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Sonipat News: ईसीसी शुल्क माफ होने या ग्राहक के देने पर ही दिल्ली भेजेंगे ट्रक
Sat, 23 May 2026 09:36 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 23 May 2026 09:36 PM IST
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फोटो: ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के चलते सोनीपत के फाजिलपुर ट्रक यूनियन पर लटका हुआ ताला। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। एनसीआर क्षेत्र में पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ईसीसी) में भारी बढ़ोतरी और गैर दिल्ली पंजीकृत बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध के विरोध में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल तीसरे दिन जारी रही। जिले में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से 500 से अधिक ट्रकों का चक्का जाम रहा।
हड़ताल के अंतिम दिन ट्रांसपोर्टरों ने बैठक कर विभिन्न विषयों पर चर्चा की। साथ ही निर्णय लिया कि अगर ईसीसी शुल्क माफ होता है या ग्राहकों की ओर से अदा किया जाता है तो वह दिल्ली की तरफ वाहन भेजने के लिए तैयार हैं अन्यथा अपने नुकसान पर दिल्ली का रुख नहीं करेंगे।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि उन्हें देर शाम तक हड़ताल पर ऊपर से कोई सूचना नहीं मिली है। ट्रांसपोर्टर की बेरुखी से औद्योगिक क्षेत्रों के व्यापारियों की चिंता बढ़ती जा रही है। ट्रैकों के पहिये थमने व माल ढुलाई प्रभावित होने से कारोबार पर असर पड़ने लगा है। उद्योगपतियों को कच्चा माल मुहैया नहीं हो रहा है।।
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भाईचारा ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन के प्रधान अमित कटारिया ने बताया कि ईसीसी शुल्क बढ़ाकर और बीएस-4 वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध से ट्रक मालिकों और चालकों को आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है। मेहनत करने के बावजूद उन्हें लाभ नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं जाता गया है दिल्ली की ओर अपने वाहन नहीं ले जाएंगे। ग्राहक से ईसीसी शुल्क मिलने पर वह दिल्ली का रुख करने के लिए तैयार हैं।
रोजमर्रा की चीजों, व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ता दिख रहा असर
बुकिंग बंद और ट्रकों का चक्का जाम होने से बड़ी कंपनियों में कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार माल की डिलीवरी प्रभावित होने लगी है। लगातार तीसरे दिन ट्रकों का चक्का जाम रहने से औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ रहा है। रोजमर्रा की चीजों पर जल्द असर पड़ता दिखाई दे रहा है। फाजिलपुर स्थित ट्रक यूनियन में सन्नाटा पसरा हुआ है। ऐसे में रोजमर्रा के सामान से लेकर औद्योगिक व निर्माण सामग्री की सप्लाई पर असर पड़ने लगा है।
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सोनीपत। एनसीआर क्षेत्र में पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ईसीसी) में भारी बढ़ोतरी और गैर दिल्ली पंजीकृत बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध के विरोध में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल तीसरे दिन जारी रही। जिले में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से 500 से अधिक ट्रकों का चक्का जाम रहा।
हड़ताल के अंतिम दिन ट्रांसपोर्टरों ने बैठक कर विभिन्न विषयों पर चर्चा की। साथ ही निर्णय लिया कि अगर ईसीसी शुल्क माफ होता है या ग्राहकों की ओर से अदा किया जाता है तो वह दिल्ली की तरफ वाहन भेजने के लिए तैयार हैं अन्यथा अपने नुकसान पर दिल्ली का रुख नहीं करेंगे।
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ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि उन्हें देर शाम तक हड़ताल पर ऊपर से कोई सूचना नहीं मिली है। ट्रांसपोर्टर की बेरुखी से औद्योगिक क्षेत्रों के व्यापारियों की चिंता बढ़ती जा रही है। ट्रैकों के पहिये थमने व माल ढुलाई प्रभावित होने से कारोबार पर असर पड़ने लगा है। उद्योगपतियों को कच्चा माल मुहैया नहीं हो रहा है।।
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भाईचारा ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन के प्रधान अमित कटारिया ने बताया कि ईसीसी शुल्क बढ़ाकर और बीएस-4 वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध से ट्रक मालिकों और चालकों को आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है। मेहनत करने के बावजूद उन्हें लाभ नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं जाता गया है दिल्ली की ओर अपने वाहन नहीं ले जाएंगे। ग्राहक से ईसीसी शुल्क मिलने पर वह दिल्ली का रुख करने के लिए तैयार हैं।
रोजमर्रा की चीजों, व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ता दिख रहा असर
बुकिंग बंद और ट्रकों का चक्का जाम होने से बड़ी कंपनियों में कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार माल की डिलीवरी प्रभावित होने लगी है। लगातार तीसरे दिन ट्रकों का चक्का जाम रहने से औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ रहा है। रोजमर्रा की चीजों पर जल्द असर पड़ता दिखाई दे रहा है। फाजिलपुर स्थित ट्रक यूनियन में सन्नाटा पसरा हुआ है। ऐसे में रोजमर्रा के सामान से लेकर औद्योगिक व निर्माण सामग्री की सप्लाई पर असर पड़ने लगा है।