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आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Mon, 16 May 2016 12:18 AM IST
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सेक्टर 15 स्थित हुडा कार्यालय (फाइल फोटो)
- फोटो : bureau
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हरियाणा अर्बन डेवलेपमेंट अथॉरिटी यानी की हुडा की स्थिति इस समय गंभीर है। वित्तीय मार के चलते एक तरह से वेंटीलेटर पर है। पिछले कुछ सालों में आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया होने से हुडा धीरे-धीरे पतन की ओर बढ़ रहा है। इस मंदी के दौर में सरकार ने विकसित सेक्टरों को नगर निगम को देने की बात कहकर कुछ बोझ तो हटाया था, लेकिन आय का 75 प्रतिशत हिस्सा निगम को देने के निर्देश देकर तो कमर ही तोड़ दी। इसी वजह से कर्मचारियों के बीच चर्चाएं हैं कि थोड़े समय के बाद यह नो प्रोफिट नो लोस वाली अथॉरिटी दम तोड़ सकती है। आपको बता दें कि अथॉरिटी के लिए संपदा कार्यालय (ईओ) और एक्सईएन कार्यालय एक-दूसरे के पूरक बनकर काम करते हैं। कमाने की जिम्मेदारी ईओ पर होती है, वहीं विकास कार्यों जैसे सड़क, पानी, सीवर आदि की जिम्मेदारी एक्सईएन पर होती है। अगर हम जिले की ही बात करें तो हुडा संपदा कार्यालय ने गत वित्तीय वर्ष में तकरीबन डेढ़ करोड़ रुपये कमाए थे, जबकि एक्सईएन विंग ने इस दौरान लगभग 3 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
एक साल में कमाए 1.70 करोड़
हुडा संपदा कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2015-16 में हुडा ने 1.70 करोड़ रुपये की आय प्राप्त की। इसमें सभी तरह की फीस और प्लॉट की किश्तें शामिल हैं। इसमें से मार्च 2016 जो वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना था, उसमें केवल 8 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई है। हालांकि संपदा कार्यालय का टारगेट 4 करोड़ रुपये हासिल करने का था।
एक साल में खर्चे 3 करोड़
दूसरी ओर एक्सईएन कार्यालय ने इसी एक वर्ष के दौरान 3 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। हालांकि इसमें अलग-अलग प्रोजेक्ट पर खर्च की गई रकम शामिल नहीं है। 3 करोड़ रुपये में 1 करोड़ के लगभग तो एक्सईएन कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की तनख्वाह शामिल है। साथ ही 50 लाख के करीब कार्यालय, वॉटर सप्लाई स्टेशन के बिजली के बिल, 1.50 करोड़ के करीब मरम्मत के कार्यों खर्च किए गए हैं।
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...तो 1.70 में से देने होते 1.27 करोड़
जिस तरह से सरकार के निर्देश हैं कि हुडा को अपनी आय में से 75 प्रतिशत हिस्सा नगर निगम को देना होगा। अगर पिछले वित्तीय वर्ष को उस हिसाब से देखा जाए तो हुडा को नगर निगम के खाते में 1.27 करोड़ जमा कराने होते और हुडा के पास केवल 43 लाख रुपये ही बच पाते। जब हुडा का 1.70 करोड़ रुपए में गुजारा नहीं हो रहा तो वह 43 लाख रुपए में कैसे गुजारा कर पाएगा।
दो सेक्टर बचे तो और भी खर्चा
जिस तरह से हुडा के 50 प्रतिशत से कम बसावट वाले सेक्टरों को हुडा के पास ही रखने की योजना बनाई जा रही है, वह योजना सोनीपत में खतरनाक साबित हो सकती हैं। इस योजना के हिसाब से सेक्टर-7 और 13 हुडा के पास ही रह सकते हैं। इन दोनों सेक्टरों में सड़कों से लेकर सीवर, पानी और बिजली का बहुत काम बाकी है। जिस पर करोड़ों रुपया खर्च होगा। इसी वजह से अधिकारियों को इस मामले में भी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
डेपुटेशन है शुरुआत, अंत की ओर बढ़ रहे कदम
हुडा कर्मचारियों के बीच चर्चाएं जोरों पर है कि हुडा को खत्म किया जा सकता है। क्योंकि जिस तरह से सेक्टरों को स्थानीय निकाय को दिया जा रहा है और कर्मचारियों को डेपुटेशन पर लगाया जा रहा है। इससे स्पष्ट संकेत हैं कि भविष्य में हुडा कार्यालय पर ताला लग सकता है। पहले कुछ स्टाफ को डेपुटेशन पर लगाया जाएगा, उसके बाद कुछ अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को डेपुटेशन पर दिया जाएगा। डेपुटेशन के जरिए सरकार नगर निकायों में स्टाफ की कमी को भी पूरा कर लेगी।
