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ओलंपिक का टिकट पक्का करने के लिए बेलारूस में होगी महिला पहलवानों की प्रैक्टिस
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ओलंपिक का टिकट पक्का करने के लिए महिला पहलवानों की प्रैक्टिस बेलारूस में कराई जाएगी। वहां की पहलवानों के साथ बेलारूस अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भिड़ेंगी तो उसके बाद प्रैक्टिस भी करेंगी। क्योंकि वर्ल्ड चैंपियनशिप से टोक्यो ओलंपिक का टिकट पक्का होगा और वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले बेलारूस में प्रतियोगिता खेलने के साथ ही प्रैक्टिस करना काफी अहम माना जा रहा है। वहीं वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए पहलवान हर रोज पांच घंटे प्रैक्टिस कर रही हैं तो उनको फितले के साथ ही लैग अटैक व लैग डिफेंस पर ज्यादा फोकस कराया जा रहा है। इनके साथ ही भारंदाज के गुर भी सिखाए जा रहे हैं। जिससे वर्ल्ड चैंपियनशिप में इन दांव का इस्तेमाल करके ओलंपिक का कोटा पहले ही पक्का किया जा सके।
टोक्यो में 2020 में होने वाले ओलंपिक की राह वर्ल्ड चैंपियनशिप से शुरू हो गई है जो कजाकिस्तान के नूर सुल्तान में 14 से 22 सितंबर तक खेली जाएगी। वर्ल्ड चैंपियनशिप से हर भार वर्ग में पहलवानों को ओलंपिक का टिकट मिल जाएगा और उसके बाद होने वाली क्वालीफायर चैंपियनशिप के लिए पसीना नहीं बहाना पड़ेगा। क्योंकि वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद ओलंपिक के टिकट की राह भी कड़ी हो जाएगी और उनमें हर भार वर्ग के केवल एक या दो पहलवानों तक ही ओलंपिक का टिकट दिया जाएगा। इसलिए ही सभी पहलवानों की नजर वर्ल्ड चैंपियनशिप से ओलंपिक का टिकट पक्का करने पर टिकी है। इसके लिए ही महिला पहलवानों को विशेष प्रैक्टिस कराई जा रही है और इसके लिए ही उनको 9 अगस्त को बेलारूस भेजा जाएगा। जहां वह बेलारूस अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के साथ ही प्रैक्टिस भी करेंगी। इसके अलावा महिला पहलवानों को कुछ ऐसे दांव कैंप में प्रैक्टिस के दौरान सिखाए जा रहे हैं, जिनमें वह पहले कमजोर होने के कारण पिछड़ रही थी। लेकिन अब उनको फितले, लैग अटैक, लैग डिफेंस, भारंदाज पर ज्यादा फोकस कराया जा रहा है।
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इसलिए अहम होते हैं यह दांव
फितले दांव में पहलवान जब जमीन पर रहते हैं तो पहलवान का पैर पकड़कर घुमाया जाता है। जिससे वह मैट के बाहर निकल जाता है और इससे विपक्षी पहलवान को प्वाइंट मिल जाता है। भारंदाज दांव भी इस समय कुश्ती में काफी अहम है, जिसमें विपक्षी पहलवान को कमर से पकड़कर पूरा भार अपने ऊपर लेकर घुमाया जाता है और उससे अंक जरूर मिलता है। लैग अटैक में सामने वाला पहलवान फुर्ती के साथ दोनों पैरों को अपने हाथों से पकड़कर विपक्षी पहलवान को नीचे गिराने की कोशिश करता है। यह दांव अचानक व तेज फुर्ती के साथ लगाया गया हो तो विपक्षी पहलवान को आसानी से चित किया जा सकता है। वहीं लैग डिफेंस में जब विपक्षी पहलवान लैग अटैक करता है तो उससे किस तरह से बचा जा सकता, जिससे पहलवान चित नहीं हो। इस बारे में महिला पहलवानों को बारीकी से बताया जा रहा है।
