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जुर्माना जमा कराइए, एफआईआर से छुटकारा पाइए
ब्यूरो अमर उजाला /सोनीपत
Updated Tue, 30 May 2017 11:47 PM IST
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खेत में जलाए गए फाने
- फोटो : amarujala beuro
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गेहूं की फसल कटाई के समय फाने जलाकर प्रदूषण फैलाने वालों पर भले ही उस समय मुकदमा दर्ज किया गया हो, लेकिन अब उन सभी के मुकदमे खत्म करने की तैयारी हो गई है। फाने जलाने वाले सभी किसानों को नोटिस भेजा गया है कि यदि वे 15 दिन में जुर्माना जमा करा देते हैं तो उनकी एफआईआर खत्म हो जाएगी। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से यह नोटिस किसानों को जारी किए गए हैं, जो पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर भेजे गए हैं। जिसका जुर्माना जमा हो जाएगा, उसकी रिपोर्ट अधिकारियों के पास भेज दी जाएगी, जिसके आधार पर एफआईआर खत्म हो जाएगी। इस तरह प्रदूषण फैलाने वाले किसानों के खिलाफ सरकार पूरी तरह से नरम पड़ गई है।
प्रदेश में दर्ज हुए 950 मुकदमे
अप्रैल व मई की शुरुआत में गेहूं की कटाई शुरू हुई तो किसानों ने गेहूं निकलवाकर खेतों में फाने जलाने शुरू कर दिए। फाने जलाने पर सरकार की ओर से पाबंदी लगाई हुई है, उसके बावजूद खेतों में खूब फाने जलाए गए। इससे पेड-पौधे भी जल गए तो वायु प्रदूषण भी खूब हुआ। इसके खिलाफ अभियान चलाते हुए प्रशासन की ओर से खेतों में फाने जलाने वाले किसानों पर मुकदमे दर्ज कराए गए ताकि फाने जलाने वालों पर शिकंजा कसा जा सके। प्रदेश में पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर लगभग 950 मुकदमे दर्ज कराए गए थे। इन सभी को अब प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से नोटिस भेजे गए हैं। उस नोटिस को भेजकर कहा गया है कि जिन किसानों ने खेतों में फाने जलाकर प्रदूषण किया है, वह जमीन के रकबे के आधार पर जुर्माना जमा करा सकते हैं। यह नोटिस मिलते ही किसानों ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग में जुर्माना जमा कराना शुरू कर दिया है।
143 ने जमा कराया 3.5 लाख से ज्यादा
प्रदेश में जिन लगभग 950 किसानों पर मुकदमा दर्ज करने के बाद नोटिस भेजे गए थे वे नोटिस मिलते ही एफआईआर खत्म कराने के लिए दौड़ने लगे है। यही कारण है कि पांच दिन के अंदर ही प्रदेश में लगभग 143 किसानों ने सरकार के खजाने में 3.5 लाख रुपये जमा करा दिए हैं।
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इस तरह देना होगा जुर्माना
जिस किसी ने 2 एकड़ तक के खेत में फाने जलाए हैं, उसे ढाई हजार रुपये का जुर्माना जमा कराना होगा। जिसने 2-5 एकड़ तक के खेत में फाने जलाए है, उसको पांच हजार रुपये जुर्माना जमा कराना होगा। वहीं, जिसने 5 एकड़ से ज्यादा के खेत में फाने जलाए है, उसे 15 हजार रुपये जुर्माना जमा कराना होगा। यह रकम जमा कराने के बाद ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिससे एफआईआर खत्म हो सके।
अप्रैल में तेजी से बढ़ा था प्रदूषण
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के हर माह के आंकड़ों को देखा जाए तो अप्रैल में खेतों में खूब फाने जलाए गए थे। इसका पता इसी बात से चलता है कि फरवरी व मार्च के मुकाबले अप्रैल में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया था। फरवरी में जहां हवा में सल्फर डाई ऑक्साइड गैस 12.45 व नाइट्रोजन ऑक्साइड 20.65 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब थी, वहीं मार्च में यह 19.61 व 27.22 हो गई थी। अप्रैल में इनमें काफी बढ़ोतरी हुई और सल्फर डाई ऑक्साइड 29.78 व नाइट्रोजन ऑक्साइड भी 29.78 तक पहुंच गई थी। इनमें सल्फर डाई ऑक्साइड तीव्र गंध वाली विषैली गैस होती है तो नाइट्रोजन ऑक्साइड आग लगने वाली जगहों पर ज्यादा हो जाती है क्योंकि यह आग लगने के कारण उच्च तापमान में होती है।
