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दागी अफसरों पर होगी नजर, ड्यूटी अफसर खुद लेंगे कार्रवाई का फैसला
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
Updated Tue, 24 Jan 2017 01:01 AM IST
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जाट आरक्षण आंदोलन की चेतावनी के बाद पुलिस व प्रशासन अलर्ट हो गया है। पिछले साल हुए आंदोलन के दागी अफसरों पर इस बार नजर रखी जाएगी तो उनको आंदोलन के दौरान ड्यूटी से दूर रखा जा सकता है। इनमें वे अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं, जिनपर पिछली बार आंदोलनकारियों का साथ देने के आरोप लगे थे। इसके अलावा, इस बार अधिकारी आदेश नहीं मिलने का बहाना बनाकर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हट सकेंगे। उनको स्थिति को देखते हुए खुद कार्रवाई करने का फैसला लेना होगा।
जाटों ने फरवरी 2016 में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन किया था।
इसके बाद अधिकतर जगह उपद्रव हुआ और उसकी जांच में अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम भी सामने आए, जिन्होंने आंदोलनकारियों का साथ दिया या अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरती। प्रकाश सिंह कमेटी की जांच में भी काफी अधिकारी व कर्मियों पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए थे। इसको देखते हुए इस बार ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों को ड्यूटी से दूर रखने की तैयारी की है। अगर उनको किसी कारण से ड्यूटी पर लगाया भी जाएगा तो उन पर नजर रखी जाएगी कि आखिर वे अपनी ड्यूटी बखूबी निभा रहे हैं या नहीं। इसके अलावा, पिछले साल आंदोलन के बाद अधिकारियों ने यहां तक कहा कि उनको कार्रवाई के लिए आदेश नहीं दिए गए थे। डीसी केएम पांडुरंग का कहना है कि अगर धारा-144 लगाई जाती है और उसके बाद किसी जगह भीड़ जमा होती है तो यह ड्यूटी मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी होगी कि वह स्थिति को देखते हुए कार्रवाई कराएं। वहीं, शांति व्यवस्था भंग होने पर भी वहां तैनात अधिकारी खुद कार्रवाई करा सकते हैं।
डीसी ने मांगी 30 कंपनियां अतिरिक्त फोर्स, दंगा निरोधक जवान भी तैयार
डीसी केएम पांडुरंग ने बताया कि जाट आरक्षण आंदोलन की चेतावनी के कारण 30 कंपनी अतिरिक्त फोर्स मांगी गई है। इनमें 15 कंपनी पैरामिलेट्री फोर्स हैं तो 15 कंपनी हरियाणा पुलिस के दंगा निरोधी जवान हैं। डीसी ने बताया कि किसी भी तरह के दंगे से निपटने के लिए जिला स्तर पर भी पुलिस व मजिस्ट्रेट को ट्रेनिंग दी गई है। इसके अलावा नौ कंपनी सोनीपत पुलिस की अलग से तैयार हैं। इसके अलावा आरक्षण आंदोलन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर डीसी ने सोमवार शाम को वीसी के जरिए अधिकारियों से बातचीत की।
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मुनक नहर व एनएच पर पेट्रोलिंग कराने के साथ ही ग्रामीणों का सहयोग
आरक्षण आंदोलन के तहत पिछली बार मुनक नहर का पानी रोक दिया गया था। इसको देखते हुए नहर के 21 किमी क्षेत्र को तीन हिस्सों में बांट दिया गया, जिस पर लगातार पेट्रोलिंग हो रही है। मुनक नहर के किनारे बसे गांवों के प्रतिनिधियों व ग्रामीणों से व्यवस्था बनाए रखने के लिए सहयोग मांगा गया है। नेशनल हाईवे पर भी पेट्रोलिंग कराई जा रही है।
डीसी से मिले जाट नेता, मीटिंग की अनुमति मांगी
डीसी केएम पांडुरंग से सोमवार केा जाट नेताओं ने मुलाकात की। वह 26 जनवरी को छोटूराम धर्मशाला में मीटिंग करने के लिए डीसी से अनुमति लेने पहुंचे थे। डीसी ने उन सभी से कहा कि वह भी शांति व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस व प्रशासन की मदद करें। क्योंकि उनकी मांगों के बारे में सरकार को जानकारी है और उसपर विचार चल रहा है। इसलिए धरना शांतिपूर्ण होना चाहिए।
वर्जन...
अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरना देने का सभी को अधिकार है। लेकिन कोई कानून व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करेगा तो उससे सख्ती से निपटा जाएगा। जिले में अतिरिक्त फोर्स की मांग की गई है और किसी अधिकारी की कार्यप्रणाली पर पहले सवाल उठा है तो उसे ड्यूटी से दूर भी रखा जा सकता है। उनको ड्यूटी पर लगाया भी गया तो उन पर नजर रखी जाएगी।
-केएम पांडुरंग, डीसी
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जाटों ने फरवरी 2016 में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन किया था।
इसके बाद अधिकतर जगह उपद्रव हुआ और उसकी जांच में अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम भी सामने आए, जिन्होंने आंदोलनकारियों का साथ दिया या अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरती। प्रकाश सिंह कमेटी की जांच में भी काफी अधिकारी व कर्मियों पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए थे। इसको देखते हुए इस बार ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों को ड्यूटी से दूर रखने की तैयारी की है। अगर उनको किसी कारण से ड्यूटी पर लगाया भी जाएगा तो उन पर नजर रखी जाएगी कि आखिर वे अपनी ड्यूटी बखूबी निभा रहे हैं या नहीं। इसके अलावा, पिछले साल आंदोलन के बाद अधिकारियों ने यहां तक कहा कि उनको कार्रवाई के लिए आदेश नहीं दिए गए थे। डीसी केएम पांडुरंग का कहना है कि अगर धारा-144 लगाई जाती है और उसके बाद किसी जगह भीड़ जमा होती है तो यह ड्यूटी मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी होगी कि वह स्थिति को देखते हुए कार्रवाई कराएं। वहीं, शांति व्यवस्था भंग होने पर भी वहां तैनात अधिकारी खुद कार्रवाई करा सकते हैं।
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डीसी ने मांगी 30 कंपनियां अतिरिक्त फोर्स, दंगा निरोधक जवान भी तैयार
डीसी केएम पांडुरंग ने बताया कि जाट आरक्षण आंदोलन की चेतावनी के कारण 30 कंपनी अतिरिक्त फोर्स मांगी गई है। इनमें 15 कंपनी पैरामिलेट्री फोर्स हैं तो 15 कंपनी हरियाणा पुलिस के दंगा निरोधी जवान हैं। डीसी ने बताया कि किसी भी तरह के दंगे से निपटने के लिए जिला स्तर पर भी पुलिस व मजिस्ट्रेट को ट्रेनिंग दी गई है। इसके अलावा नौ कंपनी सोनीपत पुलिस की अलग से तैयार हैं। इसके अलावा आरक्षण आंदोलन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर डीसी ने सोमवार शाम को वीसी के जरिए अधिकारियों से बातचीत की।
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मुनक नहर व एनएच पर पेट्रोलिंग कराने के साथ ही ग्रामीणों का सहयोग
आरक्षण आंदोलन के तहत पिछली बार मुनक नहर का पानी रोक दिया गया था। इसको देखते हुए नहर के 21 किमी क्षेत्र को तीन हिस्सों में बांट दिया गया, जिस पर लगातार पेट्रोलिंग हो रही है। मुनक नहर के किनारे बसे गांवों के प्रतिनिधियों व ग्रामीणों से व्यवस्था बनाए रखने के लिए सहयोग मांगा गया है। नेशनल हाईवे पर भी पेट्रोलिंग कराई जा रही है।
डीसी से मिले जाट नेता, मीटिंग की अनुमति मांगी
डीसी केएम पांडुरंग से सोमवार केा जाट नेताओं ने मुलाकात की। वह 26 जनवरी को छोटूराम धर्मशाला में मीटिंग करने के लिए डीसी से अनुमति लेने पहुंचे थे। डीसी ने उन सभी से कहा कि वह भी शांति व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस व प्रशासन की मदद करें। क्योंकि उनकी मांगों के बारे में सरकार को जानकारी है और उसपर विचार चल रहा है। इसलिए धरना शांतिपूर्ण होना चाहिए।
वर्जन...
अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरना देने का सभी को अधिकार है। लेकिन कोई कानून व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करेगा तो उससे सख्ती से निपटा जाएगा। जिले में अतिरिक्त फोर्स की मांग की गई है और किसी अधिकारी की कार्यप्रणाली पर पहले सवाल उठा है तो उसे ड्यूटी से दूर भी रखा जा सकता है। उनको ड्यूटी पर लगाया भी गया तो उन पर नजर रखी जाएगी।
-केएम पांडुरंग, डीसी