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सिविल सेवा में छुआ आसमान, शिक्षकों का आज भी करते है सम्मान

Wed, 04 Sep 2019 11:48 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 04 Sep 2019 11:48 PM IST
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Touched the sky in Civil service, teacher still respected today
शिवा शिक्षा सदन की शिक्षिका राजबाला के साथ आईएएस अनु कुमारी - फोटो : Sonipat
भले ही कोई कितनी ऊंचाई पर पहुंच जाए, लेकिन उस गुरु को कभी नहीं भूलता है। जिसके सहारे वह ऊंचाई पर पहुंचा है और हमेशा उनको याद करते हुए मिलने जाते हैं। ऐसी ही सिविल सेवा में देश में दूसरे स्थान व महिला वर्ग में टॉपर रही सोनीपत की अनु कुमारी हैं जो इतने ऊंचे मुकाम पर पहुंचने के बाद भी अपने स्कूल की शिक्षिकाओं से हमेशा मिलने आती हैं। वहीं प्रिंटिंग में विदेशों तक अपनी पहचान बनाने वाले मुरथल यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. राजेंद्र अनायत भी आजतक अपने 28 साल पुराने प्रोफेसरों को याद रखते हैं, जिनके सहारे वह यहां तक पहुंचे हैं। वह उनके निधन से पहले कई बार मिलने भी गए और आज भी उस समय की तरह सम्मान करते हैं।
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स्कूल की शिक्षिकाओं की बदौलत अनु कुमारी को मिला मुकाम
सोनीपत के विकास नगर में रहने वाली अनु कुमारी ने कक्षा एक से 12वीं तक शिवा शिक्षा सदन में पढ़ाई की। जिसके बाद उच्च शिक्षा ग्रहण की और अनु कुमारी का 2017 में सिविल सर्विस में चयन हुआ। अनु कुमारी ने पूरे देश में दूसरे स्थान व महिला वर्ग में टॉपर बनकर सभी को चौंका दिया था, क्योंकि अनु कुमारी की शादी हो चुकी थी और वह शादी के बाद नौकरी करते हुए सिविल सर्विस की तैयारी कर रही थीं। इस तरह घर की जिम्मेदारी संभालते हुए नौकरी की और उसके बावजूद सिविल सर्विस में दूसरे स्थान पर रहीं। इस तरह ऊंचाई पर पहुंचने वाली अनु कुमारी आज भी शिवा शिक्षा सदन में शुरूआती शिक्षा देने वाली शिक्षिकाओं को नहीं भूलती हैं। अनु कुमारी ने बताया कि शुरूआती शिक्षा ही सबसे अहम होती है तो उसे शिक्षिका राजबाला, शिक्षक आरएल माम, जीके सिंह के अलावा प्रिंसिपल सरिता कुकरेजा व वीरेंद्र बंसल ने हर गतिविधि में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अनु कुमारी जब भी घर आती हैं तो वह अपने स्कूल में शिक्षिकाओं से मिलने जरूर जाती हैं। अनु कुमारी कहती हैं कि उनको स्कूल में आकर अपना बचपन याद आ जाता है।
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प्रो. राजेंद्र अनायत को विदेशों तक पहचान दिलाने में गुरु सबसे अहम
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. राजेंद्र अनायत आज के समय में कलर प्रिंटिंग में ऐसा नाम है जो विदेशों तक में जाना जाता है। उनके कलर कोडिंग में किए गए रिसर्च विदेशों तक प्रचलित हैं और उनके प्रिंट किए हुए करेंसी तक विदेश में चलती हैं। वीसी प्रो. राजेंद्र अनायत अपने गुरुओं का बड़ा सम्मान करते हैं। वह बताते हैं कि उनका विषय प्रिंटिंग होता था और पूना यूनिवर्सिटी में उनके प्रोफेसर पीबी कुलकर्णी होते थे। उनको प्रिंटिंग के क्षेत्र में ऊंचाई तक पहुंचाने में सबसे अहम भूमिका प्रो. पीबी कुलकर्णी ने निभाई। वहां के बाद वह मणिपाल यूनिवर्सिटी में पहुंच गए, जहां उनके प्रिंटिंग डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो. केजे कामद रहे। वीसी बताते हैं कि उन्होंने भी प्रिंटिंग के क्षेत्र में उनको इतना ज्ञान दिया कि वह आज विदेशों तक में जाकर रिसर्च करते हैं और विदेशी भी उनके कायल हैं। वीसी प्रो. राजेंद्र अनायत लगातार अपने प्रोफेसर के संपर्क में रहे और वह समय मिलने पर उनके पास जाते थे, जिनमें से प्रो. पीबी कुलकर्णी का निधन हो गया है। लेकिन वीसी आज भी उनका पूरा सम्मान करते हैं।
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