{"_id":"6721452db03d2c9c2e0d57b4","slug":"two-bed-burn-unit-ready-if-there-is-no-surgeon-then-how-will-the-treatment-be-done-sonipat-news-c-197-1-snp1003-126906-2024-10-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonipat News: दो बेड का बर्न यूनिट तैयार, सर्जन नहीं तो कैसे होगा इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonipat News: दो बेड का बर्न यूनिट तैयार, सर्जन नहीं तो कैसे होगा इलाज
Wed, 30 Oct 2024 01:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 30 Oct 2024 01:57 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। नागरिक अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में बर्न यूनिट के नाम पर दो बेड की व्यवस्था तो कर दी गई लेकिन अस्पताल में प्लास्टिक सर्जन तो दूर सामान्य सर्जन तक की तैनाती नहीं है। ऐसे में बर्न यूनिट में भर्ती होने वाले मरीजों का उपचार कैसे संभव हो सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर वर्ष दिवाली के मौके पर आग से झुलसकर आने वाले लोगों का बर्न यूनिट में उपचार करने का दावा किया जाता है, लेकिन गंभीर रूप से आग से झुलसे मरीजों को प्रारंभिक इलाज के बाद रेफर कर दिया जाता है। दिवाली के त्योहार के आसपास ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन सुविधाएं नाकाफी हैं। दिवाली के दौरान आग से झुलसने वालों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। आग से झुलसने वाले लोगों को भर्ती करने के लिए जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में बर्न वार्ड बना रखा है। इसमें झुलसकर आने वाले मरीजों को भर्ती किया जाएगा। इस यूनिट में आग से झुलसे मरीजों के उपचार के लिए जरूरी संसाधनों का कोई इंतजाम नहीं है। गंभीर केस आने पर प्रारंभिक इलाज के बाद उन्हें रोहतक पीजीआई या खानपुर कलां स्थित बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। दिवाली पर्व में विस्फोटक से झुलसने व आग की घटनाओं की ज्यादा आशंका रहती है। ऐसे में अगर कोई अप्रिय घटना होती है, तो अस्पताल प्रशासन के पास इससे निपटने के कोई इंतजाम नहीं है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति न होने से नहीं मिल रहा इलाज
सरकार की ओर से अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने का दावा किया जाता है। हकीकत में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति न होने के कारण मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पाता है। जिला नागरिक अस्पताल में प्लास्टिक सर्जन तो दूर सामान्य सर्जन तक नहीं है। अस्पताल में करीब तीन साल से स्थायी सर्जन नहीं है। अगस्त, 2022 में जारी सूची में सर्जन डॉ. सुनील कुमार की नियुक्ति के आदेश हुए थे। इससे मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सर्जन डॉ. सुनील कुमार ने ज्वाइन नहीं किया। ऐसे में नवंबर, 2021 से अब तक मुंडलाना सीएचसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (सर्जन) डॉ. संजय कौशिक अस्पताल में सप्ताह में एक दिन ओपीडी लगाते हैं।
विज्ञापन
वर्जन -
जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में दो बेड का बर्न यूनिट तैयार किया गया है। यूनिट के संचालन के लिए सर्जन नहीं है। इसके लिए सरकार को पत्र लिखा है। अगर कोई गंभीर मरीज आता है तो उसको प्राथमिक उपचार देकर तुरंत बाद रेफर कर दिया जाता है।-डॉ. जयकिशोर, सिविल सर्जन
विज्ञापन
सोनीपत। नागरिक अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में बर्न यूनिट के नाम पर दो बेड की व्यवस्था तो कर दी गई लेकिन अस्पताल में प्लास्टिक सर्जन तो दूर सामान्य सर्जन तक की तैनाती नहीं है। ऐसे में बर्न यूनिट में भर्ती होने वाले मरीजों का उपचार कैसे संभव हो सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर वर्ष दिवाली के मौके पर आग से झुलसकर आने वाले लोगों का बर्न यूनिट में उपचार करने का दावा किया जाता है, लेकिन गंभीर रूप से आग से झुलसे मरीजों को प्रारंभिक इलाज के बाद रेफर कर दिया जाता है। दिवाली के त्योहार के आसपास ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन सुविधाएं नाकाफी हैं। दिवाली के दौरान आग से झुलसने वालों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। आग से झुलसने वाले लोगों को भर्ती करने के लिए जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में बर्न वार्ड बना रखा है। इसमें झुलसकर आने वाले मरीजों को भर्ती किया जाएगा। इस यूनिट में आग से झुलसे मरीजों के उपचार के लिए जरूरी संसाधनों का कोई इंतजाम नहीं है। गंभीर केस आने पर प्रारंभिक इलाज के बाद उन्हें रोहतक पीजीआई या खानपुर कलां स्थित बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। दिवाली पर्व में विस्फोटक से झुलसने व आग की घटनाओं की ज्यादा आशंका रहती है। ऐसे में अगर कोई अप्रिय घटना होती है, तो अस्पताल प्रशासन के पास इससे निपटने के कोई इंतजाम नहीं है।
विज्ञापन
विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति न होने से नहीं मिल रहा इलाज
सरकार की ओर से अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने का दावा किया जाता है। हकीकत में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति न होने के कारण मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पाता है। जिला नागरिक अस्पताल में प्लास्टिक सर्जन तो दूर सामान्य सर्जन तक नहीं है। अस्पताल में करीब तीन साल से स्थायी सर्जन नहीं है। अगस्त, 2022 में जारी सूची में सर्जन डॉ. सुनील कुमार की नियुक्ति के आदेश हुए थे। इससे मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सर्जन डॉ. सुनील कुमार ने ज्वाइन नहीं किया। ऐसे में नवंबर, 2021 से अब तक मुंडलाना सीएचसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (सर्जन) डॉ. संजय कौशिक अस्पताल में सप्ताह में एक दिन ओपीडी लगाते हैं।
विज्ञापन
वर्जन -
जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में दो बेड का बर्न यूनिट तैयार किया गया है। यूनिट के संचालन के लिए सर्जन नहीं है। इसके लिए सरकार को पत्र लिखा है। अगर कोई गंभीर मरीज आता है तो उसको प्राथमिक उपचार देकर तुरंत बाद रेफर कर दिया जाता है।-डॉ. जयकिशोर, सिविल सर्जन