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धारा-144 लागू, आरएएफ की तीन कंपनियां तैनात

Mon, 30 May 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत Updated Mon, 30 May 2016 12:03 AM IST
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मुनक नहर के बिंदरौली हेड पर तैनात आरएएफ के जवान। - फोटो : bureau
पांच जून से जाट आरक्षण आंदोलन की दोबारा से आहट से जिला पुलिस और प्रशासन अलर्ट हो गया है। माहौल को देखते हुए डीसी ने जहां जिले में धारा-144 लागू कर दी है, वहीं आरएएफ की तीन कंपनियां बुलाई गई हैं, जिसमें एक कंपनी को मुनक नहर के बिंदरौली हेड पर तैनात किया गया है। जबकि एक पुलिस लाइन और एक बहालगढ़ के नजदीक जीटी रोड की सुरक्षा के लिए तैनात की गई है। इतना ही नहीं, डीसी ने तत्काल प्रभाव से सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। दूसरी तरफ जाट नेता भी धरने व प्रदर्शन को लेकर रणनीति बनाने लगे हैं।
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फरवरी माह में जाट आंदोलन के दौरान रोहतक और झज्जर के बाद सोनीपत में सबसे ज्यादा उपद्रव और दंगे हुए थे। दंगों में गोहाना और जीटी रोड पर जमकर आगजनी और हिंसा हुई। जिसमें आठ लोग मारे गए। दंगों के चलते आरोपियों की गिरफ्तारी व हाईकोर्ट द्वारा जाट आरक्षण पर आंतरिक रोक के बाद जाट नेताओं ने पांच जून से दोबारा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया हुआ है। इसी के चलते एक दिन पहले डीसी व डीआईजी ने जाट व खाप नेताओं के साथ मीटिंग की। मीटिंग में जाट नेताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन का भरोसा दिया है, लेकिन प्रशासन फिर भी कोई रिस्क नहीं लेना चाहता। यहीं कारण है कि डीसी ने संभावित स्थिति से निपटने के लिए आरएएफ की गृह मंत्रालय से 10 कंपनियां मांगी थी, लेकिन मंत्रालय की ओर से अभी केवल 3 कंपनी भेजी गई हैं।
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मुनक नहर, जीटी रोड और दिल्ली-अंबाला रेलवे ट्रैक अहम
फरवरी माह में आंदोलनकारियों ने मुनक नहर का पानी रोक, जीटी रोड और दिल्ली-अंबाला रेलवे ट्रैक को जाम करके प्रदेश सरकार और प्रशासन को बैकफुट पर ला लिया था। इस बार प्रशासन कोई कोताही बरतने के मूड में नहीं है। यहीं कारण है कि सबसे पहले तीनों जगह की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। बिंदरौली हेड पर तो आरएएफ की एक कंपनी तैनात भी कर दी है।
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प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच अभी से शह व मात का खेल शुरू
पांच जून से संभावित आंदोलन को लेकर अभी से जाट नेताओं व प्रशासन के बीच शह व मात का खेल शुरू हो गया है। जिला प्रशासन की ओर से न केवल धारा-144 लागू की गई है, बल्कि धरने और प्रदर्शन के लिए लघु सचिवालय के बाहर स्थान तय किया गया है, जहां अनुमति से धरना-प्रदर्शन किया जा सकता है। दूसरी तरफ प्रशासन को भनक लगी है कि प्रदर्शनकारी गांव स्तर पर धरना और प्रदर्शन कर सकते हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए गांव-गांव जाकर धरने व प्रदर्शनों से निपटना मुश्किल होगा।

आंदोलनकारी कानून हाथ में न लें, नहीं तो सख्ती से निपटेगा प्रशासन
पांच जून से जाटों के संभावित आंदोलन को देखते हुए जिला प्रशासन ने अर्धसैनिक बलों की 10 कंपनी मांगी थी, लेकिन अभी तक तीन कंपनी मिली हैं। जिले के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की छुट्टियां कैंसल कर दी गई हैं।  इसके अलावा जिले के जाट नेताओं से भी बातचीत हुई है, जिन्होंने शांतिपूर्वक आंदोलन की बात कही है। धरने और प्रदर्शन के लिए लघु सचिवालय की पार्किंग का स्थान तय किया गया है, इसके बावजूद कोई कानून तोड़ता है तो सख्त कार्रवाई होगी।

-केएम पांडुरंग, जिला उपायुक्त

रेलवे ट्रैक और जलस्रोत बाधित करने की आशंका
जिला मजिस्ट्रेट के. मकरंद पांडुरंग का कहना है कि जिले में किसी भी तरह के तनाव, जनहानि, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और मानव जीवन के खतरे को देखते हुए धारा-144 लागू की गई है। क्योंकि हाईकोर्ट द्वारा जाट आरक्षण को लेकर दिए स्टे के विरोध में सड़क, रेलवे ट्रैक, जलस्रोत बाधित करने और पावर हाउसों को नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका है। ऐसे में सीआरपीसी 1973 की धारा 144 के तहत किसी भी स्थान पर पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों के इकट्ठा होने, किसी भी तरह के आग्नेय अस्त्र, लाठी, जेली, कुल्हाड़ी, गंडासा, बरछा, तलवार, चाकू और किसी भी तरह का अन्य हथियार लेकर चलने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई गई है। यह आदेश ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारियों पर लागू नहीं होंगे। आदेश 27 जुलाई 2016 तक 60 दिनों के लिए लागू रहेंगे।
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