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जेटली के बजट को किसी ने सराहा तो किसी ने नकारा
Updated Thu, 01 Feb 2018 11:57 PM IST
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किसान बोले, भविष्य में नहीं, अभी बढ़े आमदनी
केंद्रीय बजट को किसी ने सराहा तो किसी ने नकारा
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। केंद्रीय बजट को सुनने के लिए वीरवार को दिनभर हर किसी की निगाहें टीवी पर टिकी रहीं। बजट पेश होने के बाद कुछ लोगों ने इसे सही तो कुछ ने गलत करार दिया। बजट के दौरान शहर की सड़कें सुनसान रहीं और लोग दोपहर तक घर में बैठे बजट ही देखते रहे। विपक्ष पार्टियों ने इसे आम जनता के साथ धोखा बताया तो भाजपा से जनप्रतिनिधि बजट को अच्छा बता रहे हैं।
किसानों के लिए नहीं कुछ खास
बजट में किसानों के लिए कुछ खास नहीं किया गया है। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए किसानों को मात्र झुनझुना ही दिया गया है। यदि किसानों का आर्थिक स्तर उठाना है तो उन्हें कर्जमुक्त किया जाए और फसलों का लाभकारी मूल्य दिया जाए।
- रामबीर सिंह चौहान, जिला प्रधान, भारतीय किसान संघ।
फोटो-11
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किसानों को सिर्फ लॉलीपॉप
बजट में किसानों को सिर्फ लॉलीपोप दिया गया है। किसानों को तुरंत कोई लाभ नहीं होने वाला है। इसमें 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात की गई है, लेकिन हमें यह कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा है कि किसानों की आय दोगुनी होगी। कर्ज माफ करने का भी ऐलान नहीं किया गया है।
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- हरपाल सुढैल, प्रदेश सचिव, भारतीय किसान यूनियन।
फोटो-13
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किसानों के हित में नहीं बजट
बजट किसानों के हित में नहीं है। सरकार ने आज तक स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं की। सरकार ने फसलों का न्यूनतम समर्थन का ऐलान तो कर दिया, लेकिन यह लागू कब होगा, इस पर प्रश्नचिह्न लगा हुआ है, इसलिए सरकार ने बजट में किसानों को बेरुखी दी है।
- विकास राणा, युवा अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ।
फोटो-7
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बजट कम, चुनावी घोषणा पत्र ज्यादा
बजट में किसानों और मजदूरों के लिए लुभावने वादे हैं, यह बजट कम और चुनावी घोषणा पत्र ज्यादा है। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात की गई है, जो छलावा मात्र है। यदि सरकार किसानों का फायदा सोचती तो अभी से ही फसल के दाम बढ़ाने चाहिए थे।
- विजय मेहता, प्रदेश महासचिव, भाकियू (रतनमान गुट)
फोटो-12
2022 तक हर गरीब को घर देने का ऐलान सराहनीय
देश की इकोनॉमी 8 पर्सेंट की ग्रोथ की ओर बढ़ रही है। 2018-19 के दूसरे हाफ में इकोनॉमी की ग्रोथ 7.2 से 7.5 परसेंट तक रहने की उम्मीद है। गरीब परिवारों के लिए लागू की गई स्वास्थ्य संबंधी पॉलिसी से करीब 50 प्रतिशत लोगों को फायदा मिलेगा।
- घनश्यामदास अरोड़ा, विधायक, यमुनानगर।
फोटो-4
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मध्यवर्ग के लोगों को लगी निराशा हाथ
बजट से मध्य वर्ग को निराशा हाथ लगी। सरकार ने कॉरपोरेट हाउस को बढ़ावा दिया है। मध्य वर्ग को कोई बड़ी छूट नहीं दी। जबकि देश में सबसे अधिक मध्य वर्ग लोग रहते हैं। बजट आमजन के लिए निराशा लेकर आया। इसके अलावा इनकम टैक्स में भी कोई छूट नहीं दी गई।
