुजरती हैं। इस दौरान बैराज पर 12 से 15 टन का भार पड़ता है। यदि रोज पुल पर क्षमता से अधिक भार पड़ता रहा तो बैराज काफी कमजोर हो जाएगा।
विज्ञापन
पुल कितना कमजोर हुआ, इसकी करवाएंगे जांच : एक्सईएन
सिंचाई विभाग के एक्सईएन विनोद कुमार ने बताया कि हथनीकुंड बैराज वाहनों की आवाजाही के लिए नहीं है। दरअसल यह हेड रेगुलेटर है, जिसे बैराज के गेट खोलने और बंद करने और मशीनरी लाने-ले जाने के लिए बनाया गया है। इसकी क्षमता पंाच से सात टन की है। बैराज से ओवरलोड वाहन निकलने पर यहां बैरिकेड लगा दिए गए। पुलिस चौकी पर कर्मचारी न होने के कारण ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बैरिकेड के नीचे से गुजर रही हैं, जिससे बैराज कमजोर हो रहा है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियां निकलने से बैराज कितना कमजोर हुआ है, इसकी जांच की जाएगी। इसके लिए केस फाइल कर उच्चाधिकारियों को भेजा गया है।
फोटो--1,2