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मलेरिया अथवा डेंगू के बारे में गलत प्रचार किया तो निजी अस्पतालों पर होगी कार्रवाई
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Wed, 15 Jun 2016 12:14 AM IST
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लघु सचिवालय के कांफ्रेंस हॉल में अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते डीसी केएम पांडुरंग
- फोटो : bureau
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उपायुक्त के. मकरंद पांडुरंग ने कहा कि अगर कोई निजी अस्पताल मलेरिया अथवा डेंगू के बारे में गलत प्रचार करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वह मंगलवार को लघु सचिवालय के कांफ्रेंस हॉल में मलेरिया रोधी माह के संबंध में आयोजित अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
डीसी केएम पांडुरंग ने कहा कि निजी अस्पतालों को नोटिस बोर्ड पर विभिन्न जांच रिपोर्टों के रेट लगाने होंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई मलेरिया का पॉजीटिव केस आता है तो इस बारे में तुरंत सिविल सर्जन कार्यालय को सूचित करना होगा ताकि केस की क्रॉस जांच की जा सके। उपायुक्त ने कहा कि अक्सर गलत रिपोर्टिंग की वजह से जनता में भय की स्थिति पैदा हो जाती है। इस स्थिति से बचने की जिम्मेदारी निजी अस्पतालों के संचालकों पर है। उपायुक्त ने महिला एवं विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि वे जांच पड़ताल करके रिपोर्ट प्रस्तुत करें कि कहीं किसी क्षेत्र में पेयजल पाइप लाइन अथवा सीवरेज की लीकेज से गंदा पानी एकत्र तो नहीं हो रहा है। साथ ही उन्हें यह भी निर्देश दिए गए कि घर-घर जाकर यह जांच करें कि कहीं कोई बुखार से पीड़ित तो नहीं है। उपायुक्त ने कहा कि मलेरिया से बचाव के लिए जनता की भी बराबर की जिम्मेदारी है। अगर किसी के घर अथवा कार्यालय में पानी जमा पाया जाता है तो ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में सिविल सर्जन जेएस पूनिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा 13 से 23 जून तक रैपिड फीवर सर्वे किया जा रहा है। जिसके तहत स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी घर-घर जाकर जांच पड़ताल कर रहे हैं और स्लाइड तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर कोई मलेरिया केस पाया जाता है तो स्वास्थ्य कर्मी की देख रेख में उसका उपचार किया जाता है।
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डीसी केएम पांडुरंग ने कहा कि निजी अस्पतालों को नोटिस बोर्ड पर विभिन्न जांच रिपोर्टों के रेट लगाने होंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई मलेरिया का पॉजीटिव केस आता है तो इस बारे में तुरंत सिविल सर्जन कार्यालय को सूचित करना होगा ताकि केस की क्रॉस जांच की जा सके। उपायुक्त ने कहा कि अक्सर गलत रिपोर्टिंग की वजह से जनता में भय की स्थिति पैदा हो जाती है। इस स्थिति से बचने की जिम्मेदारी निजी अस्पतालों के संचालकों पर है। उपायुक्त ने महिला एवं विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि वे जांच पड़ताल करके रिपोर्ट प्रस्तुत करें कि कहीं किसी क्षेत्र में पेयजल पाइप लाइन अथवा सीवरेज की लीकेज से गंदा पानी एकत्र तो नहीं हो रहा है। साथ ही उन्हें यह भी निर्देश दिए गए कि घर-घर जाकर यह जांच करें कि कहीं कोई बुखार से पीड़ित तो नहीं है। उपायुक्त ने कहा कि मलेरिया से बचाव के लिए जनता की भी बराबर की जिम्मेदारी है। अगर किसी के घर अथवा कार्यालय में पानी जमा पाया जाता है तो ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बैठक में सिविल सर्जन जेएस पूनिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा 13 से 23 जून तक रैपिड फीवर सर्वे किया जा रहा है। जिसके तहत स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी घर-घर जाकर जांच पड़ताल कर रहे हैं और स्लाइड तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर कोई मलेरिया केस पाया जाता है तो स्वास्थ्य कर्मी की देख रेख में उसका उपचार किया जाता है।
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