पिछले वित्तीय वर्ष में 1.70 करोड़ रुपये की आय हुई थी। बजट तो हमारा 4 करोड़ का था। ये वो पैसे हैं जोकि इंस्टालमेंट्स, नॉन कंस्ट्रक्शन फीस, कंपाउंडिंग फीस के तौर पर हुडा को प्राप्त हुए।
-विकास ढांडा, संपदा अधिकारी, हुडा, सोनीपत।
हमारा लगभग 3 करोड़ के आसपास पिछले वित्तीय वर्ष में खर्चा हुआ है। 1 करोड़ के लगभग तो तनख्वाह बनती है। इसके अलावा 50 लाख के करीब बिजली बिल होते हैं। विकास कार्यों पर खर्च होने वाली रकम अलग है, उसका अलग बजट आता है।
-दीपक गोयल, एक्सईएसन, हुडा, सोनीपत
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एक साल में कमाए 1.70 करोड़
हुडा संपदा कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2015-16 में हुडा ने 1.70 करोड़ रुपये की आय प्राप्त की। इसमें सभी तरह की फीस और प्लॉट की किश्तें शामिल हैं। इसमें से मार्च 2016 जो वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना था, उसमें केवल 8 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई है। हालांकि संपदा कार्यालय का टारगेट 4 करोड़ रुपये हासिल करने का था।
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एक साल में खर्चे 3 करोड़
दूसरी ओर एक्सईएन कार्यालय ने इसी एक वर्ष के दौरान 3 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। हालांकि इसमें अलग-अलग प्रोजेक्ट पर खर्च की गई रकम शामिल नहीं है। 3 करोड़ रुपये में 1 करोड़ के लगभग तो एक्सईएन कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की तनख्वाह शामिल है। साथ ही 50 लाख के करीब कार्यालय, वॉटर सप्लाई स्टेशन के बिजली के बिल, 1.50 करोड़ के करीब मरम्मत के कार्यों खर्च किए गए हैं।
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...तो 1.70 में से देने होते 1.27 करोड़
जिस तरह से सरकार के निर्देश हैं कि हुडा को अपनी आय में से 75 प्रतिशत हिस्सा नगर निगम को देना होगा। अगर पिछले वित्तीय वर्ष को उस हिसाब से देखा जाए तो हुडा को नगर निगम के खाते में 1.27 करोड़ जमा कराने होते और हुडा के पास केवल 43 लाख रुपये ही बच पाते। जब हुडा का 1.70 करोड़ रुपए में गुजारा नहीं हो रहा तो वह 43 लाख रुपए में कैसे गुजारा कर पाएगा।
दो सेक्टर बचे तो और भी खर्चा
जिस तरह से हुडा के 50 प्रतिशत से कम बसावट वाले सेक्टरों को हुडा के पास ही रखने की योजना बनाई जा रही है, वह योजना सोनीपत में खतरनाक साबित हो सकती हैं। इस योजना के हिसाब से सेक्टर-7 और 13 हुडा के पास ही रह सकते हैं। इन दोनों सेक्टरों में सड़कों से लेकर सीवर, पानी और बिजली का बहुत काम बाकी है। जिस पर करोड़ों रुपया खर्च होगा। इसी वजह से अधिकारियों को इस मामले में भी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
डेपुटेशन है शुरुआत, अंत की ओर बढ़ रहे कदम
हुडा कर्मचारियों के बीच चर्चाएं जोरों पर है कि हुडा को खत्म किया जा सकता है। क्योंकि जिस तरह से सेक्टरों को स्थानीय निकाय को दिया जा रहा है और कर्मचारियों को डेपुटेशन पर लगाया जा रहा है। इससे स्पष्ट संकेत हैं कि भविष्य में हुडा कार्यालय पर ताला लग सकता है। पहले कुछ स्टाफ को डेपुटेशन पर लगाया जाएगा, उसके बाद कुछ अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को डेपुटेशन पर दिया जाएगा। डेपुटेशन के जरिए सरकार नगर निकायों में स्टाफ की कमी को भी पूरा कर लेगी।
पिछले वित्तीय वर्ष में 1.70 करोड़ रुपये की आय हुई थी। बजट तो हमारा 4 करोड़ का था। ये वो पैसे हैं जोकि इंस्टालमेंट्स, नॉन कंस्ट्रक्शन फीस, कंपाउंडिंग फीस के तौर पर हुडा को प्राप्त हुए।
-विकास ढांडा, संपदा अधिकारी, हुडा, सोनीपत।
हमारा लगभग 3 करोड़ के आसपास पिछले वित्तीय वर्ष में खर्चा हुआ है। 1 करोड़ के लगभग तो तनख्वाह बनती है। इसके अलावा 50 लाख के करीब बिजली बिल होते हैं। विकास कार्यों पर खर्च होने वाली रकम अलग है, उसका अलग बजट आता है।
-दीपक गोयल, एक्सईएसन, हुडा, सोनीपत