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रैन बसेरे में पहुंचे गद्दे और रजाई, 24 घंटे रहेगी निगम कर्मियों की ड्यूटी
अमर उजाला ब्यूरो, सोनीपत।
Updated Tue, 27 Dec 2016 12:15 AM IST
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रैन बसेरे का मुख्य गेट खुला
- फोटो : sonipat
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शनि मंदिर के सामने 46 लाख की लागत से बने रैन बसेरे में अब 24 घंटे निगम कर्मचारी की ड्यूटी रहेगी। अब तक रात को ही कर्मचारी तैनात रहता था। सोमवार सुबह मंत्री कविता जैन ने अपने आवास पर निगम अधिकारियों को बुलाकर कड़ी हिदायत दी। इसके बाद न केवल रैन बसेरे का दिनभर ताल खुला रहा, बल्कि गद्दे और रजाई भी रखी मिली।
छह दिसंबर को डॉ. भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि पर शनि मंदिर के सामने बनाए गए रैन बसेरे का उद्घाटन किया गया था। जहां 50 महिला-पुरुषों के ठहरने की क्षमता है। इससे पहले शहर में रैन बसेरा न होने से बेघर लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। कुम्हार धर्मशाला में ही कुम्हार समाज के लोग ही अपने खर्चे से रैन बसेरे का चला रहे थे। सरकार व प्रशासन की ओर से रैन बसेरे को लेकर कोई सहायता तक नहीं दी जाती थी।
मंत्री कविता जैन की पहल पर नगर निगम ने सरकारी खर्चे से नए रैन बसेरे का निर्माण किया गया, लेकिन वहां पर सुविधा न मिलने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रविवार को कड़ाके की ठंड के बावजूद रैन बसेरे के गेट पर ताला लटके रहने के मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस पर मंत्री कविता जैन ने रैन बसेरे में लटके ताले को लेकर नगर निगम के अधिकारियों को बुलाकर कारण पूछा। बताया गया कि कर्मचारी की रात को ही ड्यूटी रहती है। इस दौरान नगर निगम अधिकारियों को 24 घंटे रैन बसेरे को खुला रखने के लिए दिन रात अलग-अलग कर्मियों को तैनात करने के लिए निर्देश दिए गए।
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निगम केवल छत व बिस्तर देगा, सामाजिक संस्थाएं दें भोजन
निगम ने साफ किया कि रैन बसेरे में बेघर लोगों के ठहरने की ही व्यवस्था है। भोजन उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी नहीं है। हालांकि निगम की ओर से सामाजिक संस्थाओं व दानी लोगों का आह्वान किया गया कि वे गरीब लोगों को भोजन दे सकते हैं।
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छह दिसंबर को डॉ. भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि पर शनि मंदिर के सामने बनाए गए रैन बसेरे का उद्घाटन किया गया था। जहां 50 महिला-पुरुषों के ठहरने की क्षमता है। इससे पहले शहर में रैन बसेरा न होने से बेघर लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। कुम्हार धर्मशाला में ही कुम्हार समाज के लोग ही अपने खर्चे से रैन बसेरे का चला रहे थे। सरकार व प्रशासन की ओर से रैन बसेरे को लेकर कोई सहायता तक नहीं दी जाती थी।
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मंत्री कविता जैन की पहल पर नगर निगम ने सरकारी खर्चे से नए रैन बसेरे का निर्माण किया गया, लेकिन वहां पर सुविधा न मिलने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रविवार को कड़ाके की ठंड के बावजूद रैन बसेरे के गेट पर ताला लटके रहने के मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस पर मंत्री कविता जैन ने रैन बसेरे में लटके ताले को लेकर नगर निगम के अधिकारियों को बुलाकर कारण पूछा। बताया गया कि कर्मचारी की रात को ही ड्यूटी रहती है। इस दौरान नगर निगम अधिकारियों को 24 घंटे रैन बसेरे को खुला रखने के लिए दिन रात अलग-अलग कर्मियों को तैनात करने के लिए निर्देश दिए गए।
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निगम केवल छत व बिस्तर देगा, सामाजिक संस्थाएं दें भोजन
निगम ने साफ किया कि रैन बसेरे में बेघर लोगों के ठहरने की ही व्यवस्था है। भोजन उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी नहीं है। हालांकि निगम की ओर से सामाजिक संस्थाओं व दानी लोगों का आह्वान किया गया कि वे गरीब लोगों को भोजन दे सकते हैं।