Sonipat: घर के अंदर का प्रदूषण बताएगा 2डी सेंसिंग मैटेरियल, पर्यावरण निगरानी के लिए की नई खोज
भीतर के प्रदूषण का पता लगाने में सक्षम 2 -डी मैटेरियल बेस्ड स्मार्ट सेंसर के डिजाइन एवं डेवलपमेंट पर शोध किया। डॉ. सत्यपाल नेहरा ने बताया कि हम अपना अधिकतम समय बाहरी वातावरण की तुलना में घर या कार्यालय के अंदर के वातावरण में व्यतीत करते हैं।
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प्रदूषण शरीर पर विपरित प्रभाव डालता है। घर से बाहर निकलने पर हम प्रदूषण से बचाव के लिए कई प्रकार के प्रबंध करते हैं, लेकिन घर के अंदर के प्रदूषण का पता नहीं लगा पाते। जिस कारण हमें कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता। कई बार बाहर की अपेक्षा हमारे भवन के अंदर ज्यादा प्रदूषण होता है।
डीसीआरयूएसटी की शोधार्थी ने एनवायरमेंट मॉनिटरिंग के लिए बनाया 2डी सेंसिंग मैटेरियल
जिस कारण हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ना प्रारंभ हो जाता है। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी), मुरथल की शोधार्थी डॉ. वंदना ने घर के अंदर के प्रदूषण का पता लगाने के लिए 2डी सेंसिंग मैटेरियल बनाया है, जिससे हम भवन के अंदर के प्रदूषण का आसानी से पता लगा सकते हैं।
बाहर की अपेक्षा भवन के अंदर हो सकता है ज्यादा प्रदूषण
डीसीआरयूएसटी, मुरथल में ऊर्जा एवं पर्यावरण अध्ययन के लिए उत्कर्ष केंद्र में सहायक प्रोफेसर डॉ. सत्यपाल नेहरा के दिशानिर्देशन में शोधार्थी डॉ. वंदना ने भवन के भीतर के प्रदूषण का पता लगाने में सक्षम 2 -डी मैटेरियल बेस्ड स्मार्ट सेंसर के डिजाइन एवं डेवलपमेंट पर शोध किया। डॉ. सत्यपाल नेहरा ने बताया कि हम अपना अधिकतम समय बाहरी वातावरण की तुलना में घर या कार्यालय के अंदर के वातावरण में व्यतीत करते हैं।
शरीर पर डालता है विपरीत प्रभाव
प्रदूषण का स्तर बाहर की अपेक्षा भवनों के अंदर ज्यादा होता है। इंडोर प्रदूषण के कारण हमें अधिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिसका मुख्य कारण भवनों में उपयोग में आने वाली वस्तुएं जैसे पेंट, वार्निश, सफाई उत्पाद, रूम फ्रेशनर, सौंदर्य प्रसाधन, फोटो कॉपी के काम आने वाली मशीने इत्यादि में बेंजीन, जाइलीन, ऐसीटोन, टोलवीन आदि वाष्पशील यौगिकों का उत्सर्जन होता है जो दीर्घकाल में स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। अनुसंधानकर्ता वंदना चौधरी ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार की इंस्पायर फेलोशिप के अंतर्गत ऊर्जा एवं पर्यावरण प्रबंधन में यह शोध कार्य पूर्ण किया है।
2 डी आधारित सेंसिंग मैटेरियल क्षेत्र में शोध की अपार संभावनाएं
शोध कार्य में अत्यधिक संवेदनशील और तीव्र प्रतिक्रिया पर आधारित मोलिब्डेनम ट्राइऑक्साइड-मेजो पोरस ग्रेफाइट कार्बन नाइट्राइड एवं प्लेटिनम-मोलिब्डेनम ट्राइऑक्साइड बेस्ड मेजोपोरस ग्रेफाइट कार्बन नाइट्राइड का संश्लेषण किया गया और पाया कि सामान्यत: इंडोर वातावरण में पाए जाने वाले बेंजीन, जाइलीन, ऐसीटोन, टोलवीन की तीव्र सांद्रता के लिए कम तापमान पर निर्भर संवेदी प्रतिक्रिया करते हैं।
सहायक प्रोफेसर सत्यपाल नेहरा ने कहा कि वर्तमान में 2 डी आधारित सेंसिंग मैटेरियल क्षेत्र में शोध की अपार संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में शोध कर हम प्रदूषण की मॉनिटरिंग करके समय रहते आवश्यक कदम उठा सकते हैं। इस तरह का शोध कार्य स्वच्छ पर्यावरण के साथ स्वस्थ जीवन बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।