फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   Rule 134A: Future of students in midstream, new schools are not giving admission, old ones are asking for more fees

नियम 134ए : मझधार में विद्यार्थियों का भविष्य, नए स्कूल दाखिला नहीं दे रहे, पुराने मांग रहे ज्यादा फीस

Wed, 12 Jan 2022 01:24 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jan 2022 01:24 AM IST
विज्ञापन
Rule 134A: Future of students in midstream, new schools are not giving admission, old ones are asking for more fees
निजी स्कूल संचालकों के साथ बैठक करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी सुरजीत। संवाद - फोटो : Sonipat
नियम 134ए के तहत निजी स्कूलों में दाखिले की चाह रखने वाले 1297 विद्यार्थी मझधार में फंसे हुए हैं। मूल्यांकन परीक्षा पास करने के बाद विद्यार्थियों ने एसएलसी (स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट) तो निकलवा लिया, लेकिन नए स्कूल दाखिला नहीं दे रहे। कुछ अभिभावकों ने बच्चों का साल बचाने के लिए पुराने स्कूल में दाखिला करवाने की सोची तो वहां भी अभिभावकों के सामने ज्यादा फीस की मांग रख दी। ये स्कूल अब अभिभावकों ने पूरे नौ महीने की फीस मांग रहे हैं।
विज्ञापन

मंगलवार को बीईओ कार्यालय पहुंचे कुछ अभिभावकों ने नियम 134ए के नोडल अधिकारी मनोज वर्मा को दी शिकायत में इस प्रकार की समस्या बताई है। नियम 134ए के तहत 2544 विद्यार्थियों को स्कूल अलॉट किए गए थे। विद्यार्थियों को अलॉट स्कूल में उपस्थिति दर्ज करवाने की अंतिम तिथि तीन बार बढ़ाए जाने के बाद भी अब तक 980 विद्यार्थियों का ही दाखिला सुनिश्चित हो पाया है। शेष विद्यार्थियों के अभिभावक दाखिला करवाने के लिए लगातार निजी स्कूलों व अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। इन विद्यार्थियों को दाखिला मिलेगा या नहीं, इसको लेकर भी अभिभावकों में असमंजस बना हुआ है। कोरोना महामारी में स्कूल बंद होने से जब बाकी बच्चे घर बैठकर ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ 134ए के तहत दाखिला लेने वाले विद्यार्थी पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं। इन बच्चों के अभिभावक अलॉट स्कूलों में दाखिला दिलवाने की मांग के लिए रोजाना धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
विज्ञापन

अभिभावक बोले-बच्चों का मना दिया मजाक
मॉडल टाउन स्थित खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे अभिभावक बृजमोहन, प्रताप, रेणुका व अन्य ने बताया कि नियम 134ए के नाम पर बच्चों का मजाक बनाकर रख दिया है। पहले निजी स्कूलों में दाखिला दिलवाने के लिए पिछले स्कूल से एसएलसी निकलवा लिया। अब न तो नए स्कूल में दाखिला मिल रहा है और पुराने स्कूल में दोबारा दाखिला करवाने गए तो वहां भी दाखिला सहित नौ माह की फीस मांगी गई। ऐसे में अभिभावक कहां जाएं। बच्चे बिना पढ़ाई घर बैठे हैं और पूछते हैं कि हमारा दाखिला कब होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

बीईओ ने निजी स्कूल संचालकों के साथ की बैठक
गन्नौर। लघु सचिवालय स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में मंगलवार को खंड शिक्षा अधिकारी सुरजीत ने निजी स्कूल संचालकों के साथ बैठक की। बैठक में क्षेत्र के लगभग सभी निजी स्कूल संचालक मौजूद रहे। बैठक में 134ए व अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई। बीईओ ने निजी स्कूल संचालकों को निर्देश दिए कि स्कूलों में शिविर लगाकर 15 वर्ष से ऊपर के बच्चों को वैक्सीन लगवाएं और स्कूल में उसी अध्यापक को आने की अनुमति दी जाए, जिसको दोनों डोज लग चुकी हों। उन्होंने कहा कि आए दिन शिकायत मिल रही है कि छुट्टी के बाद भी स्कूल खुले हैं। निजी स्कूल खुले हुए मिलते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी राजकीय स्कूलों में 80 प्रतिशत से करीब 15 वर्ष से ऊपर के बच्चों को वैक्सीन लग चुकी है। खंड शिक्षा अधिकारी सुरजीत कहा कि जिन निजी स्कूलों ने 134ए के तहत बच्चों को दाखिला नहीं दिया है, उनसे लिखित में जवाब मांगा गया है।

वर्जन
कुछ अभिभावकों ने शिकायत दी है कि वे पुराने स्कूल में बच्चों का दाखिला करवाने गए, लेकिन उन स्कूलों ने भी ज्यादा फीस की मांग की है। अभिभावकों को आश्वासन दिया गया है कि जिन बच्चों को स्कूल अलॉट हुए हैं, उन्हें हर हाल में दाखिला दिलवाया जाएगा। इसके लिए अभिभावकों को थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। सरकार ने निजी स्कूलों की प्रतिपूर्ति और फीस बढ़ाने की मांगें पूरी कर दी हैं। निजी स्कूल दाखिला न दें, ऐसा कोई कारण नहीं है।
- मनोज वर्मा, नोडल अधिकारी, नियम 134ए सोनीपत
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed