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यमुना में पानी का 9 साल का रिकार्ड टूटा, 200 एकड़ फसल डूबी, टोकी व गढ़ी असदपुर गांव खाली कराए
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टोकी गांव को खाली करने के लिए बुग्गी में सामान व बच्चों को लेकर जाते ग्रामीण
- फोटो : Sonipat
सोनीपत। हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया 8.28 लाख क्यूसेक पानी सोनीपत में पहुंच गया है और इस कारण स्थिति बिगड़ती दिख रही है। जहां सोमवार शाम तक यमुना के तटबंध के अंदर लगभग 200 एकड़ की फसल पानी में डूब गई और यमुना के तटबंधों से मिलकर पानी चलने से कई जगहों पर मिट्टी का कटाव भी शुरू हो गया है। जिसको देखते हुए प्रशासन ने टोकी व गढ़ी असदपुर गांव को खाली करा लिया है और उनको गांव के सुरक्षित हिस्से पर रखा गया है। वहीं यमुना में पानी छोड़े जाने का 9 साल का रिकार्ड टूट गया है, क्योंकि पिछली बार वर्ष 2010 में 7.44 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने टोकी गांव में कैंप शुरू कर दिया है तो डीसी ने अधिकारियों के साथ यमुना किनारे के गांवों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने यमुना में छोड़े गए पानी को सोनीपत से आगे नहीं निकलने तक हाईअलर्ट जारी रखने की बात कही है।
यमुना में पिछले कई दिनों से हथिनीकुंड बैराज से लगातार पानी छोड़ा जा रहा था। लेकिन वह पानी एक लाख क्यूसेक से कम होने के कारण यमुना किनारे बसे गांवों के लिए परेशानी पैदा करने वाला नहीं था। हथिनीकुंड बैराज से शनिवार रात से रविवार दोपहर तक लगभग 8.28 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जो पिछले 9 साल में छोड़े गए पानी में सबसे ज्यादा है। यह पानी सोमवार देर शाम को सोनीपत में पहुंच गया, जिससे यमुना के अंदर की लगभग 200 एकड़ फसल डूब गई। इसके साथ ही हरियाणा-यूपी पुल के पास पानी सोमवार शाम तक 215 मीटर के निशान से ऊपर चल रहा था और यह मंगलवार सुबह को काफी ऊपर पहुंच जाएगा। जिससे यमुना किनारे के लगभग 15 गांवों में बाढ़ का खतरा है। जिनमें गढ़ी असदपुर, मनौली, टोकी, बड़ौली, बेगा, पीरगढ़ी, गढ़ी बिलंदा, ग्यासपुर, पबनेरा, चंदौली, टिकौला आदि शामिल हैं। इसको देखते हुए ही डीसी डॉ. अंशज सिंह, एसडीएम विजय सिंह, डीआरओ ब्रह्मप्रकाश अहलावत समेत अन्य अधिकारियों ने यमुना किनारे के गांवों में दौरा किया और वहां लोगों से बातचीत की गई। वहां लोगों से बताया गया कि वह वह यमुना के पास जाने से बचें, क्योंकि यमुना का जलस्तर काफी ऊपर चल रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जबतक यह पानी सोनीपत से आगे नहीं निकल जाता है, उस समय तक स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। क्योंकि पानी ज्यादा होने के कारण बाढ़ का खतरा बना हुआ है। इसके साथ ही अभी तक जहां यमुना के अंदर ही फसल डूबी है, वहीं पानी तटबंध के ऊपर से उतरकर बाहर के खेतों में आ सकता है। उससे भी सैकड़ों एकड़ फसल डूबने का खतरा बना हुआ है।
टोकी और गढ़ी असदपुर गांव खाली कराए
