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प्रवचन में दिया बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश
Updated Tue, 29 Aug 2017 12:12 AM IST
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प्रवचन में दिया बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश
अमर उजाला ब्यूरो
सरस्वती नगर। गांव ऊंचा चंदना के शिव मंदिर में चल रही नव दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा में चौथे दिन कथा व्यास देवी शशि प्रभा ने श्रद्धालुओं को दुखों से न हारने की हिदायत दी। कहा कि, इस संसार को केवल दुखों का घर जानकर रोते रहना या भाग निकलना कायरता है। न तर्क से काम चलता है न रोने से ओर न ही हाथ पर हाथ रखने से, बल्कि मन पर काबू पाकर कर्म करना चाहिए। देवी ने कहा कि हमारी संस्कृति में पूजा शब्द का अर्थ है आराधना या उपासना करना। प्राय: संसार के सभी धर्म परमात्मा के अस्तित्व को स्वीकारते हैं। किसी की पूजा करने का अर्थ है उसके गुणों को ग्रहण करना। इस अवसर देवी शशि प्रभा ने श्रद्धालुओं को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश भी दिया। प्रभा ने कहा किसी परिवार में पहली बेटी का जन्म होता है उसे तो जैसे तैसे स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन यदि दूसरी बार बेटी के जन्म पर प्राय: ऐसा नहीं होता। ऐसा आज भी समाज में कई परिवारों में होता है। उस कन्या को सम्मान नहीं दिया जाता जिसकी वो हकदार होती है। इस सोच को बदलना होगा। इस मौके पर डॉ. हरबंस सैनी, रामसरन सैनी, नरेश सैनी, रामकरन सैनी, फूल सिंह सैनी, सतपाल सैनी, मांगा राम सैनी, दलबीर सैनी, विनोद नंबरदार, गुलशन कुमार, सरवन कुमार, गुरदयाल गुप्ता, अमरनाथ, जगदीश सैनी, अमर सिंह, सतीश कुमार नम्बरदार, सोमनाथ सैनी, चरणजीत सत्यम, विजय सैनी, रूपचंद, तिलक राज, बलबीर सैनी, रामपाल, रमेश कुमार अमरजीत के अलावा बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु उपस्थित रहीं।
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अमर उजाला ब्यूरो
सरस्वती नगर। गांव ऊंचा चंदना के शिव मंदिर में चल रही नव दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा में चौथे दिन कथा व्यास देवी शशि प्रभा ने श्रद्धालुओं को दुखों से न हारने की हिदायत दी। कहा कि, इस संसार को केवल दुखों का घर जानकर रोते रहना या भाग निकलना कायरता है। न तर्क से काम चलता है न रोने से ओर न ही हाथ पर हाथ रखने से, बल्कि मन पर काबू पाकर कर्म करना चाहिए। देवी ने कहा कि हमारी संस्कृति में पूजा शब्द का अर्थ है आराधना या उपासना करना। प्राय: संसार के सभी धर्म परमात्मा के अस्तित्व को स्वीकारते हैं। किसी की पूजा करने का अर्थ है उसके गुणों को ग्रहण करना। इस अवसर देवी शशि प्रभा ने श्रद्धालुओं को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश भी दिया। प्रभा ने कहा किसी परिवार में पहली बेटी का जन्म होता है उसे तो जैसे तैसे स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन यदि दूसरी बार बेटी के जन्म पर प्राय: ऐसा नहीं होता। ऐसा आज भी समाज में कई परिवारों में होता है। उस कन्या को सम्मान नहीं दिया जाता जिसकी वो हकदार होती है। इस सोच को बदलना होगा। इस मौके पर डॉ. हरबंस सैनी, रामसरन सैनी, नरेश सैनी, रामकरन सैनी, फूल सिंह सैनी, सतपाल सैनी, मांगा राम सैनी, दलबीर सैनी, विनोद नंबरदार, गुलशन कुमार, सरवन कुमार, गुरदयाल गुप्ता, अमरनाथ, जगदीश सैनी, अमर सिंह, सतीश कुमार नम्बरदार, सोमनाथ सैनी, चरणजीत सत्यम, विजय सैनी, रूपचंद, तिलक राज, बलबीर सैनी, रामपाल, रमेश कुमार अमरजीत के अलावा बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु उपस्थित रहीं।