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‘किसमें कितना है दम’ के सीजन-7 की विजेता बनीं सोनीपत की सृष्टि दहिया
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सृष्टि दहिया, प्रमाण पत्र दिखाते हुए।
- फोटो : Sonipat
लक्ष्य निर्धारित कर उसे पाने के लिए कड़ा परिश्रम किया जाए तो हर मंजिल आसान हो जाती है। यह कहना है कि सेक्टर-14 निवासी सृष्टि दहिया का। सृष्टि एक दिन पहले ही रियलिटी शो ‘किसमें कितना है दम’ के सीजन-7 की विजेता बनकर लौटी हैं। यह प्रतियोगिता पंजाब के संगरूर में चल रही है। इसमें सृष्टि ने रविवार को योग में ओवरऑल विनर का खिताब जीता।
5 अक्तूबर 2007 को जन्मी सेक्टर-14 निवासी सृष्टि के पिता रविंद्र दहिया व माता सरोज ने बताया कि बेटी ने आठ साल की उम्र से योग सीखना शुरू किया था। बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए उसे हमेशा प्रेरित करते रहे। सृष्टि चार वर्ष से योग में लोहा मनवाती आ रही है। इन चार वर्ष के दौरान उसने करीब 42 प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है और सभी में पदक जीतकर लौटी हैं। 12 से 14 सितंबर तक गुरुग्राम में हुई हरियाणा स्टेट योग चैंपियनशिप में सृष्टि ने दूसरा स्थान हासिल किया। इससे पहले एशियन योग स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल कर चुकी हैं।
दादा-दादी से मिली योग की शिक्षा
छात्रा सृष्टि योग की बदौलत अपने शरीर को लचीला बना चुकी हैं। सृष्टि जब आसन करती हैं तो देखने वाले हैरान रह जाते हैं। सृष्टि बताती हैं कि दादा बलबीर सिंह दहिया और दादी पावती के साथ सैर पर जाती थीं, वहीं योग के विभिन्न आसन करती थीं, जिसके चलते शरीर लचकदार होता चला गया। परिवार से मिली प्रेरणा से वह विश्व स्तर पर अपना नाम चमकाना चाहती हैं।
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शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग जरूरी : सृष्टि
सृष्टि दहिया बताती हैं कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग सबसे जरूरी है। योग करने की कोई उम्र नहीं होती। मेरा सपना है कि योग से एक दिन देश का नाम रोशन कर सकूं। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए कड़ा अभ्यास करती हूं। पूरी उम्मीद है कि मेरा यह सपना एक दिन अवश्य पूरा होगा।
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5 अक्तूबर 2007 को जन्मी सेक्टर-14 निवासी सृष्टि के पिता रविंद्र दहिया व माता सरोज ने बताया कि बेटी ने आठ साल की उम्र से योग सीखना शुरू किया था। बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए उसे हमेशा प्रेरित करते रहे। सृष्टि चार वर्ष से योग में लोहा मनवाती आ रही है। इन चार वर्ष के दौरान उसने करीब 42 प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है और सभी में पदक जीतकर लौटी हैं। 12 से 14 सितंबर तक गुरुग्राम में हुई हरियाणा स्टेट योग चैंपियनशिप में सृष्टि ने दूसरा स्थान हासिल किया। इससे पहले एशियन योग स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल कर चुकी हैं।
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दादा-दादी से मिली योग की शिक्षा
छात्रा सृष्टि योग की बदौलत अपने शरीर को लचीला बना चुकी हैं। सृष्टि जब आसन करती हैं तो देखने वाले हैरान रह जाते हैं। सृष्टि बताती हैं कि दादा बलबीर सिंह दहिया और दादी पावती के साथ सैर पर जाती थीं, वहीं योग के विभिन्न आसन करती थीं, जिसके चलते शरीर लचकदार होता चला गया। परिवार से मिली प्रेरणा से वह विश्व स्तर पर अपना नाम चमकाना चाहती हैं।
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शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग जरूरी : सृष्टि
सृष्टि दहिया बताती हैं कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग सबसे जरूरी है। योग करने की कोई उम्र नहीं होती। मेरा सपना है कि योग से एक दिन देश का नाम रोशन कर सकूं। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए कड़ा अभ्यास करती हूं। पूरी उम्मीद है कि मेरा यह सपना एक दिन अवश्य पूरा होगा।