- देवेंद्र चावला, प्रदेश महामंत्री, कांग्रेस पार्टी।
फोटो-5
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उद्योगपतियों की उम्मीदें हो गईं धूमिल
सरकार ने आम बजट पेश किया है, जिसमें उद्योगपतियों को कुछ नहीं मिला। उद्योगपतियों को जो उम्मीदें थीं, वह धूमिल हो गईं। सरकार उद्योगपतियों से रोजगार छीनने का काम कर रही है। उन्हें किसी प्रकार की कोई छूट नहीं दी गई है, बल्कि उन पर जीएसटी थोप दिया गया।
- अमित गोयल, शहरी प्रधान, इनेलो।
फोटो-8
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मध्य वर्ग पर पड़ा सबसे अधिक बोझ
बजट में कुछ खास नहीं है। इसमें मध्य वर्ग को कोई फायदा नहीं मिला, इसलिये सबसे अधिक बोझ उन पर ही पड़ा है। सरकार ऐसा बजट पेश कर रही है, जो बजट महंगा है। इससे आम जनता पर मार पड़ी है, जो गलत है। सरकार लोगाें को महंगाई की ओर ले जा रही है।
- भूपेंद्र राणा, कांग्रेस नेता।
फोटो-6
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बुजुर्गों को राहत, अच्छा रहा बजट : उप्पल
बुजुर्गों को सरकार ने सम्मानित किया है, क्योंकि उन्हें बड़ी राहत दी है। बुजुर्गों को अब टैक्स में ज्यादा लाभ मिलेगा। 15 लाख रुपये की जमा राशि पर काफी टैक्स लगाया गया है। इससे बुजुर्ग अपने लिए पैसे जमा करवा सकेंगे और आगे उन्हें कोई दिक्कत नहीं आएगी।
- आरके उप्पल, रिटायर्ड पोस्टमास्टर।
फोटो-9
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संपूर्ण रूप से एक सोशल बजट
सरकार ने वेतन भोगियों को कर छूट व अपने सांसदों के वेतन वृद्धि का तो प्रावधान किया। व्यापारियों को बचाने के लिए कुछ भी नहीं सोचा, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। युवाओं को रोजगार और अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करता है। इस बजट में उसे आयकर में कुछ भी छूट नहीं दी गई।
- संजय मित्तल, कार्यकारी अध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा
फोटो-
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एक हाथ से दिया और दूसरे हाथ से लिया
बजट में वेतन भोगियों को लुभाने के लिए 40 हजार की स्टैंडर्ड डिडक्शन दी है वहीं, मेडिकल और ट्रांसपोर्ट अलाउंस को खत्म कर दिया है। वित्तमंत्री ने एक हाथ से दिया है और दूसरी ओर सेस और इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर इसे वापस ले लिया है। उद्योग व व्यापार को बढ़ाने के लिए कोई योजना नहीं बनाई।
- प्रदीप कोहली, टैक्स कंसलटेंट।
फोटो-10
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बिना फोटो के:-
प्लाईवुड से सरकार को अच्छा रिवेन्यू, फिर भी कुछ न मिला
आकलन करें तो पता चलेगा कि यमुनानगर के प्लाईवुड उद्योग से टैक्स से सरकार को अच्छा खासा रिवेन्यू होता है। बावजूद इसके बजट में जिले को कुछ नहीं मिलता है। होना ये चाहिए कि प्लाईवुड कारोबार को बढ़ावा देने को इंडस्ट्री हब बने और किसानों को प्रोत्साहित किया जाए।
- अंकुर जैन, लॉयस क्लब सेक्रेट्री एवं प्लाइवुड व्यापारी।
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नोटबंदी से नुकसान हुए व्यापार को प्रोत्साहन नहीं
उद्यम क्षेत्र के लिए विभिन्न योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। नोटबंदी के चलते हानिग्रस्त व्यापार को कुछ भी प्रोत्साहन नहीं दिया गया। व्यापारियों को बैंक के ऋण पर ब्याज दर में कोई छूट नहीं दी गई। जबकि विदेशी निवेश वालों को अतिरिक्त सहयोग दिया जाता है।
