फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   शहीद रॉकी की पुण्य तिथि पर नहीं पहुंचा कोई सरकारी व प्रशासनिक अधिकारी, केवल परिवार ने दी श्रद्धांजलि

शहीद रॉकी की पुण्य तिथि पर नहीं पहुंचा कोई सरकारी व प्रशासनिक अधिकारी, केवल परिवार ने दी श्रद्धांजलि

Mon, 07 Aug 2017 12:44 AM IST
Updated Mon, 07 Aug 2017 12:44 AM IST
विज्ञापन
शहीद रॉकी की पुण्य तिथि पर नहीं पहुंचा कोई सरकारी व प्रशासनिक अधिकारी, केवल परिवार ने दी श्रद्धांजलि
शहीद रॉकी को बिसरा प्रशासन, पुण्यतिथि पर नहीं पहुंचा कोई अफसर
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। शहीद रॉकी को प्रशासन फिर बिसर गया। शहीद की पुण्यतिथि पर कोई भी अफसर श्रद्धांजलि तक देने नहीं पहुंचा, जो हमारी सोच पर सवाल ही खड़े कर रहा है। नतीजतन उपमंडल के गांव रामगढ़ का माजरा में शहीद रॉकी की दूसरी पुण्यतिथि पर परिजनों ने ही श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में सबसे पहले हवन किया गया। जिसमें शहीद रॉकी के माता-पिता सहित परिजनों ने आहुति डाली। रॉकी को श्रद्धांजलि देते हुए माता अंग्रेजो देवी, पिता प्रीत पाल, भाई रोहित व बहन नेहा की आंखों से आंसू छलक पड़े। गांव के रविदास ने भजन कीर्तन कर भंडारे का आयोजन किया।
यह है पूरी कहानी
उपमंडल बिलासपुर के गाव रामगढ़ का रहने वाला बीएसएफ के जवान रॉकी ने दो वर्ष पूर्व अपनी जान पर खेलकर जम्मू के ऊधमपुर में आतंकवादियों का सामना करते हुए अपने प्राणों की आहुति देकर अपनी चालीस से अधिक साथियों की जान बचाई थी। जिसकी शहादत पर पूरे देश का गर्व है। पांच अगस्त को रॉकी आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुआ था जबकि सात अगस्त को उसका पार्थिव शरीर पैतृक गांव रामगढ़ माजरा में पहुंचा था। जहां राजकीय सम्मान के साथ रॉकी का अंतिम संस्कार किया गया था। उस समय शहीद रॉकी के घर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, शिक्षा मंत्री राम विलास शर्मा, नायब सैनी, स्पीकर कंवर पाल, विधायक बलवंत सिंह, सांसद रत्न लाल कटारिया, दिग्विजय सिंह, अजय चौटाला, कुमारी शैलजा, अशोक तंवर, आतंकवाद विरोधी संगठन के अध्यक्ष एमएस बिट्ठा सहित अनेक लोगों ने श्रद्धांजलि दी थी।
विज्ञापन

कई वादे अभी नहीं हुए पूरे
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शहीद रॉकी के पिता प्रीतपाल सिंह व भाई रोहित आदि को सांत्वना देते हुए कहा था कि रॉकी देश की धरोहर है। उनकी शहादत को कभी भूलाया नहीं जाएगा। उन्होंने परिवार की मदद के लिए बीस लाख रुपये और परिवार के आश्रित को नौकरी देने की भी घोषणा की। ग्रामीणों की मांग पर उन्होंने गांव की सड़क का नाम शहीद रॉकी के नाम पर रखने गांव को आदर्श गांव का दर्जा देने, गांव में शहीद रॉकी का स्मारक बनवाने, उसके नाम पर स्टेडियम बनवाने, रॉकी के नाम पर शिक्षण संस्थान का नाम रखने, गांव के मुख्य सड़क पर स्वागत द्वार बनवाने आदि का आश्वासन दिया था, लेकिन आज दो वर्ष बीत जाने के बाद भी केवल प्रदेश सरकार की ओर से परिवार के आश्रित को नौकरी और आर्थिक सहायता देकर अपने कार्य की इतिश्री कर ली गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

सामाजिक संगठन भी रॉकी को भूले
शहीद राकी के पिता प्रीत पाल ने कहा कि राकी की शहादत के दूसरे वर्ष पूरे होने पर आज गांव में श्रद्धांजलि कार्यक्रम में जिले का कोई भी प्रशासनिक अधिकारी, प्रदेश सरकार का कोई भी विधायक, नेता और मंत्री नहीं पहुंचा। इससे लोगों में रोष है। भाई रोहित ने बताया कि रॉकी की शहादत पर पूरे देश और प्रदेश के बड़े नेता-सामाजिक कार्यकर्ता सांत्वना देने पहुंचे थे लेकिन सब जल्द ही भूल गए।

बहन नेहा को भी जल्द मिलेगी बीएसएफ में नौकरी
जिला यमुनानगर में पांच अगस्त को एमएलएन कालेज में शहीद राकी की शहादत पर डाक्युमेंट्री पर एक फिल्म दिखाई गई। कार्यक्रम में बीएसएफ के डीआईजी बिलाल खान सहित अनेक कर्मचारी मौजूद रहे। शहीद राकी के परिजनों से बात करने पर बिलाल खान ने परिजनों का सांत्वना देते हुए कहा कि शहीद राकी की बहन नेहा को जल्द ही बीएसएफ में नौकरी दी जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed