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Sonipat News: यूपीएस न होने से शोपीस बनी लाखों की मशीन, जून में आया था नई मशीनों का स्टॉक
Sat, 20 Dec 2025 02:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 20 Dec 2025 02:10 AM IST
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फोटो 23- सोनीपत के खरखौदा स्थित उपमंडल नागरिक अस्पताल। संवाद
खरखौदा। नागरिक अस्पताल खरखौदा में लाखों रुपये की अत्याधुनिक मशीनें धूल फांक रही हैं। डिजिटल एक्स-रे, सीबीसी (कंपलीट ब्लड काउंट) व फुल्ली ऑटोमेटिक एनेलाइजर की जांच सहित कई महत्वपूर्ण मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा। क्योंकि इनको चलाने के लिए जरूरी यूपीएस (अनइंटरप्टेड पावर सप्लाई) नहीं है।
उपमंडल नागरिक अस्पताल पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से अपग्रेड होकर अस्पताल बना। इसके बाद अब फर्स्ट रेफरल यूनिट बन चुका है, लेकिन यहां सुविधाओं के नाम पर आज भी हाथ खाली हैं। मरीज लाखों रुपये की कई मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद इनके लाभ से वंचित हैं। जून माह में अस्पताल में नई मशीनों का स्टॉक पहुंचा था।
शुरुआत में इन्हें संचालित करने के लिए आवश्यक कंप्यूटर ही अस्पताल को नहीं भेजे गए। काफी समय बाद जब कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए तो संबंधित विभाग की ओर से यूपीएस की कटौती कर दी गई। ऐसे में बगैर यूपीएस के मशीनें व कंप्यूटर चलाना जोखिम भरा माना जा रहा है, क्योंकि बिजली की आंख-मिचौली से उपकरण खराब होने का खतरा बना रहता है। इस कारण तकनीकी स्टाफ भी मशीनें शुरू करने से कतरा रहा है।
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कागजों तक सीमित रह गई व्यवस्था
स्थिति यह है कि मरीजों को डिजिटल एक्स-रे या सीबीसी जैसी जरूरी जांच के लिए निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है। इससे न केवल मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण व कस्बा क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों के लिए यह जांच सरकारी अस्पताल में निशुल्क या रियायती दरों पर उपलब्ध होनी थी लेकिन अव्यवस्था के चलते यह सुविधा कागजों तक सीमित रह गई है।
फर्स्ट रेफरल यूनिट का दर्जा पा चुका है अस्पताल
खरखौदा का नागरिक अस्पताल पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र था, जिसे अपग्रेड कर उपमंडल स्तरीय नागरिक अस्पताल बनाया गया। इसके बाद इसे और आगे बढ़ाते हुए फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) का दर्जा भी दिया गया। एफआरयू बनने का उद्देश्य था कि क्षेत्र के मरीजों को बेहतर जांच, इलाज व आपातकालीन सेवाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकें। अब जमीनी हकीकत यह है कि सुविधाओं के नाम पर आज भी हाथ खाली हैं।
नागरिक अस्पताल में सभी मशीनों को अपने स्तर पर प्रारंभ करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही सभी मशीनों का संचालन कर मरीजों को संबंधित लाभ मुहैया करवाया जाएगा।
- जितेंद्र रंगा, एसएमओ, उपमंडल नागरिक अस्पताल, खरखौदा
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उपमंडल नागरिक अस्पताल पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से अपग्रेड होकर अस्पताल बना। इसके बाद अब फर्स्ट रेफरल यूनिट बन चुका है, लेकिन यहां सुविधाओं के नाम पर आज भी हाथ खाली हैं। मरीज लाखों रुपये की कई मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद इनके लाभ से वंचित हैं। जून माह में अस्पताल में नई मशीनों का स्टॉक पहुंचा था।
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शुरुआत में इन्हें संचालित करने के लिए आवश्यक कंप्यूटर ही अस्पताल को नहीं भेजे गए। काफी समय बाद जब कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए तो संबंधित विभाग की ओर से यूपीएस की कटौती कर दी गई। ऐसे में बगैर यूपीएस के मशीनें व कंप्यूटर चलाना जोखिम भरा माना जा रहा है, क्योंकि बिजली की आंख-मिचौली से उपकरण खराब होने का खतरा बना रहता है। इस कारण तकनीकी स्टाफ भी मशीनें शुरू करने से कतरा रहा है।
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कागजों तक सीमित रह गई व्यवस्था
स्थिति यह है कि मरीजों को डिजिटल एक्स-रे या सीबीसी जैसी जरूरी जांच के लिए निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है। इससे न केवल मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण व कस्बा क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों के लिए यह जांच सरकारी अस्पताल में निशुल्क या रियायती दरों पर उपलब्ध होनी थी लेकिन अव्यवस्था के चलते यह सुविधा कागजों तक सीमित रह गई है।
फर्स्ट रेफरल यूनिट का दर्जा पा चुका है अस्पताल
खरखौदा का नागरिक अस्पताल पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र था, जिसे अपग्रेड कर उपमंडल स्तरीय नागरिक अस्पताल बनाया गया। इसके बाद इसे और आगे बढ़ाते हुए फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) का दर्जा भी दिया गया। एफआरयू बनने का उद्देश्य था कि क्षेत्र के मरीजों को बेहतर जांच, इलाज व आपातकालीन सेवाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकें। अब जमीनी हकीकत यह है कि सुविधाओं के नाम पर आज भी हाथ खाली हैं।
नागरिक अस्पताल में सभी मशीनों को अपने स्तर पर प्रारंभ करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही सभी मशीनों का संचालन कर मरीजों को संबंधित लाभ मुहैया करवाया जाएगा।
- जितेंद्र रंगा, एसएमओ, उपमंडल नागरिक अस्पताल, खरखौदा