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महिला पहलवान अब बेलारूस में खेलने के लिए जाएंगी। जिससे विदेशी पहलवानों के साथ खेलकर वह अपनी कमियां दूर कर सके और वर्ल्ड चैंपियनशिप में ओलंपिक कोटा हासिल किया जा सकें। हमें उम्मीद है कि सभी छह भार वर्ग में वर्ल्ड चैंपियनशिप से ओलंपिक का कोटा हासिल कर लिया जाएगा।
-कुलदीप मलिक, चीफ कोच भारतीय महिला कुश्ती
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टोक्यो में 2020 में होने वाले ओलंपिक की राह वर्ल्ड चैंपियनशिप से शुरू हो गई है जो कजाकिस्तान के नूर सुल्तान में 14 से 22 सितंबर तक खेली जाएगी। वर्ल्ड चैंपियनशिप से हर भार वर्ग में पहलवानों को ओलंपिक का टिकट मिल जाएगा और उसके बाद होने वाली क्वालीफायर चैंपियनशिप के लिए पसीना नहीं बहाना पड़ेगा। क्योंकि वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद ओलंपिक के टिकट की राह भी कड़ी हो जाएगी और उनमें हर भार वर्ग के केवल एक या दो पहलवानों तक ही ओलंपिक का टिकट दिया जाएगा। इसलिए ही सभी पहलवानों की नजर वर्ल्ड चैंपियनशिप से ओलंपिक का टिकट पक्का करने पर टिकी है। इसके लिए ही महिला पहलवानों को विशेष प्रैक्टिस कराई जा रही है और इसके लिए ही उनको 9 अगस्त को बेलारूस भेजा जाएगा। जहां वह बेलारूस अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के साथ ही प्रैक्टिस भी करेंगी। इसके अलावा महिला पहलवानों को कुछ ऐसे दांव कैंप में प्रैक्टिस के दौरान सिखाए जा रहे हैं, जिनमें वह पहले कमजोर होने के कारण पिछड़ रही थी। लेकिन अब उनको फितले, लैग अटैक, लैग डिफेंस, भारंदाज पर ज्यादा फोकस कराया जा रहा है।
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इसलिए अहम होते हैं यह दांव
फितले दांव में पहलवान जब जमीन पर रहते हैं तो पहलवान का पैर पकड़कर घुमाया जाता है। जिससे वह मैट के बाहर निकल जाता है और इससे विपक्षी पहलवान को प्वाइंट मिल जाता है। भारंदाज दांव भी इस समय कुश्ती में काफी अहम है, जिसमें विपक्षी पहलवान को कमर से पकड़कर पूरा भार अपने ऊपर लेकर घुमाया जाता है और उससे अंक जरूर मिलता है। लैग अटैक में सामने वाला पहलवान फुर्ती के साथ दोनों पैरों को अपने हाथों से पकड़कर विपक्षी पहलवान को नीचे गिराने की कोशिश करता है। यह दांव अचानक व तेज फुर्ती के साथ लगाया गया हो तो विपक्षी पहलवान को आसानी से चित किया जा सकता है। वहीं लैग डिफेंस में जब विपक्षी पहलवान लैग अटैक करता है तो उससे किस तरह से बचा जा सकता, जिससे पहलवान चित नहीं हो। इस बारे में महिला पहलवानों को बारीकी से बताया जा रहा है।
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महिला पहलवान अब बेलारूस में खेलने के लिए जाएंगी। जिससे विदेशी पहलवानों के साथ खेलकर वह अपनी कमियां दूर कर सके और वर्ल्ड चैंपियनशिप में ओलंपिक कोटा हासिल किया जा सकें। हमें उम्मीद है कि सभी छह भार वर्ग में वर्ल्ड चैंपियनशिप से ओलंपिक का कोटा हासिल कर लिया जाएगा।
-कुलदीप मलिक, चीफ कोच भारतीय महिला कुश्ती