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रानी चेन्नम्मा के साहस देख अंग्रेज हट गए थे पीछे : पार्षद
Sun, 22 Feb 2026 12:23 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 22 Feb 2026 12:23 AM IST
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गोहाना में रानी चेन्नम्मा की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में मौजूद सामाजिक संगठन के
गोहाना। महम और बरोदा रोड के बीच वार्ड नंबर 22 गांधीनगर की रविदास चौपाल में कर्नाटक की वीरांगना महारानी चेन्नम्मा की 197वीं पुण्यतिथि मनाई गई। मुख्य वक्ता नगर पार्षद बबली देवी ने कहा कि महारानी चेन्नम्मा भारतीय नारी शक्ति की प्रतीक थीं। उन्होंने अंग्रेजों की हड़प नीति का डटकर मुकाबला किया था।
पार्षद ने बताया कि जब अंग्रेजों ने रानी के गोद लिए गए उत्तराधिकारी को मानने से इन्कार कर दिया तो उनकी रियासत हड़पने की कोशिश की। तब रानी चेन्नम्मा ने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। रानी के साहस और रणनीति से अंग्रेज अधिकारियों को पीछे हटना पड़ा। तत्कालीन ब्रिटिश कलेक्टर भी लड़ाई में मारा गया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए संत शिरोमणि गुरु रविदास सभा के सचिव सतबीर पोडिया ने कहा कि रानी चेन्नम्मा को भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाली पहली वीरांगनाओं में माना जाता है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से पहले ही उन्होंने अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी थी।
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कार्यक्रम का मार्गदर्शन आजाद सिंह दांगी ने किया। इस मौके पर वेदपाल बीरवाल, पूरणमल चहल, राज सिंह सोलंकी, प्रिंस, वीर, सुशीला, पतासी, सुनीता व देवी सहित कई लोग मौजूद रहे।
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पार्षद ने बताया कि जब अंग्रेजों ने रानी के गोद लिए गए उत्तराधिकारी को मानने से इन्कार कर दिया तो उनकी रियासत हड़पने की कोशिश की। तब रानी चेन्नम्मा ने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। रानी के साहस और रणनीति से अंग्रेज अधिकारियों को पीछे हटना पड़ा। तत्कालीन ब्रिटिश कलेक्टर भी लड़ाई में मारा गया।
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समारोह की अध्यक्षता करते हुए संत शिरोमणि गुरु रविदास सभा के सचिव सतबीर पोडिया ने कहा कि रानी चेन्नम्मा को भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाली पहली वीरांगनाओं में माना जाता है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से पहले ही उन्होंने अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी थी।
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कार्यक्रम का मार्गदर्शन आजाद सिंह दांगी ने किया। इस मौके पर वेदपाल बीरवाल, पूरणमल चहल, राज सिंह सोलंकी, प्रिंस, वीर, सुशीला, पतासी, सुनीता व देवी सहित कई लोग मौजूद रहे।