- मोहित बंसल, युवा अध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा
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केंद्रीय बजट को किसी ने सराहा तो किसी ने नकारा
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। केंद्रीय बजट को सुनने के लिए वीरवार को दिनभर हर किसी की निगाहें टीवी पर टिकी रहीं। बजट पेश होने के बाद कुछ लोगों ने इसे सही तो कुछ ने गलत करार दिया। बजट के दौरान शहर की सड़कें सुनसान रहीं और लोग दोपहर तक घर में बैठे बजट ही देखते रहे। विपक्ष पार्टियों ने इसे आम जनता के साथ धोखा बताया तो भाजपा से जनप्रतिनिधि बजट को अच्छा बता रहे हैं।
किसानों के लिए नहीं कुछ खास
बजट में किसानों के लिए कुछ खास नहीं किया गया है। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए किसानों को मात्र झुनझुना ही दिया गया है। यदि किसानों का आर्थिक स्तर उठाना है तो उन्हें कर्जमुक्त किया जाए और फसलों का लाभकारी मूल्य दिया जाए।
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- रामबीर सिंह चौहान, जिला प्रधान, भारतीय किसान संघ।
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किसानों को सिर्फ लॉलीपॉप
बजट में किसानों को सिर्फ लॉलीपोप दिया गया है। किसानों को तुरंत कोई लाभ नहीं होने वाला है। इसमें 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात की गई है, लेकिन हमें यह कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा है कि किसानों की आय दोगुनी होगी। कर्ज माफ करने का भी ऐलान नहीं किया गया है।
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- हरपाल सुढैल, प्रदेश सचिव, भारतीय किसान यूनियन।
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किसानों के हित में नहीं बजट
बजट किसानों के हित में नहीं है। सरकार ने आज तक स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं की। सरकार ने फसलों का न्यूनतम समर्थन का ऐलान तो कर दिया, लेकिन यह लागू कब होगा, इस पर प्रश्नचिह्न लगा हुआ है, इसलिए सरकार ने बजट में किसानों को बेरुखी दी है।
- विकास राणा, युवा अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ।
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बजट कम, चुनावी घोषणा पत्र ज्यादा
बजट में किसानों और मजदूरों के लिए लुभावने वादे हैं, यह बजट कम और चुनावी घोषणा पत्र ज्यादा है। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात की गई है, जो छलावा मात्र है। यदि सरकार किसानों का फायदा सोचती तो अभी से ही फसल के दाम बढ़ाने चाहिए थे।
- विजय मेहता, प्रदेश महासचिव, भाकियू (रतनमान गुट)
फोटो-12
2022 तक हर गरीब को घर देने का ऐलान सराहनीय
देश की इकोनॉमी 8 पर्सेंट की ग्रोथ की ओर बढ़ रही है। 2018-19 के दूसरे हाफ में इकोनॉमी की ग्रोथ 7.2 से 7.5 परसेंट तक रहने की उम्मीद है। गरीब परिवारों के लिए लागू की गई स्वास्थ्य संबंधी पॉलिसी से करीब 50 प्रतिशत लोगों को फायदा मिलेगा।
- घनश्यामदास अरोड़ा, विधायक, यमुनानगर।
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मध्यवर्ग के लोगों को लगी निराशा हाथ
बजट से मध्य वर्ग को निराशा हाथ लगी। सरकार ने कॉरपोरेट हाउस को बढ़ावा दिया है। मध्य वर्ग को कोई बड़ी छूट नहीं दी। जबकि देश में सबसे अधिक मध्य वर्ग लोग रहते हैं। बजट आमजन के लिए निराशा लेकर आया। इसके अलावा इनकम टैक्स में भी कोई छूट नहीं दी गई।
- देवेंद्र चावला, प्रदेश महामंत्री, कांग्रेस पार्टी।
