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149 साल बाद मकर संक्रांति पर दुर्लभ संयोग

Tue, 07 Jan 2014 08:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/जगाधरी
अमर उजाला ब्यूरो/जगाधरी Updated Tue, 07 Jan 2014 08:59 PM IST
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149 years later, on a rare combination of Makar Sankranti
मकर संक्रांति महापर्व पर इस बार दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो ऐसा संयोग 149 साल पहले 1865 में बना था। पंडितों का कहना है कि विधिवत रूप से सूर्य की पूजा-अर्चना करने और भिक्षुकों को दान देने से विशेष फल की प्राप्ति होगी।
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पंडित मेघनाथ शर्मा ने बताया कि सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में परिवर्तन प्राय: संक्रांति कहलाता है। वर्तमान में सूर्य धनु राशि में गोचरस्थ है। 14 जनवरी को दोपहर एक बजकर 12 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। यह प्रवेश काल मकर संक्रांति कहलाता है।
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उन्होंने बताया कि मकर राशि का स्वामी शनि है। जो वर्तमान में उच्चगत होकर राहु के साथ गोचरस्थ है। शास्त्रीय मान्यता के मुताबिक सूर्य की मकर संक्रांति पर जब शनि उच्च अवस्था में हो, तो यह विशेष फलदायी और पुण्यदायी मानी जाती है।
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उत्तरायण का यह पक्षकाल धार्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि मकर राशि का स्वामी उच्चगत होने से यह स्थिति बनी है। शनि और राहु तुला राशि में युतिकृत होकर गोचरस्थ हैं।

शास्त्रीय मान्यता के मुताबिक तुला में शनि उच्च माने जाते हैं और राहु मित्र कारक है। सामान्यत: शनि के एक राशि से दूसरी राशि में परिभ्रमण काल ढाई वर्ष और राहु का 18 माह का रहता है। ऐसा बहुत कम होता है कि दोनों ग्रहों की उच्चगत या मित्रगत युति की साक्षी में मकर संक्रांति पर्व मनेगा।

मकर में प्रवेश करते ही शुरू हो जाएगी संक्रांति
सूर्य के मकर में प्रवेश करते ही पर्वकाल शुरू हो जाएगा। पौराणिक मान्यता के मुताबिक काल के छह घंटे पर्यंत पुण्यकाल माना जाता है। इस दृष्टि से मकर संक्रांति महापर्व इसी बीच मनाया जाएगा।

श्रद्धालु पूर्व दिशा में सूर्य का पूजन करें। सूर्य को ताम्र कलश में जल, गुलाब जल, चंदन, पुष्प, अक्षत द्रव्यों द्वारा वैदिक मंत्रों से अर्घ्य प्रदान करें। पौराणिक मान्यता अनुसार सिर के ऊपर कलश को क्रमानुगत बनाते हुए सूर्य को जल चढ़ाए।

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक जिन जातकों पर शनि की साढे़ साती या ढैया चल रही हैं, वे मकर संक्रांति पर्व काल पर सूर्य व शनि की संयुक्त आराधना करें। यह विशेष दिवस काल है, जिसमें पिता-पुत्र की एक साथ पूजा की जाती है।

14 को ही मनाई जाएगी मकर संक्रांति
पंडित योगेश शर्मा ने बताया कि 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी। सूर्य के भ्रमण पथ पर दो बिंदु आते हैं। जहां से सूर्य के परिभ्रमण पथ में परिवर्तन होता है। एक है कर्क संक्रांति और दूसरी मकर संक्रांति।


उन्होंने बताया कि नवग्रहों में शनि को ऊर्जा, तरक्की, उन्नति, अचानक धन लाभ प्राप्ति एवं व्यावसयिक सफलता देने का कारक ग्रह माना गया है।

संक्रांति पर सूर्य की साक्षी में शनि महाराज पर संकल्पित होकर के तिल्ली के तेल से पुरुष सुक्त पाठ द्वारा शनि का अभिषेक करें। इसके बाद काली तिल्ली, काला उड़द, बांस की टोकरी एवं भिक्षुकों को भोजन सामग्री प्रदान करें। यह फलदायी होगा।

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