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गोशाला में गर्मी में खिलाई जा रही सड़ी हुई पुआल, 11 माह में 733 गोवंश की मौत

Tue, 08 Jun 2021 10:43 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 08 Jun 2021 10:43 PM IST
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Rotten straw being fed in summer in Gaushala, 733 cows died in 11 months
सरकार भले ही गो संरक्षण का दावा करती हो और उसके लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हो। इसके बावजूद हकीकत यह है कि सरकारी गोशालाओं में गोवंश की बेकद्री हो रही है और उनको सही से चारा तक नहीं मिल रहा है।
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निगम की कमासपुर गोशाला में कुछ ऐसे ही हालात हैं, जहां पिछले कई महीनों से गोवंश को सड़ी हुई पुआल खिलाई जा रही है। इसके साथ ही गोवंश को पेट भरकर चारा तक नहीं दिया जाता है और वहां पिछले कई महीनों से गोवंश तड़पकर मर रहे हैं। यह हाल उस समय है, जब कुछ महीने पहले भी वहां ठेकेदार का चारे में घपला पकड़ में आया था। उसके बावजूद ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और वह दोबारा से सड़ी हुई पुआल गोवंश को खिलाने लगा। इसमें नगर निगम के अधिकारी भी अभी तक लापरवाह बने हुए थे, लेकिन जब कमिश्नर को इस बारे में बताया गया तो उसके बाद निगम कर्मियों ने गोशाला की तरफ दौड़ लगानी शुरू कर दी।
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नगर निगम ने करोड़ों रुपये खर्च करके कमासपुर गांव में गोशाला बनाई हुई है। जहां वर्ष 2018 में शहर से पकड़कर गोवंश छोड़े गए थे और वहां 11 महीने पहले करीब 1800 गोवंश थे। लेकिन वहां गोवंश के लिए चारे की व्यवस्था तक ठीक नहीं है तो वहां कुछ महीने पहले तक चारा भी एक-एक सप्ताह तक नहीं पहुंचाया जाता था और एक सप्ताह तक गोवंश भूखे रहते थे। जिससे गोवंश लगातार तड़पकर दम तोड़ रहे हैं। पिछले डीसी श्यामलाल पूनिया ने मामला सामने आने पर गोशाला का निरीक्षण किया था और उसके बाद कुछ दिन के लिए व्यवस्था सुधरी थी, लेकिन अब पिछले कई महीने से हालात काफी बिगड़े हुए हैं। वहां गोवंश को सड़ी हुई पुआल को काटकर खिलाया जा रहा है। वह भी पूरा नहीं दिया जाता है और वहां एक महीने में करीब 80 गोवंश की मौत हो गई है। हालात यह हैं कि गोशाला में 11 महीने में 733 गोवंश की मौत हो गई है और इस समय वहां केवल 1067 गोवंश बचे हुए हैं।
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निगम की जांच रिपोर्ट में मिला था चारा सप्लाई में घपला, फिर भी नहीं सुधरा ठेकेदार
गोशाला में भूसे के साथ ही हरा चारा भी सप्लाई करना होता है और ठेके के नियमों में यह शामिल भी किया गया है, लेकिन गोशाला में हरा चारा एक-एक महीने तक नहीं पहुंचता है। गोवंश के लिए भूसा तक भी नहीं लाया जाता है, बल्कि पुआल काटकर गोवंश के सामने खाने के लिए डाल दी जाती है। गोवंश को भूखा होने के कारण मजबूरी में वह सड़ी हुई पुआल ही खानी पड़ती है। वह भी गोवंश के लिए काफी कम डाली जाती है और अधिकतर गोवंश भूखे ही रहते हैं। यह मामला कई महीने पहले भी सामने आने पर निगम के सीएसआई व एसआई से जांच कराई गई थी। जिनकी जांच रिपोर्ट में सामने आया था कि चारा नहीं मिलने से गोवंश के भूखे मरने की नौबत आ रही है। इसके अलावा गोवंश के शेड के नीचे काफी गंदगी व कर्मचारियों के कोई काम न करके फ्री में वेतन लेने के आरोप लगाए गए थे। उसके बावजूद ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं की गई और ठेकेदार ने दोबारा खेल करना शुरू कर दिया।
निगम कमिश्नर को बताया तो कर्मियों ने गोशाला पहुंचकर पुआल उठवाई
गोशाला में गोवंश को सड़ी हुई पुआल खिलाने के कारण लगातार मौत होने के बारे में जब निगम कमिश्नर जगदीश शर्मा को बताया गया तो उसके कुछ देर बाद ही निगमकर्मी गोशाला में पहुंच गए। जहां पुआल की जांच करने के बाद उसको वहां से उठवा दिया गया और वहां की व्यवस्था को सुधारने का प्रयास किया गया, लेकिन वहां के हालात इतने खराब हैं कि वह इतनी जल्दी नहीं सुधर सकते।
गोसेवक ने ठेकेदार व अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई
गोसेवक राम पाहुजा ने कहा कि 11 महीने में 733 गोवंश की मौत हो गई है और उनकी मौत के लिए पूरी तरह से ठेकेदार, निगम अधिकारी व डाक्टर जिम्मेदार है। इन सभी की जिम्मेदारी बनती है कि वह गोशाला में व्यवस्था को बेहतर रखे और ठेकेदार कोई गड़बड़ करता है तो उस पर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही उससे व्यवस्था में सुधार कराया जाए, लेकिन उसके बावजूद कुछ नहीं किया जा रहा है और गोवंश की लगातार मौत हो रही है। इस मामले में डीसी से शिकायत करके ठेकेदार, अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।

वर्जन
गोशाला में गोवंश को सड़ी हुई पुआल खिलाने के बारे में जानकारी नहीं है। इस तरह से हो रहा है तो उसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी और गोशाला में व्यवस्था को सुधारा जाएगा।
- जगदीश शर्मा, कमिश्नर नगर निगम
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