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जाट न्याय धरना स्थगित
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Mon, 20 Jun 2016 12:14 AM IST
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पंडाल में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए डीसी।
- फोटो : bureau
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15 दिनों से चला आ रहा जाट न्याय धरना रविवार को समाप्त कर दिया गया। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की मौजूदगी में रविवार को धरना उठाया गया। धरनास्थल पर दोपहर बाद डीसी केएम पांडुरंग भी पहुंचे और सरकार की ओर से समुदाय के लोगों को आश्वासन दिया। इधर, धरना समाप्त होने के बाद डीसी ने धारा-144 के तहत आदेश जारी कर लगाई गई इंटरनेट सेवाओं पर रोक को तत्काल प्रभाव से हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं दूसरी ओर अर्धसैनिक बलों की जो 14 टुकड़ियां जिले में हैं, वे अभी वहीं डटी रहेंगी। सेना को वापस भेजने के लिए सरकार की ओर से निर्देश मिलने के बाद ही कार्यवाही की जाएगी।
दरअसल, रविवार को शक्ति प्रदर्शन के साथ डीसी को ज्ञापन देने की बात पहले प्रचारित की गई थी। इसीलिए गांव-गांव में रविवार के लिए जनसंपर्क अभियान भी चलाया गया था। यही वजह रही कि रविवार को धरनास्थल पर भारी संख्या में समुदाय के लोग पहुंचे थे। इस दौरान कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखे गए थे। गौरतलब है कि 5 जून से अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर लघु सचिवालय स्थित पार्क में जाट न्याय धरना शुरू किया गया था। इस दौरान पहले भूख हड़ताल और फिर क्रमिक अनशन किया गया। धरने के चलते लघु सचिवालय और आसपास जहां पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी, वहीं शहर के मुख्य चौक-चौराहों के साथ-साथ गोहाना, जीटी रोड, नहर और रेलवे ट्रैक पर भी अर्धसैनिक बल लगाए गए थे। एहतियातन जिले में धारा 144 लगाई गई थी। जिसके चलते जेसीबी मशीनों पर रोक लगा दी गई थी। इतना ही नहीं इंटरनेट तथा बल्क सेवाओं पर भी पाबंदी लगा गई थी।
31 अगस्त तक स्थगित किया है आंदोलन
बता दें कि दिल्ली में प्रदेश सरकार के मंत्री और समिति के पदाधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद धरना समाप्त करने का निर्णय लिया गया था। बैठक में सरकार की ओर से न्यायसंगत सभी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया था। सोनीपत में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि धरना स्थगित किया गया है। 31 अगस्त तक धरने को स्थगित किया गया है। इसके बाद 13 सितंबर को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की बैठक होगी, उसमें आगामी रणनीति पर विचार किया जाएगा।
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ये मांगें रखी थी समिति ने
1. हाई कोर्ट में चल रहे केस में सरकार गंभीरता से करेंगी पैरवी।
2. जेल में बंद निर्दोष लोगों को छोडने की प्रक्रिया शुरू होगी।
3. 5 जून से आंदोलन की शुरूआत के बाद सरकार द्वारा दर्ज किए गए सभी मामले और नोटिस वापिस लिए जाए।
4. 130 लोगों पर दर्ज देशद्रोह के मुकदमे वापिस लिए जाए।
5. केंद्र में आरक्षण के लिए गठित की गई कमेटी के साथ हो जाट नेताओं की कराई जाए बैठक।
6. फरवरी आंदोलन के दौरान मारे गए युवकों के परिजनों को तुरंत मुआवजा दिया जाए।
हमने साबित किया कि जाट उपद्रवी नहीं है : हुड्डा
धरना समाप्त कराने आए समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहतास हुड्डा ने कहा कि फरवरी में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव के कारण हमें बदनाम किया गया। हालांकि अबकी 15 दिनों तक शांतिपूर्वक तरीके से धरना देकर हमने साबित कर दिया है कि जाट कौम उपद्रवी नहीं है। हमने अपने हक की लड़ाई शांतिपूर्वक लड़ी। हुड्डा ने कहा कि कुछ कथित खाप नेताओं ने आंदोलन का समर्थन नहीं किया तो क्या हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार हमेशा हमारे साथ धोखा करती आ रही है, लेकिन इस बार धोखा किया तो फिर से आंदोलन शुरू किया जाएगा।
