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Sonipat News: 6 अक्तूबर को शरद पूर्णिमा, चंद्रमा से होगी अमृत की वर्षा

Sat, 04 Oct 2025 02:35 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sat, 04 Oct 2025 02:35 AM IST
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Sharad Purnima on October 6, the moon will shower nectar
फोटो 16- सोनीपत के कामी रोड ​स्थित सिद्धपीठ बाबा धाम मंदिर। संवाद
सोनीपत। आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि इस वर्ष 6 अक्तूबर को मनाई जाएगी। शरद पूर्णिमा का महत्व साल की सभी 12 पूर्णिमा तिथियों में सबसे खास है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर औषधीय अमृत की वर्षा करते हैं। शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की रोशनी में मां लक्ष्मी प्रसन्न मुद्रा में धरती पर भ्रमण करने आती हैं। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने महारास किया था। उन्होंने बंसी बजाकर गोपियों को ईश्वरीय अमृत का पान कराया था।
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आचार्य डॉ. मनमोहन मिश्रा ने बताया कि पूर्णिमा तिथि दोपहर 12:23 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 7 अक्तूबर सुबह 9:16 बजे तक रहेगी। पंचांग के अनुसार शरद पूर्णिमा पर्व सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रोदय शाम 5:27 बजे होगा। चंद्रमा रात को अपनी 16 कलाओं से पूर्ण औषधीय अमृत की वर्षा करेंगे इसलिए खीर का प्रसाद तैयार कर चांद की रोशनी में रखा जाता है।
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बर्तन को थाली की जगह पतले कपड़े से ढका जाता है ताकि चंद्रमा की किरणों का असर प्रसाद पर पड़ सके। चांद की किरणें अपनी शीतलता से खीर की तासीर को ठंडा करती हैं। इस प्रसाद का सेवन करने से पेट संबंधी रोग, जलन और त्वचा संबंधी बीमारियों सहित कई रोगों से निजात मिलती है। साथ ही पित्त से जुड़ी समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है।
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इन मंदिरों में तैयार होगा प्रसाद
शरद पूर्णिमा के दिन ककरोई चौक स्थित श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर, बड़ा बाजार के श्रीदेवी चिटाने वाली माता मंदिर सिद्धपीठ, कामी रोड स्थित सिद्धपीठ बाबा धाम मंदिर, नरेंद्र नगर के प्राचीन शिव मंदिर सहित शहर के प्रमुख मंदिरों में सोमवार दोपहर बाद खीर का प्रसाद तैयार किया जाएगा। इसे रात को चंद्रमा की रोशनी में रखने के बाद मंगलवार को आरती के बाद श्रद्धालुओं को वितरित किया जाएगा। आचार्य डॉ. मनमोहन ने बताया कि औषधीय खीर का सेवन खाली पेट किया जाता है।
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