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उद्योगपतियों की उम्मीदें हो गईं धूमिल
सरकार ने आम बजट पेश किया है, जिसमें उद्योगपतियों को कुछ नहीं मिला। उद्योगपतियों को जो उम्मीदें थीं, वह धूमिल हो गईं। सरकार उद्योगपतियों से रोजगार छीनने का काम कर रही है। उन्हें किसी प्रकार की कोई छूट नहीं दी गई है, बल्कि उन पर जीएसटी थोप दिया गया।
- अमित गोयल, शहरी प्रधान, इनेलो।
फोटो-8
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मध्य वर्ग पर पड़ा सबसे अधिक बोझ
बजट में कुछ खास नहीं है। इसमें मध्य वर्ग को कोई फायदा नहीं मिला, इसलिये सबसे अधिक बोझ उन पर ही पड़ा है। सरकार ऐसा बजट पेश कर रही है, जो बजट महंगा है। इससे आम जनता पर मार पड़ी है, जो गलत है। सरकार लोगाें को महंगाई की ओर ले जा रही है।
- भूपेंद्र राणा, कांग्रेस नेता।
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बुजुर्गों को राहत, अच्छा रहा बजट : उप्पल
बुजुर्गों को सरकार ने सम्मानित किया है, क्योंकि उन्हें बड़ी राहत दी है। बुजुर्गों को अब टैक्स में ज्यादा लाभ मिलेगा। 15 लाख रुपये की जमा राशि पर काफी टैक्स लगाया गया है। इससे बुजुर्ग अपने लिए पैसे जमा करवा सकेंगे और आगे उन्हें कोई दिक्कत नहीं आएगी।
- आरके उप्पल, रिटायर्ड पोस्टमास्टर।
फोटो-9
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संपूर्ण रूप से एक सोशल बजट
सरकार ने वेतन भोगियों को कर छूट व अपने सांसदों के वेतन वृद्धि का तो प्रावधान किया। व्यापारियों को बचाने के लिए कुछ भी नहीं सोचा, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। युवाओं को रोजगार और अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करता है। इस बजट में उसे आयकर में कुछ भी छूट नहीं दी गई।
- संजय मित्तल, कार्यकारी अध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा
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एक हाथ से दिया और दूसरे हाथ से लिया
बजट में वेतन भोगियों को लुभाने के लिए 40 हजार की स्टैंडर्ड डिडक्शन दी है वहीं, मेडिकल और ट्रांसपोर्ट अलाउंस को खत्म कर दिया है। वित्तमंत्री ने एक हाथ से दिया है और दूसरी ओर सेस और इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर इसे वापस ले लिया है। उद्योग व व्यापार को बढ़ाने के लिए कोई योजना नहीं बनाई।
- प्रदीप कोहली, टैक्स कंसलटेंट।
फोटो-10
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बिना फोटो के:-
प्लाईवुड से सरकार को अच्छा रिवेन्यू, फिर भी कुछ न मिला
आकलन करें तो पता चलेगा कि यमुनानगर के प्लाईवुड उद्योग से टैक्स से सरकार को अच्छा खासा रिवेन्यू होता है। बावजूद इसके बजट में जिले को कुछ नहीं मिलता है। होना ये चाहिए कि प्लाईवुड कारोबार को बढ़ावा देने को इंडस्ट्री हब बने और किसानों को प्रोत्साहित किया जाए।
- अंकुर जैन, लॉयस क्लब सेक्रेट्री एवं प्लाइवुड व्यापारी।
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नोटबंदी से नुकसान हुए व्यापार को प्रोत्साहन नहीं
उद्यम क्षेत्र के लिए विभिन्न योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। नोटबंदी के चलते हानिग्रस्त व्यापार को कुछ भी प्रोत्साहन नहीं दिया गया। व्यापारियों को बैंक के ऋण पर ब्याज दर में कोई छूट नहीं दी गई। जबकि विदेशी निवेश वालों को अतिरिक्त सहयोग दिया जाता है।
- मोहित बंसल, युवा अध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा