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युवाओं को मुफ्त की नहीं, मेहनत की रोटी खाने में विश्वास

Mon, 18 Jul 2022 12:25 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 18 Jul 2022 12:25 AM IST
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Youth believe in eating hard-earned bread, not free
मुफ्त की रेवड़ी कितनी घातक विषय पर अपने विचार रखते युवा। संवाद - फोटो : Sonipat
आजकल देश में मुफ्त की रेवड़ी बांटकर वोट बटोरने की संस्कृति लाने की भरसक कोशिश की जा रही है। जो देश के विकास के लिए बेहद घातक है। देश के युवा भी मानते हैं कि इससे सावधान रहने की जरूरत है। वोट बैंक मजबूत करने के लिए सरकारें धड़ल्ले से मुफ्त की योजनाओं की घोषणा कर रही हैं। इससे आज की पीढ़ी का बहुत नुकसान हो सकता है। युवाओं का मानना है कि उनका वर्तमान बिगड़ जाएगा और आने वाला कल अंधेरे में सिमट जाएगा। मुफ्त की घोषणाएं देश व युवाओं पर क्या असर डालेंगी, इस विषय को लेकर अमर उजाला की टीम ने युवाओं से संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें युवाओं ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
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युवाओं ने कहा कि वे रोजगार पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उन्हें मुफ्त का कुछ नहीं चाहिए। युवा केवल रोजगार चाहते हैं। सरकार रोजगार के अवसरों का सृजन करे, ताकि युवा अपने पैरों पर खड़ा हो सके। युवाओं ने एक स्वर में कहा कि वर्तमान में मुफ्त की योजनाओं की कोई आवश्यकता नहीं है। मुफ्त की योजनाओं की घोषणाओं का बंद किया जाना चाहिए।
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बोले युवा
राजनीतिक पार्टियां वोट के चक्कर में बिजली-पानी व अन्य सुविधाएं मुफ्त देने का वादा करती हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद इसकी प्रतिपूर्ति भी जनता की जेब से ही होती है। इसलिए हम मुफ्त के चक्कर में पड़कर भविष्य खराब नहीं कर सकते। सरकार रोजगार का सृजन करे, ताकि युवा अपने पैरों पर खड़ा हो सके। -मंजीत खत्री, प्रशिक्षक
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राजनीतिक दलों को सिर्फ अपने वोट बैंक बनाने से मतलब होता है। सत्ता में आने के लिए वे लोक लुभावने वादे करते हैं, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई कुछ और ही होती है। हमें कुछ भी मुफ्त नहीं चाहिए, बस हमारी मेहनत का फल प्राप्त हो जाए। जितनी शिद्दत से हम मेहनत कर रहे हैं अगर उसका फल नहीं मिला तो सड़क पर आ जाएंगे। अमन, मयूर विहार
देश में मुफ्त की रेवड़ी बांटकर वोट बटोरने की कोशिशें की जा रही है। जो देश के विकास के लिए बेहद घातक हैं। मैं ऐसी राजनीति का विरोध करता हूं, जो देश के विकास में ही बाधक बनती हो। सत्ता में आने के लिए देश के विकास को दांव पर लगाने वालों को सत्ता से दूर ही रखा जा जाए तो ज्यादा बेहतर है। -विशाल, पुलिस लाइन
मुफ्त की योजनाएं हमेशा विकास में बाधक होती हैं। इसलिए हमें इस प्रकार की कोई भी योजना नहीं चाहिए जो देश के विकास में ही बाधा बनने का कार्य करती हों। सत्ता के लालच में जो लोग इस प्रकार का प्रलोभन दे रहे हैं, हमें उनसे बचकर रहना चाहिए। आज मुफ्त का खाया तो हमारा कल अंधकार में चला जाएगा। -सौरभ, गोहाना रोड
जो लोग मेहनत से दूर भागते हैं, उन्हीं लोगों को मुफ्त का पाने की लालसा होती है। ऐसे लोग ही स्वहित के लिए देश के विकास में रोड़ा बनते हैं। इन्हें यह आभास नहीं होता कि आज जो मुफ्त में मिल रहा है, उसका भार में उनकी ही जेब पर पड़ रहा है। ऐसे में युवाओं को जागरूक होने की भी जरूरत है, ताकि इस प्रकार की संस्कृति पनपने से रोका जा सके। -मुकुल, मयूर विहार
मैं मुफ्त की रेवड़ी खाने में बिल्कुल विश्वास नहीं रखता। अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए निरंतर कड़ा अभ्यास कर रहा हूं। हमें पता है कि कुछ राजनीतिक पार्टियां वोट बैंक बनाने के चक्कर में इस प्रकार के प्रलोभन देती हैं। वे आज जो हमें मुफ्त देंगी, उसका भार कल हमारी जेब व देश के विकास पर पड़ेगी। ऐसी पार्टियों से दूरी बनाकर ही देश के विकास में अपना योगदान दे सकते हैं।
अंकुश, गोहाना रोड
आज का युवा ही देश का भविष्य है। इसलिए युवाओं को सही मार्ग पर लाने और उसे अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए सरकार का सहयोग अपेक्षित है। सरकार अगर रोजगार के अवसर प्रदान करेगी तो युवा वर्ग मुफ्त की रेवड़ी की तरफ आकर्षिक नहीं होगा। इससे जहां युवा पथभ्रष्ट होने से बचेगा, वहीं देश के विकास में भी बाधा नहीं आएगी।
रविकांत, पुलिस लाइन
यह जरूरी नहीं है कि हर युवा को सरकारी नौकरी मिले। इसलिए सरकार को चाहिए कि वे स्कूली स्तर से ही युवाओं के कौशल विकास के लिए पाठ्यक्रम की शुरुआत करें। इससे युवा पढ़ाई पूरी करने के साथ ही खुद के लिए स्वरोजगार स्थापित कर सकेगा और परिवार का सहारा बन सकेगा। जब तक युवा बेरोजगार होगा, तब तक उसके पथभ्रष्ट होने की संभावनाएं प्रबल रहेंगी। -जितेन, अशोक विहार
मुफ्त की रेवड़ी कितनी घातक हैं इसका युवाओं को ज्ञान हैं। यही कारण है कि हम देश के विकास और अपने लिए अलग मुकाम बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। आज अगर मुफ्त की रेवड़ी खाने की आदत पड़ गई तो भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। इसलिए इस विषय की तरफ सभी को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। -अमित, जटवाड़ा
युवा अपने पैरों पर खड़े होने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। हमें मुफ्त कुछ नहीं चाहिए, बस जिसके लिए मेहनत कर रहे हैं, उसका फल मिल जाए। सरकार को चाहिए कि युवाओं के लिए रोजगार सृजित करे, ताकि युवा मुफ्त की रेवड़ी की तरफ आकर्षित ही ना हो। जब रोजगार ही नहीं होंगे, तो युवाओं का भटकना संभव है। -हम्मी शर्मा, मयूर विहार
पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी पाने के लिए लंबा संघर्ष किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। उसके बाद खुद का कारोबार शुरू किया। अब उसी के सहारे परिवार का पालन पोषण कर रहा हूं। सरकार अगर युवाओं के लिए रोजगार सृजित नहीं करेगी तो युवा मुफ्त की रेवड़ी की तरफ आकर्षिक होंगे ही। मुफ्तखोरी को खत्म करना है तो युवाओं को जागरूक करने के साथ उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे। -सुमित दहिया, कारोबारी
जब भी चुनाव नजदीक आते हैं तो राजनीतिक पार्टियां तरह-तरह के प्रलोभन देती हैं। बिजली-पानी व अन्य सुविधाएं निशुल्क देने का वादा भी करती हैं। बड़ी संख्या में लोग उनके बहकावे में आ जाते हैं। उन्हें यह पता नहीं होता कि आज जो चीज वे आपको मुफ्त दे रहे हैं, उसका भार भी उन्हीं की जेब पर पड़ेगा। इसलिए हमें युवाओं व अन्य लोगों को इसके प्रति जागरूक करना है, ताकि देश के विकास में बाधा बनने वाली इस प्रकार की संस्कृति को रोका जा सके। -सरिता, योगा वालंटियर
युवा देश का भविष्य हैं। उसे हर कदम सोच समझकर रखना होगा। अगर अभी से मुफ्त की रेवड़ी खाने की आदत पड़ गई तो वह आगे नहीं बढ़ पाएगा। इसलिए युवाओं को अपनी अलग पहचान बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। सरकारी नौकरी ही नहीं युवा स्वरोजगार कर भी अपने लिए अलग मुकाम हासिल कर सकता है। स्वरोजगार कर वह अन्य युवाओं को भी रोजगार दे सकता है साथ ही देश के विकास में भी अपना योगदान दे सकता है। नीतू, अधिवक्ता
वर्तमान समय में देश में मुफ्त की रेवड़ी बांटकर वोट बटोरने का कल्चर लाने की भरसक कोशिश की जा रही है। यह देश के विकास के लिए घातक है। युवा देश का भविष्य हैं, उन्हें इस प्रकार के कल्चर से खुद को बचाना है। ताकि अपने जीवन को अंधकारमय होने से बचा सकें। इसके लिए लोगों को भी जागरूक होना होगा। सभी को मेहनत के फल का मतलब समझना होगा। मेहनत से मिलने वाली सफलता का स्वाद ही अलग होता है।
अंकित अत्री, चिकित्सक सेठी अस्पताल, खरखौदा
हमें यह बात समझनी होगी कि आज जो चीज हम मुफ्त लेने वाले हैं, कल को उसका भार भी देश पर ही पड़ेगा। जिससे देेश का विकास प्रभावित होगा। अगर देश का विकास बाधित होगा तो नुकसान भी हमें और हमारी आने वाली पीढ़ियों को ही भुगतना होगा। आज मुफ्त की योजनाओं की कोई जरूरत नहीं है। इसलिए युवाओं को इस प्रकार के प्रलोभनों से दूर रहकर कड़ी मेहनत से अपने पैरों पर खड़ा होना होगा। तभी देश के विकास मेें योगदान दे सकेंगे। -माही मलिक, अधिवक्ता

युवाओं को इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि आज अगर उन्हें मुफ्त की रेवड़ी खाने की आदत पड़ गई तो वे भविष्य में कामयाबी के पथ पर अग्रसर नहीं हो सकेंगे। मुफ्त की घोषणा करना भी बंद होना चाहिए। युवा मेहनत करे और खुद के लिए अलग मुकाम बनाए, तभी उनका भविष्य उज्ज्वल होगा। मुफ्त की रेवड़ी कितनी घातक सिद्ध हो सकती है, इस पर गंभीरता से विचार करें और अपने कल को अंधकारमय होने से बचाएं। -गौरव गर्ग, शिक्षक
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