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Sonipat News: दो बच्चोंं की काॅक्लियर इम्प्लांट सर्जरी और एक की होगी सीएचडी सर्जरी
Wed, 03 Jun 2026 07:36 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 03 Jun 2026 07:36 AM IST
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फोटो : सोनीपत के नागरिक अस्पताल में सर्जरी से पहले बच्चों व के साथ उप सिविल सर्जन डॉ. आशा सहराव
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गंभीर रूप से बीमार तीन बच्चों को शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के लिए 12.65 लाख रुपये वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। यह राशि सिविल सर्जन डाॅ. अनुराधा जैन व उप सिविल सर्जन डॉ. आशा सहरावत की उपस्थिति बच्चों के परिजनों को प्रदान की गई।
आरबीएसके की नोडल अधिकारी डाॅ. आशा सहरावत ने बताया कि इस वित्तीय सहायता के तहत स्वास्थ्य विभाग की ओर से बच्चों के इलाज का खर्च वहन किया जाएगा। दो बच्चोंं की काॅक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की जाएगी। ये बच्चे जन्म से ही सुनने की क्षमता से वंचित हैं।
दो बच्चों को काॅक्लियर इम्प्लांट सर्जरी और उसके जरूरी उपकरणों के लिए वित्तीय मदद दी गई है। वहीं, सीएचडी सर्जरी के लिए एक बच्चे का सहायता दी गई है। यह बच्चा जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित था। अब बच्चे के हृदय के ऑपरेशन का पूरा खर्च इस योजना के माध्यम से उठाया गया है।
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उन्होंने बताया कि आरबीएसके का मुख्य उद्देश्य जीरो से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात विकार, बीमारियां, कमियां और विकास में देरी (4 डी) का समय पर पता लगाकर उन्हें निशुल्क उपचार देना है।
जीरो से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए निर्धारित 30 गंभीर रोगों व विकारों की स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और सीएचसी-पीएचसी स्तर पर मुफ्त स्क्रीनिंग की जाती है। काॅक्लियर इम्प्लांट, जन्मजात हृदय रोग, कटे होंठ व तालू (क्लेफ्ट लिप-पैलेट) और मोतियाबिंद जैसी गंभीर बीमारियों का सरकारी या अनुबंधित अस्पतालों में मुफ्त ऑपरेशन किया जाता है।
योजना के तहत जरूरतमंद बच्चों को चश्मा, हियरिंग एड (कान की मशीन) और कृत्रिम अंग निशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।
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सोनीपत। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गंभीर रूप से बीमार तीन बच्चों को शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के लिए 12.65 लाख रुपये वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। यह राशि सिविल सर्जन डाॅ. अनुराधा जैन व उप सिविल सर्जन डॉ. आशा सहरावत की उपस्थिति बच्चों के परिजनों को प्रदान की गई।
आरबीएसके की नोडल अधिकारी डाॅ. आशा सहरावत ने बताया कि इस वित्तीय सहायता के तहत स्वास्थ्य विभाग की ओर से बच्चों के इलाज का खर्च वहन किया जाएगा। दो बच्चोंं की काॅक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की जाएगी। ये बच्चे जन्म से ही सुनने की क्षमता से वंचित हैं।
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दो बच्चों को काॅक्लियर इम्प्लांट सर्जरी और उसके जरूरी उपकरणों के लिए वित्तीय मदद दी गई है। वहीं, सीएचडी सर्जरी के लिए एक बच्चे का सहायता दी गई है। यह बच्चा जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित था। अब बच्चे के हृदय के ऑपरेशन का पूरा खर्च इस योजना के माध्यम से उठाया गया है।
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उन्होंने बताया कि आरबीएसके का मुख्य उद्देश्य जीरो से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात विकार, बीमारियां, कमियां और विकास में देरी (4 डी) का समय पर पता लगाकर उन्हें निशुल्क उपचार देना है।
जीरो से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए निर्धारित 30 गंभीर रोगों व विकारों की स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और सीएचसी-पीएचसी स्तर पर मुफ्त स्क्रीनिंग की जाती है। काॅक्लियर इम्प्लांट, जन्मजात हृदय रोग, कटे होंठ व तालू (क्लेफ्ट लिप-पैलेट) और मोतियाबिंद जैसी गंभीर बीमारियों का सरकारी या अनुबंधित अस्पतालों में मुफ्त ऑपरेशन किया जाता है।
योजना के तहत जरूरतमंद बच्चों को चश्मा, हियरिंग एड (कान की मशीन) और कृत्रिम अंग निशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।