जिन किसानों पर फाने जलाने पर मुकदमा दर्ज हुआ था उनको नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिससे वे जुर्माना जमा करा सकें। उनको कितना जुर्माना जमा करना है, यह खेत के अनुसार पटवारी की रिपोर्ट से तय किया गया है। यह जुर्माना जमा होने के बाद विभाग की ओर से रिपोर्ट भेज दी जाएगी, जिससे एफआईआर खत्म हो जाए।
-नवीन गुलिया, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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प्रदेश में दर्ज हुए 950 मुकदमे
अप्रैल व मई की शुरुआत में गेहूं की कटाई शुरू हुई तो किसानों ने गेहूं निकलवाकर खेतों में फाने जलाने शुरू कर दिए। फाने जलाने पर सरकार की ओर से पाबंदी लगाई हुई है, उसके बावजूद खेतों में खूब फाने जलाए गए। इससे पेड-पौधे भी जल गए तो वायु प्रदूषण भी खूब हुआ। इसके खिलाफ अभियान चलाते हुए प्रशासन की ओर से खेतों में फाने जलाने वाले किसानों पर मुकदमे दर्ज कराए गए ताकि फाने जलाने वालों पर शिकंजा कसा जा सके। प्रदेश में पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर लगभग 950 मुकदमे दर्ज कराए गए थे। इन सभी को अब प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से नोटिस भेजे गए हैं। उस नोटिस को भेजकर कहा गया है कि जिन किसानों ने खेतों में फाने जलाकर प्रदूषण किया है, वह जमीन के रकबे के आधार पर जुर्माना जमा करा सकते हैं। यह नोटिस मिलते ही किसानों ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग में जुर्माना जमा कराना शुरू कर दिया है।
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143 ने जमा कराया 3.5 लाख से ज्यादा
प्रदेश में जिन लगभग 950 किसानों पर मुकदमा दर्ज करने के बाद नोटिस भेजे गए थे वे नोटिस मिलते ही एफआईआर खत्म कराने के लिए दौड़ने लगे है। यही कारण है कि पांच दिन के अंदर ही प्रदेश में लगभग 143 किसानों ने सरकार के खजाने में 3.5 लाख रुपये जमा करा दिए हैं।
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इस तरह देना होगा जुर्माना
जिस किसी ने 2 एकड़ तक के खेत में फाने जलाए हैं, उसे ढाई हजार रुपये का जुर्माना जमा कराना होगा। जिसने 2-5 एकड़ तक के खेत में फाने जलाए है, उसको पांच हजार रुपये जुर्माना जमा कराना होगा। वहीं, जिसने 5 एकड़ से ज्यादा के खेत में फाने जलाए है, उसे 15 हजार रुपये जुर्माना जमा कराना होगा। यह रकम जमा कराने के बाद ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिससे एफआईआर खत्म हो सके।
अप्रैल में तेजी से बढ़ा था प्रदूषण
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के हर माह के आंकड़ों को देखा जाए तो अप्रैल में खेतों में खूब फाने जलाए गए थे। इसका पता इसी बात से चलता है कि फरवरी व मार्च के मुकाबले अप्रैल में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया था। फरवरी में जहां हवा में सल्फर डाई ऑक्साइड गैस 12.45 व नाइट्रोजन ऑक्साइड 20.65 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब थी, वहीं मार्च में यह 19.61 व 27.22 हो गई थी। अप्रैल में इनमें काफी बढ़ोतरी हुई और सल्फर डाई ऑक्साइड 29.78 व नाइट्रोजन ऑक्साइड भी 29.78 तक पहुंच गई थी। इनमें सल्फर डाई ऑक्साइड तीव्र गंध वाली विषैली गैस होती है तो नाइट्रोजन ऑक्साइड आग लगने वाली जगहों पर ज्यादा हो जाती है क्योंकि यह आग लगने के कारण उच्च तापमान में होती है।
जिन किसानों पर फाने जलाने पर मुकदमा दर्ज हुआ था उनको नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिससे वे जुर्माना जमा करा सकें। उनको कितना जुर्माना जमा करना है, यह खेत के अनुसार पटवारी की रिपोर्ट से तय किया गया है। यह जुर्माना जमा होने के बाद विभाग की ओर से रिपोर्ट भेज दी जाएगी, जिससे एफआईआर खत्म हो जाए।
-नवीन गुलिया, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी