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राक्षसों का अत्याचार बढ़ा तो भगवान श्रीहरि ने संहार किया : सत्यदेव
Thu, 11 Dec 2025 02:12 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 11 Dec 2025 02:12 AM IST
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फोटाे 13- सोनीपत के मुरथल स्थित बाबा बिशनदास धाम में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते कथावाचक स्वामी सत्
सोनीपत। मुरथल स्थित बाबा बिशनदास धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन रहा। कथावाचक स्वामी सत्यदेव महाराज ने बुधवार को वामन अवतार, प्रह्लाद चरित्र के प्रसंग का वर्णन किया। मुख्य यजमान के रूप में काशीराम गोयल व परिवार ने शिरकत की। कथा की शुरुआत कथावाचक ने यजमान परिवार के साथ विधिवत भागवत की पूजा-अर्चना के साथ की।
स्वामी सत्यदेव महाराज ने वामन अवतार की दिव्यता, राजा बलि की उदारता, भगवान विष्णु के पांचवें अवतार के माध्यम से धर्म की स्थापना का संदेश समझाया। कथा में प्रह्लाद चरित्र के माध्यम से बालक प्रह्लाद की अटल श्रद्धा, भक्ति व आत्मविश्वास के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर किया। स्वामी सत्यदेव ने बताया कि जब-जब धरती पर राक्षसों का अत्याचार बढ़ा तो भगवान श्रीहरि ने कई अवतार लेकर उनका संहार किया।
हिरण्याक्ष का वध करने के लिए ही भगवान श्रीहरि अपने तीसरे वराह अवतार में प्रकट हुए। जब हिरण्याक्ष पृथ्वी को पाताल में ले गया तो विष्णु जी उसका वध कर पृथ्वी को वापस लाए। उन्हाेंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा में सभी ग्रंथों का सार है, जो श्रद्धालुओं को किसी भी कठिनाई को स्वीकार करने की प्रेरणा देती है।
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कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य कर माहौल को भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक बनाया। कथा के पश्चात आरती कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। कथा में प्रधान पवन गोयल, नवीन गोयल, दीपक गोयल, कृष्ण गोयल, प्रवीण गोयल, सुशील, सुभाष, मेवालाल, अशोक, हीरालाल, पप्पू आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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स्वामी सत्यदेव महाराज ने वामन अवतार की दिव्यता, राजा बलि की उदारता, भगवान विष्णु के पांचवें अवतार के माध्यम से धर्म की स्थापना का संदेश समझाया। कथा में प्रह्लाद चरित्र के माध्यम से बालक प्रह्लाद की अटल श्रद्धा, भक्ति व आत्मविश्वास के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर किया। स्वामी सत्यदेव ने बताया कि जब-जब धरती पर राक्षसों का अत्याचार बढ़ा तो भगवान श्रीहरि ने कई अवतार लेकर उनका संहार किया।
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हिरण्याक्ष का वध करने के लिए ही भगवान श्रीहरि अपने तीसरे वराह अवतार में प्रकट हुए। जब हिरण्याक्ष पृथ्वी को पाताल में ले गया तो विष्णु जी उसका वध कर पृथ्वी को वापस लाए। उन्हाेंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा में सभी ग्रंथों का सार है, जो श्रद्धालुओं को किसी भी कठिनाई को स्वीकार करने की प्रेरणा देती है।
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कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य कर माहौल को भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक बनाया। कथा के पश्चात आरती कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। कथा में प्रधान पवन गोयल, नवीन गोयल, दीपक गोयल, कृष्ण गोयल, प्रवीण गोयल, सुशील, सुभाष, मेवालाल, अशोक, हीरालाल, पप्पू आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।

फोटाे 13- सोनीपत के मुरथल स्थित बाबा बिशनदास धाम में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते कथावाचक स्वामी सत्