जाट न्याय धरना समाप्त हो गया है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि समुदाय की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इंटरनेट सेवाएं सोमवार से शुरू की जाएगी। हालांकि धारा-144 और सेना अभी बनी रहेगी। इस पर भी जल्द ही फैसला लिया जाएगा।
-केएम पांडुरंग, डीसी, सोनीपत।
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दरअसल, रविवार को शक्ति प्रदर्शन के साथ डीसी को ज्ञापन देने की बात पहले प्रचारित की गई थी। इसीलिए गांव-गांव में रविवार के लिए जनसंपर्क अभियान भी चलाया गया था। यही वजह रही कि रविवार को धरनास्थल पर भारी संख्या में समुदाय के लोग पहुंचे थे। इस दौरान कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखे गए थे। गौरतलब है कि 5 जून से अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर लघु सचिवालय स्थित पार्क में जाट न्याय धरना शुरू किया गया था। इस दौरान पहले भूख हड़ताल और फिर क्रमिक अनशन किया गया। धरने के चलते लघु सचिवालय और आसपास जहां पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी, वहीं शहर के मुख्य चौक-चौराहों के साथ-साथ गोहाना, जीटी रोड, नहर और रेलवे ट्रैक पर भी अर्धसैनिक बल लगाए गए थे। एहतियातन जिले में धारा 144 लगाई गई थी। जिसके चलते जेसीबी मशीनों पर रोक लगा दी गई थी। इतना ही नहीं इंटरनेट तथा बल्क सेवाओं पर भी पाबंदी लगा गई थी।
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31 अगस्त तक स्थगित किया है आंदोलन
बता दें कि दिल्ली में प्रदेश सरकार के मंत्री और समिति के पदाधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद धरना समाप्त करने का निर्णय लिया गया था। बैठक में सरकार की ओर से न्यायसंगत सभी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया था। सोनीपत में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि धरना स्थगित किया गया है। 31 अगस्त तक धरने को स्थगित किया गया है। इसके बाद 13 सितंबर को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की बैठक होगी, उसमें आगामी रणनीति पर विचार किया जाएगा।
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ये मांगें रखी थी समिति ने
1. हाई कोर्ट में चल रहे केस में सरकार गंभीरता से करेंगी पैरवी।
2. जेल में बंद निर्दोष लोगों को छोडने की प्रक्रिया शुरू होगी।
3. 5 जून से आंदोलन की शुरूआत के बाद सरकार द्वारा दर्ज किए गए सभी मामले और नोटिस वापिस लिए जाए।
4. 130 लोगों पर दर्ज देशद्रोह के मुकदमे वापिस लिए जाए।
5. केंद्र में आरक्षण के लिए गठित की गई कमेटी के साथ हो जाट नेताओं की कराई जाए बैठक।
6. फरवरी आंदोलन के दौरान मारे गए युवकों के परिजनों को तुरंत मुआवजा दिया जाए।
हमने साबित किया कि जाट उपद्रवी नहीं है : हुड्डा
धरना समाप्त कराने आए समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहतास हुड्डा ने कहा कि फरवरी में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव के कारण हमें बदनाम किया गया। हालांकि अबकी 15 दिनों तक शांतिपूर्वक तरीके से धरना देकर हमने साबित कर दिया है कि जाट कौम उपद्रवी नहीं है। हमने अपने हक की लड़ाई शांतिपूर्वक लड़ी। हुड्डा ने कहा कि कुछ कथित खाप नेताओं ने आंदोलन का समर्थन नहीं किया तो क्या हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार हमेशा हमारे साथ धोखा करती आ रही है, लेकिन इस बार धोखा किया तो फिर से आंदोलन शुरू किया जाएगा।
जाट न्याय धरना समाप्त हो गया है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि समुदाय की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इंटरनेट सेवाएं सोमवार से शुरू की जाएगी। हालांकि धारा-144 और सेना अभी बनी रहेगी। इस पर भी जल्द ही फैसला लिया जाएगा।
-केएम पांडुरंग, डीसी, सोनीपत।