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प्रवासी मजदूर के पास रुपये नहीं मिले तो बस से नीचे उतारा, नस काटने का प्रयास किया

Mon, 18 May 2020 11:36 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 18 May 2020 11:36 PM IST
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When the fare was lowered, the migrant laborer from West Bengal injured himself by hitting the blade
पश्चिम बंगाल का युवक। - फोटो : Sonipat
लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूरों पर बड़ी आफत है। उनके पास काम नहीं है और रोटी नहीं मिलने के कारण वह घर जाना चाहते हैं। जिनको घर तक छोड़ने के लिए रुपये वसूले जा रहे हैं। यहां जीटी रोड से रविवार की रात को यूपी व बिहार के लिए एक प्राइवेट बस गई, जिसमें जाने वालों से 2-3 हजार रुपये तक वसूले गए। जिसके पास पूरे रुपये नहीं मिले, उसे बस से नीचे उतार दिया गया। एक पश्चिम बंगाल के युवक को बस से नीचे उतार दिया गया तो उसने हाथों में ब्लेड मारकर खुद को घायल कर लिया। वहां मौजूद करणी सेना के पदाधिकारियों ने उसे रोका और शेल्टर होम में भेजा। इसके साथ ही उसे घर जाने के लिए रुपये देने का आश्वासन दिया गया।
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प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए जीटी रोड से रात के समय प्राइवेट बस चलाई जा रही हैं। वह बस यूपी व बिहार तक जाती है और उसमें जाने वालों से 2-3 हजार रुपये वसूले जाते हैं। इस तरह ही प्राइवेट बस रविवार की रात को यूपी व बिहार के लिए रवाना की गई, जिसमें जाने वाले प्रवासी मजदूरों से 2-3 हजार रुपये जगह के हिसाब से लिए गए। उस बस में पश्चिम बंगाल का एक युवक अमायरा भी सवार हो गया जो बिहार तक जाने के लिए सवार हुआ था। जिससे बिहार तक पहुंचकर आगे किसी तरह पश्चिम बंगाल तक पहुंच सके। जब बस में उससे रुपये मांगे गए तो उसपर कम रुपये मिले और उसे बस से नीचे उतार दिया। उसने अपने घर फोन किया तो परिजनों ने अपने पास भी रुपये नहीं होने की बात कहते हुए रोना शुरू कर दिया। जिसपर युवक परेशान हो गया और उसने वहां ब्लेड से अपने हाथों की नस काटने का प्रयास किया। उसने ब्लेड से हाथों पर कई वार किए तो उसे देखकर वहां मौजूद करणी सेना के प्रदेश संगठन महामंत्री दीपक चौहान व अन्य ने रोक लिया। उस युवक ने बताया कि वह पानीपत में काम करता था और अब लॉकडाउन के कारण खाना तक नहीं मिलने से घर जाना चाहता है। जिसपर संगठन ने उसे कुछ पैसे दिए और उसके घर जाने के लिए ट्रेन के टिकट का इंतजाम करने का आश्वासन दिया। इस समय उसे बीसवा मिल के शेल्टर होम में रखा गया है, जहां करणी सेना के पदाधिकारी उसकी देखभाल कर रहे हैं।
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