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किसान बोले - कानून वापस नहीं हुए तो

Sat, 28 Aug 2021 01:48 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 28 Aug 2021 01:48 AM IST
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The farmer said - if the laws are not returned then
कुंडली बॉर्डर पर पत्रकारों से बातचीत करते किसान नेता। संवाद - फोटो : Sonipat
कुंडली बॉर्डर पर आयोजित हुए अखिल भारतीय अधिवेशन के समापन के बाद किसान नेताओं ने कहा कि कानून वापसी तक उनका आंदोलन हर हाल में जारी रहेगा। किसान वर्ष 2024 तक भी आंदोलन को जारी रख सकते हैं। किसानों ने कहा कि 25 सितंबर का भारत बंद ऐतिहासिक होगा। सरकार को कृषि कानूनों पर यू टर्न लेने पर मजबूर किया जाएगा।
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संयुक्त किसान मोर्चा ने बंद को सफल करने के लिए कमर कस ली है। साथ ही किसान आंदोलन को देशभर में फैलाने और तेज करने के लिए गांवों में जाकर लोगों को जोड़ा जाएगा। इसके अलावा पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर में आयोजित महापंचायत में उत्तर प्रदेश के लिए जनसंघर्ष का एलान किया जाएगा।
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कुंडली बॉर्डर पर आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय सम्मेलन में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए शुक्रवार को पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। सम्मेलन के संयोजक डॉ. आशीष मित्तल ने कहा कि सम्मेलन के माध्यम से देश की सभी ट्रेड यूनियनों, छात्र संगठनों और महिला विंग को एक मंच पर लाकर तीनों कृषि कानूनों पर चर्चा की गई। वक्ताओं द्वारा रखे विचारों से निष्कर्ष यही निकला कि ये तीनों कानून पूरी तरह से किसान विरोधी हैं। 100 से अधिक विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपनी बात रखते हुए केंद्र सरकार के काले कानूनों से पर्दा उठा दिया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में सभी ट्रेड यूनियनों के सहयोग से 25 सितंबर को भारत बंद करने का फैसला लिया गया है। सम्मेलन में यह भी तय हुआ है कि किसान गांव और जिला स्तर पर बैठकें आयोजित कर आंदोलन को तेज करने का काम करेंगे।
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डॉ. आशीष मित्तल ने कहा कि सम्मेलन में तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने, एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने, नई बिजली अधिनियम को रद्द करने और एनसीआर में प्रदूषण पर किसानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न करने के मामले प्रमुखता से उठाते हुए प्रस्ताव पारित कर इन्हें वापस लेने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि कानूनों की आड़ में खेती पर हमला करके कारपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के प्रयास हो रहे हैं। रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी करके किसान और मजदूर की कमर तोड़ने की फिराक में है। इसी गलत मंशा के तहत सरकार ने चार श्रम कानून बनाए हैं। सरकार कृषि को नुकसान पहुंचाने के अलावा स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा का निजीकरण कर रही है। आज इन सब पर संघर्ष तेज करने की जरूरत है।
डॉ. सतनाम अजनाला ने बताया कि 25 सितंबर को भारत बंद को लेकर सभी ट्रेड यूनियनों ने समर्थन देने की घोषणा की है। ऐसे में भारत बंद ऐतिहासिक होना तय है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में देशभर के 300 से अधिक जनसंगठनों के तीन हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने शिरकत की और अपने विचार रखे। सरकार बार-बार प्रचार कर रही थी कि यह आंदोलन केवल पंजाब व हरियाणा का है, मगर सम्मेलन में देशभर से जुटे संगठनों के समर्थन ने दिखा दिया है कि यह सम्मेलन किसी एक जाति व धर्म का नहीं, बल्कि पूरे देश का है।

अतुल कुमार अंजान ने कहा कि सम्मेलन में लिए गए फैसलों के दूरगामी आर्थिक और राजनीतिक परिणाम होंगे। नौजवानों में गुस्सा है। गलत नीतियां के चलते ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था चरमरा चुकी है। ऐसे में सरकार से मांग की जाती है कि मनरेगा का कार्यकाल दो महीने का किया जाए और प्रतिदिन मजदूरी 600 रुपये की जाए। निम्न स्तर का गेहूं और चावल देने से देश की गरीबी दूर नहीं होगी, बल्कि कुछ ठोस करना होगा। इस दौरान संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य प्रेम सिंह भंगू, कंवल संधू, बलदेव सिंह निहालगढ़, चरणजीत सिंह सेखों, राजा राम सिंह, जगमोहन सिंह, सत्यवान ने भी विचार रखे।
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