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शुगर मिल के चीफ केमिस्ट, इंस्ट्रूमेंट इंजीनियर समेत तीन कर्मचारी निलंबित
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सोनीपत। शुगर मिल में रोक के बावजूद एक कंपनी को भुगतान करने के मामले में मिल प्रबंधन ने चीफ केमिस्ट, इंस्ट्रुमेंट इंजीनियर समेत तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही शुगर मिल के प्रबंध निदेशक ने पत्र लिखकर शुगर मिल फेडरेशन को भी आगामी कार्रवाई के लिए लिखा।
दी सोनीपत सहकारी चीनी मिल में पेराई क्षमता 16 हजार से बढ़ाकर 22 हजार क्विंटल प्रतिदिन की गई थी। संबंधित कंपनी को दो साल तक चीनी मिल के सभी पार्ट को ठीक ढंग से चलाने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। वर्ष 2018-19 के पेराई सत्र के दौरान शुगर मिल में किसानों के साथ मिल प्रशासन को भी परेशानी का सामना करना पड़ा था। मिल में बार-बार ब्रेक डाउन होने से परेशान किसानों को मजबूरी में कई अन्य मिलों में गन्ना डालना पड़ा था। इसके साथ ही मिल प्रशासन को भी काफी नुकसान झेलना पड़ा था। इसको लेकर गन्ना उत्पादक किसानों और मिल के डायरेक्टरों ने मिल का संचालन करने वाली कंपनी के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था। किसानों व डायरेक्टरों का विरोध बढ़ता देख 50 लाख रुपये का भुगतान करने पर रोक लगा दी गई। उसके बाद भी चीफ केमिस्ट, इंस्ट्रुमेंट इंजीनियर व स्टोर कीपर ने आदेश की अवहेलना करते हुए कंपनी को भुगतान कर दिया। इस पर सहकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने मामले में संज्ञान लेते हुए मिल प्रशासन को कार्रवाई करने के आदेश दिए। इस पर शुगर मिल के प्रबंधन निदेशक सुरेंद्र सिंह दून ने कार्रवाई करते हुए चीफ केमिस्ट बलबीर, इंस्ट्रुमेंट इंजीनियर नवीन और स्टोर कीपर सुंदर को निलंबित कर दिया।
वर्जन
शुगर मिल को चलाने का ठेका लेने वाली कंपनी को भुगतान करने पर रोक लगाई गई थी। उसके बाद भी कंपनी को आदेशों की अनदेखी करते हुए चीफ केमिस्ट, इंस्ट्रुमेंट इंजीनियर व स्टोर कीपर ने करीब 50 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। फिलहाल उन्हें निलंबित कर दिया गया है। यह मामला बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। गहनता से जांच कर नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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- सुरेंद्र दून, एमडी शुगर मिल।
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दी सोनीपत सहकारी चीनी मिल में पेराई क्षमता 16 हजार से बढ़ाकर 22 हजार क्विंटल प्रतिदिन की गई थी। संबंधित कंपनी को दो साल तक चीनी मिल के सभी पार्ट को ठीक ढंग से चलाने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। वर्ष 2018-19 के पेराई सत्र के दौरान शुगर मिल में किसानों के साथ मिल प्रशासन को भी परेशानी का सामना करना पड़ा था। मिल में बार-बार ब्रेक डाउन होने से परेशान किसानों को मजबूरी में कई अन्य मिलों में गन्ना डालना पड़ा था। इसके साथ ही मिल प्रशासन को भी काफी नुकसान झेलना पड़ा था। इसको लेकर गन्ना उत्पादक किसानों और मिल के डायरेक्टरों ने मिल का संचालन करने वाली कंपनी के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था। किसानों व डायरेक्टरों का विरोध बढ़ता देख 50 लाख रुपये का भुगतान करने पर रोक लगा दी गई। उसके बाद भी चीफ केमिस्ट, इंस्ट्रुमेंट इंजीनियर व स्टोर कीपर ने आदेश की अवहेलना करते हुए कंपनी को भुगतान कर दिया। इस पर सहकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने मामले में संज्ञान लेते हुए मिल प्रशासन को कार्रवाई करने के आदेश दिए। इस पर शुगर मिल के प्रबंधन निदेशक सुरेंद्र सिंह दून ने कार्रवाई करते हुए चीफ केमिस्ट बलबीर, इंस्ट्रुमेंट इंजीनियर नवीन और स्टोर कीपर सुंदर को निलंबित कर दिया।
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शुगर मिल को चलाने का ठेका लेने वाली कंपनी को भुगतान करने पर रोक लगाई गई थी। उसके बाद भी कंपनी को आदेशों की अनदेखी करते हुए चीफ केमिस्ट, इंस्ट्रुमेंट इंजीनियर व स्टोर कीपर ने करीब 50 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। फिलहाल उन्हें निलंबित कर दिया गया है। यह मामला बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। गहनता से जांच कर नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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- सुरेंद्र दून, एमडी शुगर मिल।