जिस तरह से यमुना में आठ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है तो उससे टोकी व गढ़ी असदपुर गांव के लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। इस कारण ही सोमवार को डीसी डॉ. अंशज सिंह अपने साथ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को लेकर गांव में पहुंचे। जहां लोगों को बताया गया कि यमुना में पानी काफी उफान पर आया हुआ है और उनके लिए खतरा पैदा हो सकता है। इस कारण ही उनको गांव खाली करके सुरक्षित स्थान पर रहना चाहिए। ग्रामीणों ने शुरू में गांव खाली नहीं करने के लिए कहा, लेकिन उनको समझाया गया तो वह तैयार हो गए। जिसके बाद टोकी व गढ़ी असदपुर गांवों को खाली कराया गया। इसके अलावा बिजली के उपकरण व कनेक्शन भी हटवा दिए गए हैं।
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200 एकड़ फसल डूबी, पानी बाहर आते ही बड़ा नुकसान
यमुना में उफान की वजह से तटबंध के अंदर की लगभग 200 एकड़ फसल अभी तक डूब चुकी है। इसके साथ ही पानी बाहर आता है तो आसपास के खेतों में फसल का बड़ा नुकसान होने का खतरा है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि कई जगह पर ठोकरें नहीं होने के कारण यमुना का पानी खेतों में चला जाता है और उससे काफी फसल बर्बाद हो जाती हैं। पिछले साल भी इस तरह ही फसल बर्बाद हुई थी और इस बार भी पानी तटबंध तक पहुंच गया है और वह बढ़ते ही खेतों में पहुंच जाएगा।
डीसी ने गांवों में पहुंचकर की यमुना पर नहीं जाने की अपील
प्रशासन ने लोगों के यमुना किनारे जाने पर रोक लगा दी है। प्रशासन का मानना है कि यमुना में पानी के तेज बहाव के कारण किनारों से मिट्टी का कटाव होगा और ऐसे में कोई यमुना के किनारे वहां देखने भी जाता है तो मिट्टी गिरने से हादसा हो सकता है। डीसी डॉ. अंशज सिंह ने इसके लिए ही सोमवार को कई गांवों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से बात करके यमुना की ओर नहीं जाने की सलाह दी गई है। इसके लिए यमुना के बांधों पर कर्मियों की ड्यूटी भी लगा दी गई है, जिससे लोगों को यमुना किनारे जाने से रोका जा सके। इसके साथ ही जिन गांवों में ज्यादा खतरा है, वह प्रशासनिक अधिकारी कैंप करने लगे हैं।
एक लाख कट्टों को मिट्टी से भरकर रखवाया
सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता राजीव बत्रा ने बताया कि नदियों में जल स्तर लगातार बढ़ा है जो पिछले सालों का रिकार्ड तोड़ रहा है। इसलिए किसी भी आपात स्थिति से निपटने को विभाग तैयार है। सिंचाई विभाग ने यमुना में बढ़ते पानी को देखते हुए तैयारियां पूरी की हुई है। सिंचाई विभाग ने एक लाख मिट्टी के कट्टे भर कर रिजर्व में रखे है, जिससे आपात स्थिति में इनका प्रयोग किया जा सके। इसके अलावा किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हो, उसके लिए सभी अधिकारी घाटों पर नजर रख रहे हैं।
भाजपा नेताओं ने गांवों का दौरा किया
भाजपा के व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य मोहनलाल बडौली ने यमुना नदी में बढ़ते जलस्तर को लेकर टिकोला गांव में यमुना बांध पर निरीक्षण किया, जहां लोगों से बातचीत की गई। इसके बाद वह टिकौला, जैनपुर, मिमारपुर, मेहंदीपुर, बडौली में पहुंचे। वहां भी लोगों से बातचीत की गई और उनको बताया कि प्रशासन की ओर से सभी प्रबंध किए गए हैं। किसी को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। इसके अलावा मार्केटिंग बोर्ड की चेयरपर्सन कृष्णा गहलावत मनौली टोकी समेत अन्य कई गांवों में पहुंची और लोगों से बातचीत कर उनको हर तरह से मदद की बात कही गई।
हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी यहां पहुंचने के कारण यमुना का जलस्तर काफी बढ़ गया है। इसको लेकर यमुना किनारे के गांवों का दौरा किया गया और टोकी व गढ़ी असदपुर गांव को खाली करा दिया गया है। यमुना किनारों पर टीमों को लगाया गया है तो कई गांवों में अधिकारी कैंप कर रहे है। हर जगह ठीकरी पहरा लगाने के लिए कहा गया है और ग्रामीणों को सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। प्रशासन की ओर से गांवों में पूरा ध्यान रखा जा रहा है। डॉ. अंशज सिंह, डीसी
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यमुना में पिछले कई दिनों से हथिनीकुंड बैराज से लगातार पानी छोड़ा जा रहा था। लेकिन वह पानी एक लाख क्यूसेक से कम होने के कारण यमुना किनारे बसे गांवों के लिए परेशानी पैदा करने वाला नहीं था। हथिनीकुंड बैराज से शनिवार रात से रविवार दोपहर तक लगभग 8.28 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जो पिछले 9 साल में छोड़े गए पानी में सबसे ज्यादा है। यह पानी सोमवार देर शाम को सोनीपत में पहुंच गया, जिससे यमुना के अंदर की लगभग 200 एकड़ फसल डूब गई। इसके साथ ही हरियाणा-यूपी पुल के पास पानी सोमवार शाम तक 215 मीटर के निशान से ऊपर चल रहा था और यह मंगलवार सुबह को काफी ऊपर पहुंच जाएगा। जिससे यमुना किनारे के लगभग 15 गांवों में बाढ़ का खतरा है। जिनमें गढ़ी असदपुर, मनौली, टोकी, बड़ौली, बेगा, पीरगढ़ी, गढ़ी बिलंदा, ग्यासपुर, पबनेरा, चंदौली, टिकौला आदि शामिल हैं। इसको देखते हुए ही डीसी डॉ. अंशज सिंह, एसडीएम विजय सिंह, डीआरओ ब्रह्मप्रकाश अहलावत समेत अन्य अधिकारियों ने यमुना किनारे के गांवों में दौरा किया और वहां लोगों से बातचीत की गई। वहां लोगों से बताया गया कि वह वह यमुना के पास जाने से बचें, क्योंकि यमुना का जलस्तर काफी ऊपर चल रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जबतक यह पानी सोनीपत से आगे नहीं निकल जाता है, उस समय तक स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। क्योंकि पानी ज्यादा होने के कारण बाढ़ का खतरा बना हुआ है। इसके साथ ही अभी तक जहां यमुना के अंदर ही फसल डूबी है, वहीं पानी तटबंध के ऊपर से उतरकर बाहर के खेतों में आ सकता है। उससे भी सैकड़ों एकड़ फसल डूबने का खतरा बना हुआ है।
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टोकी और गढ़ी असदपुर गांव खाली कराए
जिस तरह से यमुना में आठ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है तो उससे टोकी व गढ़ी असदपुर गांव के लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। इस कारण ही सोमवार को डीसी डॉ. अंशज सिंह अपने साथ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को लेकर गांव में पहुंचे। जहां लोगों को बताया गया कि यमुना में पानी काफी उफान पर आया हुआ है और उनके लिए खतरा पैदा हो सकता है। इस कारण ही उनको गांव खाली करके सुरक्षित स्थान पर रहना चाहिए। ग्रामीणों ने शुरू में गांव खाली नहीं करने के लिए कहा, लेकिन उनको समझाया गया तो वह तैयार हो गए। जिसके बाद टोकी व गढ़ी असदपुर गांवों को खाली कराया गया। इसके अलावा बिजली के उपकरण व कनेक्शन भी हटवा दिए गए हैं।
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200 एकड़ फसल डूबी, पानी बाहर आते ही बड़ा नुकसान
यमुना में उफान की वजह से तटबंध के अंदर की लगभग 200 एकड़ फसल अभी तक डूब चुकी है। इसके साथ ही पानी बाहर आता है तो आसपास के खेतों में फसल का बड़ा नुकसान होने का खतरा है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि कई जगह पर ठोकरें नहीं होने के कारण यमुना का पानी खेतों में चला जाता है और उससे काफी फसल बर्बाद हो जाती हैं। पिछले साल भी इस तरह ही फसल बर्बाद हुई थी और इस बार भी पानी तटबंध तक पहुंच गया है और वह बढ़ते ही खेतों में पहुंच जाएगा।
डीसी ने गांवों में पहुंचकर की यमुना पर नहीं जाने की अपील
प्रशासन ने लोगों के यमुना किनारे जाने पर रोक लगा दी है। प्रशासन का मानना है कि यमुना में पानी के तेज बहाव के कारण किनारों से मिट्टी का कटाव होगा और ऐसे में कोई यमुना के किनारे वहां देखने भी जाता है तो मिट्टी गिरने से हादसा हो सकता है। डीसी डॉ. अंशज सिंह ने इसके लिए ही सोमवार को कई गांवों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से बात करके यमुना की ओर नहीं जाने की सलाह दी गई है। इसके लिए यमुना के बांधों पर कर्मियों की ड्यूटी भी लगा दी गई है, जिससे लोगों को यमुना किनारे जाने से रोका जा सके। इसके साथ ही जिन गांवों में ज्यादा खतरा है, वह प्रशासनिक अधिकारी कैंप करने लगे हैं।
एक लाख कट्टों को मिट्टी से भरकर रखवाया
सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता राजीव बत्रा ने बताया कि नदियों में जल स्तर लगातार बढ़ा है जो पिछले सालों का रिकार्ड तोड़ रहा है। इसलिए किसी भी आपात स्थिति से निपटने को विभाग तैयार है। सिंचाई विभाग ने यमुना में बढ़ते पानी को देखते हुए तैयारियां पूरी की हुई है। सिंचाई विभाग ने एक लाख मिट्टी के कट्टे भर कर रिजर्व में रखे है, जिससे आपात स्थिति में इनका प्रयोग किया जा सके। इसके अलावा किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हो, उसके लिए सभी अधिकारी घाटों पर नजर रख रहे हैं।
भाजपा नेताओं ने गांवों का दौरा किया
भाजपा के व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य मोहनलाल बडौली ने यमुना नदी में बढ़ते जलस्तर को लेकर टिकोला गांव में यमुना बांध पर निरीक्षण किया, जहां लोगों से बातचीत की गई। इसके बाद वह टिकौला, जैनपुर, मिमारपुर, मेहंदीपुर, बडौली में पहुंचे। वहां भी लोगों से बातचीत की गई और उनको बताया कि प्रशासन की ओर से सभी प्रबंध किए गए हैं। किसी को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। इसके अलावा मार्केटिंग बोर्ड की चेयरपर्सन कृष्णा गहलावत मनौली टोकी समेत अन्य कई गांवों में पहुंची और लोगों से बातचीत कर उनको हर तरह से मदद की बात कही गई।
हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी यहां पहुंचने के कारण यमुना का जलस्तर काफी बढ़ गया है। इसको लेकर यमुना किनारे के गांवों का दौरा किया गया और टोकी व गढ़ी असदपुर गांव को खाली करा दिया गया है। यमुना किनारों पर टीमों को लगाया गया है तो कई गांवों में अधिकारी कैंप कर रहे है। हर जगह ठीकरी पहरा लगाने के लिए कहा गया है और ग्रामीणों को सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। प्रशासन की ओर से गांवों में पूरा ध्यान रखा जा रहा है। डॉ. अंशज सिंह, डीसी

यमुना तटबंध के अंदर गढ़मिर्कपुर के पास डूबी फसल- फोटो : Sonipat

यमुना के अंदर किसान की बनाई गई झोपड़ी डूबी व ट्यूब के सहारे बाहर आता युवक- फोटो : Sonipat